World hottest cities 2026: इंडिया बना दुनिया का सबसे गर्म ‘हॉटस्पॉट’! 100 में 97 शहर भारतीय... यहां देखें पूरी लिस्ट
World hottest cities 2026: वैश्विक तापमान आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 97 शहर अकेले भारत के हैं, जबकि बाकी तीन शहर नेपाल के हैं।
World hottest cities 2026
World hottest cities 2026: इस वक़्त देश के मौसम का जो हाल उसे शब्दों में बयां करना बेहद मुश्किल है। मई महीने में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना पूरी तरह से बेहाल कर दिया है। मई का अंतिम सप्ताह चल रहा है और लगातार दूसरे सप्ताह भारत विश्व के सबसे गर्म देशों में सबसे शीर्ष पर बना हुआ है। वैश्विक तापमान आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 97 शहर अकेले भारत के हैं, जबकि बाकी तीन शहर नेपाल के हैं।
बता दे, इस लिस्ट में ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई शहर शामिल हैं, जहां तापमान 47-48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के हालिया अपडेट्स के अनुसार, उत्तर और मध्य भारत के कई भागों में आगामी कुछ दिनों तक लू और अत्यधिक गर्मी की स्थिति बनी रहेगी। स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को खासकर दोपहर के वक़्त बाहर निकलने से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है।
यूपी के वाराणसी, बालांगीर और सासाराम बने सबसे गर्म शहर
तापमान के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इन दिनों ओडिशा का बालांगीर, बिहार का सासाराम और उत्तर प्रदेश का वाराणसी विश्व के सबसे गर्म शहरों में शामिल हो गए हैं। इन शहरों में अधिकतम तापमान 47-48 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी भीषण गर्मी दर्ज की गई।
वहीं, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके और उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में भी लू का भयंकर प्रकोप जारी है। कई शहरों में सड़कों पर एकदम सन्नाटा पसरा हुआ है क्योंकि लोग तेज धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए घरों में रहने को मजबूर हैं।
IMD ने क्यों जारी किया Heatwave Alert?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जब किसी क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे हीटवेव (heatwave) यानी लू की स्थिति माना जाता है। वहीं अगर तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाए तो इसे गंभीर हीटवेव (severe heatwave) की श्रेणी में रखा जाता है।
IMD के मुताबिक, मैदानी क्षेत्रों में अगर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए तो भी लू की स्थिति घोषित कर दी जाती है। ध्यान दिया जाए तो... कई राज्यों में इस वक़्त यही स्थिति देखने को मिल रही है। मौसम विभाग ने खासतौर से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी है।
सबसे बड़ा सवाल - 2026 इतना गर्म क्यों हो रहा है?
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार गर्मी पीने सालों की तुलना में कहीं ज्यादा और लंबे वक़्त तक रहने वाली हो सकती है। इसके पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं-
1. जलवायु परिवर्तन बना सबसे बड़ा कारण
वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'ग्लोबल वार्मिंग' (Global Warming) यानी वैश्विक तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण पृथ्वी पहले की अपेक्षा अब ज्यादा गर्म हो रही है। इसका सीधा प्रभाव भारत जैसे देशों पर स्पष्टता से देखा जा रहा है। लगातार बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण हीटवेव की घटनाएं भी बहुत तेजी से बढ़ रही हैं।
ध्यान देने योग्य -
Global Warming किसे कहते हैं ?
ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का सीधा सा मतलब है - पृथ्वी के औसत तापमान में होने वाली लगातार वृद्ध। यह मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों जैसे कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल) जलाने और तेजी से वनों की कटाई आदि के कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन) के बढ़ने से होता है, जो सूर्य की गर्मी को पृथ्वी पर अब्ज़ॉर्ब कर लेती है।
2. अल नीनो (El Nino) का खतरा
मौसम वैज्ञानिक इस साल संभावित अल नीनो ((El Nino) प्रभाव को लेकर भी सतर्क हैं। अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में असाधारण रूप से हुई वृद्धि से जुड़ी जलवायु घटना है, जिसका बड़ा प्रभाव पूरे विश्व के मौसम पर पड़ता है।
भारत में अल नीनो का प्रभाव आमतौर पर इन रूपों में नज़र आता देता है -
- अत्यधिक गर्मी
- कम वर्षा
- कमजोर मानसून
- लंबे वक़्त तक शुष्क मौसम
इसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बार मजबूत अल नीनो विकसित होता है, तो साल 2026 विश्व के सबसे गर्म सालों में शामिल हो सकता है।
3. मानसून पूर्व वर्षा में कमी
उत्तर भारत और मध्य भारत के कई भागों में इस बार मानसून पहले से सामान्य वर्षा नहीं हुई। इससे जमीन में नमी कम हो गई और सतह तेजी से गर्म होने लगी। यही सबसे बड़ा कारण है कि दिन के वक़्त तापमान तेजी से चढ़ाता जा रहा है।
4. तेजी से बढ़ता शहरीकरण (urbanization)
स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में लगातार बढ़ती कंक्रीट की इमारतें, कम होती हरियाली और गाड़ियों से निकलने वाला धुआं गर्मी को लंबे वक़्त तक रोक कर रखता है। इसे "अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट" कहा जाता है। इसी कारण बड़े शहरों में रात के वक़्त भी तापमान अब ज्यादा बना रहता है।
ध्यान देने योग्य -
Urban Heat Island Effect का मतलब ?
अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट (Urban Heat Island Effect) एक वह स्थिति होती है, जिसमें शहर या शहरी इलाके अपने आसपास के ग्रामीण या खुले क्षेत्रों की तुलना में बहुत ज्यादा गर्म हो जाते हैं। कंक्रीट की सघनता और हरियाली की भारी कमी की वजह से शहरों का तापमान एक 'टापू' की तरह आसपास के इलाकों से अलग और ज्यादा नज़र आता है।
बढ़ती चिंता का सबसे बड़ा कारण?
जलवायु वैज्ञानिक अब हीटवेव को "मूक आपदा" यानी साइलेंट डिज़ास्टर (silent disaster) कह रहे हैं क्योंकि इसका बड़ा प्रभाव सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रहने वाला। बल्कि अत्यधिक गर्मी से स्वास्थ्य, खेती, जल संकट, बिजली की मांग और श्रमिकों की कार्यक्षमता पर गंभीर रूप से प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर तापमान वृद्धि का यही सिलसिला जारी रहा तो आगामी कुछ ही सालों में भारत में हीट स्ट्रोक (heat stroke) और गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर प्रभाव
इस वक़्त यदि ध्यान दिया जाए तो... अस्पतालों में सबसे ज्यादा डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, उल्टी, थकान और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे वक़्त तक तेज धूप में रहने से शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जो जानलेवा भी साबित हो सकता है।
भीषण गर्मी को देखते हुए IMD और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को कई जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है-
1. ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पियें
2. दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें
3. हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें
4. अधिक मेहनत वाले बाहरी काम टालें
5. बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें
6. बंद गाड़ियों में बच्चों या पालतू जानवरों को बिलकुल न छोड़ें
7. चक्कर, कमजोरी, उल्टी या भ्रम की स्थिति होने पर बिना देर किये डॉक्टर से संपर्क करें
आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद नहीं
IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई भागों में तापमान सामान्य से ऊपर बना रह सकता है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में आंधी और हल्की वर्षा की संभावना भी जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम दिखाई दे रही है।