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हाथों की साफ़-सफाई बहुत ज़रूरी है क्योंकि हाथ सही से न धोने की वजह से हाथ में जितने जीवाणु होते है वो शरीर में पहुंचते हैं और जिस वजह से बहुत सी बीमारियां हो जाती हैं।

इस होलिकोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत संस्कृति मंत्रालय के कलाकारों की प्रस्तुति से हुई, जिसमें मंत्रालय के कलाकारों ने अपनी अवधी संस्कृति पर रचित प्रस्तुतियों को प्रस्तुत किया। जिसके बाद मुख्य अतिथि अनूप चंद्र पांडेय(मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार) का स्वागत कर उनका सम्मान किया गया।

होली के त्योहार पर इस बार लोगों की जेब पर ज्यादा चोट नही लगेगी क्योंकि किसी भी तरह के सामान के दामों में बढ़ोत्तरी नही हुई है। बात चाहे चिप्स की हो या रंगों और पिचकारी की, सभी के दाम पिछले साल के बराबर ही हैं।

ये हैं कुछ टिप्स- - चेहरे और बॉडी को कलर से बचाने के लिए होली खेलने जाने से पहले नारियल का तेल या अच्छी मॉस्चराइजर क्रीम लगाएं।

लखनऊ: होली आने में अब ज्यादा दिन बाकी नहीं रह गए हैं। रंगों के इस त्योहार में हफ्तेभर पहले से ही बच्चे गुब्बारे और पिचकारी से खेलना शुरू कर देते हैं। ये त्योहार अपने साथ ढेर सारे रंग और खुशियां लेकर आता है। इस त्योहार पर तरह-तरह के पकवान खाने को मिलते हैं। होली का …

यात्रा के दौरान पानी कि कमी तो हो ही जाती है। जिसके कारण स्वच्छता रखने में काफी दिक्कत हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में हमें अपने पास एक अल्कोहल आधारित वाटरलेस हैण्ड सैनिटाईजर रखना चाहिए। इसके इस्तेमाल करने का तरीका यह है कि थोडा सा सैनिटाईजर अपने हाथों में लें और दोनों हाथों से तब तक रगड़ें जब तक की सैनिटाईजर गायब न हो जाए।

हमें अपने बच्चों को यह बताना बहुत आवश्यक है कि वह कैसे अपने हाथों की सफाई या धुलाई कैसे कर सकते है । और किस प्रकार अपने हाथों को साफ़ रख कर अपने मानसिक और शारीरिक विकास को एक सही गति और दिशा दे सकते हैं । ताकि आगे चलकर एक स्वस्थ नागरिक बनकर देश के विकास और निर्माण में सहायक बन सकते हैं

हाथ धोना कितना ज़रूरी हैं इस बात का अंदाजा किसी को नहीं होता। लग -भग सारी बीमारियां हाथ न धोने से होती है लेकिन लोग इस बात को समज ही नहीं पते। भारत में ३८ करोड़ लोगों को इस वजह से बीमारी का शिकार होना पड़ता हैं।

होली उल्लास और उमंग का त्योहार है। इस दिन लोग हर तरह के गिले शिकवे भूलकर आपस में गले मिलते हैं और एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, लेकिन कुछ लोग रंग की आड़ में दूसरों को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं चुकते है। ऐसे लोग टोने-टोटकों का सहारा लेते हैं। अपने स्वार्थ के लिए लोग दूसरों की खुशियों के रंग में टोटकों का भंग डाल देते हैं।

सुनो होली आ रही है? कुछ तैयारी-वैयारी की या नहीं? बहुत सारा काम होगा। चिप्स-पापड़ और गुझिया न जाने क्या-क्या चीजें बनानी हैं? टाइम भी नहीं बचा है। चलो कोई बात नहीं, मार्केट से ले लूंगी यही वो बातें हैं, जो आजकल के बिजी टाइम में हर महिला के मुंह से सुनने को मिल जाती हैं।