Opinion

लखनऊ: बिहार के सीएम और जनतादल यू के अध्यक्ष नीतीश कुमार को लेकर अब लगातार बीजेपी के सुर बदल रहे हैं। पिछले बीस दिन में गंगा में काफी पानी बह गया। याद करें 8 नवंबर के पहले के नीतीश और बीजेपी के रिश्ते। दोनों एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहा रहे थे। नीतीश कुमार पीएम …

लखनऊ: हिन्दी साहित्य की वीणा, सीधे सरल शब्दों को कविता के पात्र में डालकर साहित्य रसिकों को काव्य रस चखाने वाले हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने  मानव जीवन में प्रेम, सौंदर्य, दर्द, दुख, और मृत्यु को अपने मखमली शब्दों में पिरोकर जिस खूबसूरती से पेश किया है, उसकी कोई और …

‘खतरनाक डिब्बों को खींचती हुई भारतीय रेल टूटी पटरियों पर दौड़ रही है। रेल यात्रियों को बेसिक सुरक्षा और संरक्षा की दरकार है जिसे पूरा करने में फिलहाल अभी तक तो रेलवे असफल ही रही है। तमाम कमेटियां बनीं लेकिन उनकी सिफारिशों को ध्यान देने योग्य नहीं समझा गया। हादसे होते हैं, लेकिन जांच भी …

लखनऊ: हम मनुष्यों की तरह देवगण भी धरतीलोक में आकर दीपोत्सव मनाते हैं। अंतर यह है कि धरतीवासी कार्तिक मास की अमावस्या को दीपोत्सव मनाते हैं जबकि देवगण कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर। प्रश्न उठता है कि मनुष्यों आैर देवों की दीपावली की तिथियां भिन्न भिन्न क्यों हैं? इसके पीछे एक रोचक कथानक है। पौराणिक …

लखनऊ: अर्थशास्त्र की हल्की सी भी समझ रखने वालों को इस बात का अंदेशा था कि भ्रष्टाचार और कालाधन को लेकर कोई बड़ा फैसला होगा। केंद्र सरकार ने इसकी शुरुआत बहुत पहले कर दी थी। बड़ी सफाई से पूरे देश में 20 करोड़ के आसपास जन धन खाते खोले गए। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) …

चीफ मिनिस्टर अखिलेश यादव जी, आपसे कुछ कहने से पहले मैं यह स्वीकारोक्ति कर लूं कि आप उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में से एक हैं। आप के युवा तेवर लोगों में कौतूहल और उम्मीद, दोनों का सबब रहे हैं। आप विकास और काम का दावा करते हैं। आप दावा करते हैं कि चुनाव …

लखनऊ: अरब देश के पवित्र मक्का में एक भारतीय पिता और अरबी माता के घर 11 नवंबर 1888 को जन्मे मोहिउद्दीन अहमद, जो आगे चलकर  ‘मौलाना अबुल कलाम आज़ाद’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। आजाद देश के पहले शिक्षा मंत्री थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर देश के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी …

लखनऊ: मनोज कुमार की फिल्म रोटी, कपड़ा और मकान के गाने की लाइन थी ‘हाय महंगाई, तुझे क्यों मौत न आई।’ इसी तरह पीपली लाइव का गाना ‘सईंया तो खूब कमात है, महंगाई डायन खाय जात है…।’ पहले शोर मचाने वाले अब शांत क्यों? महंगाई को कभी डायन कहा गया तो कभी उसकी मौत की …

शिवपाल सिंह यादव ने साबित कर दिया कि जोश पर होश भारी पड़ता है। उनकी इसी कोशिश का नतीजा था कि तीन पांच की लडाई में 5 साफ साफ विजित होते हुआ दिखा। यही नहीं तीन नवंबर के विकास रथ के आयोजक सरीखी तल्खी भी पांच तारीख के पार्टी के स्थापना कार्यक्रम में नहीं दिखी। यह जरुर अंदाजा लगता रहा कि चाचा-भतीजे पास-पास तो हैं पर साथ-साथ नहीं हैं।

सीएम अखिलेश यादव ने बीते गुरुवार को लामार्टिनियर मैदान में इसे एक बार फिर सच साबित कर दिया। यही वजह थी कि कभी टूट की कगार पर पहुंच चुकी समाजवादी पार्टी के नेताओं के दिल भले ही पूरी तरह न मिले हों पर उन्हें एक मंच पर एक साथ मौजूद होकर यह संदेश देना ही पडा कि हम साथ-साथ है।