स्वच्छ कुंभ के पहरेदार रातों रात बन गए सेलिब्रिटी

प्रधानमंत्री ने कुम्भ में संगम स्नान के बाद जिन सफाई कर्मियों के पांव पखारे वह रातों रात सेलिब्रटी बन गए हैं। प्यारेलाल, नरेश कुमार,ज्योति, होरी लाल और चौबी से बात करने, उनके बारे में जानने के लिए मीडिया में होड़ मची हुई है।

आशीष पांडे
प्रयागराज: प्रधानमंत्री ने कुम्भ में संगम स्नान के बाद जिन सफाई कर्मियों के पांव पखारे वह रातों रात सेलिब्रटी बन गए हैं। प्यारेलाल, नरेश कुमार,ज्योति, होरी लाल और चौबी से बात करने, उनके बारे में जानने के लिए मीडिया में होड़ मची हुई है। कुम्भनगर में इन पांच सफाई कर्मियों से रूबरू होने के लिए जब यह संवाददाता सेक्टर 3 के स्वास्थ्य विभाग के शिविर में पहुंचा और इन लोगों के बारे में दरयाफ्त की तो वहां खड़े प्यारेलाल, नरेश,ज्योति और होरी लाल बोले, ‘साहब हम थक गएन बार बार प्रेस वाले घेर रहे हैं।’ जानते हैं इनकी जिंदगी के बारे में :

ज्योति
27 वर्षीय ज्योति गेरवाघाट कोरबा, छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं। वह आठवीं कक्षा तक पढ़ी हैं। गरीबी और सामाजिक भेदभाव के चलते वह आगे पढ़ न सकीं। वह कुम्भ नगर में बतौर सफाई कर्मी सेक्टर 3 में चार महीने से कार्यरत हैं। अपने मूल निवास में वह एक गृहणी हैं। ज्योति के पति बबलू एक मजदूर है। ज्योति का कहना है कि सफाईकर्मियों के संग जो सामाजिक भेदभाव है वह दूर होना चाहिए।

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नरेश कुमार
30 वर्षीय नरेश कुमार नारायणपुर कमासिन, बांदा के रहने वाले हैं। वह मेट हैं और सफाई कर्मियों से काम करवाते हैं। नरेश आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं और गांव में शादी ब्याह में बैंड बजाने का काम करते हैं। उनके तीन बच्चे हैं – शुभम (8), चांदनी (7), शिवम (4) और आयुष (1 वर्ष)। शुभम और चांदनी गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करते हैं। नरेश बताते हैं कि गांव में उन्हें कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली है। वह आठ वर्ष से कुम्भ में सफाई कर्मचारियों के मेट का काम कर रहे हैं। इस बार वह चार महीने से कुंभ में तैनात हैं। मेले में वह परिवार समेत आए हैं। यहां मेला प्रशासन द्वारा राशन कार्ड बनवाया गया है। जिसमें 2.5 किलो चीनी व 3 किलो आटा मिल रहा है।

प्यारेलाल
45 वर्षीय प्यारेलाल बबेरू, बांदा के रहने वाले हैं। उनके तीन पुत्र हैं – संजय (16), बीरू (14) और धीरू (13)। उन्होंने बताया कि संजय दसवीं कक्षा का बोर्ड की परीक्षा दे रहा है और धीरू 8वीं में पढ़ता है। बीरू ने 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। प्यारेलाल अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर काबिल बनाना चाहते हैं। वह कई वर्ष से कुम्भ में सफाई कर्मी का काम कर रहे हैं। यहां से गांव लौटने पर वह मजदूरी और बाजा बजाने का काम कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। सरकारी सुविधा के नाम पर उज्जवला गैस और राशन कार्ड की सुविधा है लेकिन न ही आवास मिला और न मनरेगा के तहत कोई रोजगार।

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होरी लाल
38 वर्षीय होरी लाल घुरहटा, संभल के निवासी हैं। उनके तीन बेटे हैं जो गांव में ही प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं। वह अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर अपने पैरों पर खड़ा करना चाहते हैं। कुम्भ में वह 4 माह से हैं।

चौबी
३४ वर्षीय चौबी बबेरू, बांदा की हैं। वह दो दशक से मेले में सफाई का कार्य कर रही हैं। मेले में वह अपने परिवार समेत सफाई का कार्य करती हैं। प्रयागराज, अयोध्या, हरिद्वार सहित कई जगहों पर मेलों में काम कर चुकी हैं। उनके तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा अरुण (18) मां के साथ ही मेले में सफाई का कार्य करता है। पति अमरीश भी मेले में सफाई का कार्य करता है। मान बाल्मीकि (12) व रचना (8) आंगनबाड़ी विद्यालय में कक्षा 3 में पढ़ते हैं। गांव में न तो उसके पास उज्जवला योजना का लाभ मिला, न ही कोई आवास सुविधा। राशन कार्ड जरूर बना है और प्रत्येक माह राशन भी मिलता है।

प्रधानमंत्री ने कुम्भ मेले के दौरान संगम में डुबकी लगाकर प्यारे लाल, नरेश कुमार, ज्योति, होरी लाल और चौबी से मुलाकात की। इन सफाई कर्मियों को भी नहीं थी इसकी कोई सूचना की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें सम्मानित करेंगे। अचानक से तय हुए कार्यक्रम में जाने के लिए पुरुषों को एक सेट कपड़े व महिलाओं को दो साड़ी तथा सभी को नई वर्दी, टोपी दी गई थी। सेक्टर तीन में तैनात स्वास्थ्य चिकित्सक डा. त्यागी ने बताया कि जिसने अच्छा काम किया उसे ही चयनित किया गया। बात करने पर सभी सफाई कर्मियों में एक बार सामान्य थी कि मोदी जी ने हमारे बारे में कुछ न पूछा और न ही कोई आश्वासन दिया केवल मेले के बारे में पूछा। उन्होंने हमारे खान पान व रहने पर भी कोई चर्चा नहीं की। मोदी जी से मुलाकात के बाद बहुत परेशानी हो रही है। अब तक सैकड़ों पत्रकार आ चुके हैं बार बार सवाल ही सवाल होते हैं लेकिन लाभ धेला भर का नहीं हुआ।

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