TMC Rebellion: TMC छोड़ते ही सुखेंदु शेखर का सबसे बड़ा खुलासा! कहा- "पहले इस्तीफा देता तो आज जिंदा न होता"
TMC Rebellion: टीएमसी से इस्तीफा देने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सनसनीखेज दावा किया है कि अगर वह आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड के वक्त पार्टी छोड़ते, तो सुपारी किलर्स उनकी जान ले लेते। जानिए ममता सरकार पर लगे इस बड़े आरोप की पूरी कहानी।
TMC Rebellion: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय एक ऐसा भूचाल आ चुका है जिसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पूरे राजनीतिक साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी से अलग होते ही एक ऐसा सनसनीखेज और डरावना खुलासा किया है, जिससे पूरी देश की सियासत में हड़कंप मच गया है। उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी टीएमसी की तुलना अपराधियों से करते हुए दावा किया कि अगर वह कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड के तुरंत बाद इस्तीफा दे देते, तो शायद आज वह जिंदा भी नहीं होते। उनके मुताबिक, उस समय पार्टी छोड़ने पर भाड़े के हत्यारे यानी सुपारी किलर्स के जरिए उनकी जान ली जा सकती थी।
आरजी कर अस्पताल कांड ने खोली पार्टी की पोल
सुखेंदु शेखर रॉय का यह विस्फोटक बयान ऐसे समय में आया है जब करीब पंद्रह वर्षों तक बंगाल पर एकछत्र राज करने वाली टीएमसी एक तरफ विधानसभा और संसद में अपनों की बगावत झेल रही है, तो दूसरी तरफ चुनाव में मिली करारी हार के सदमे से उबर नहीं पा रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान पूर्व सांसद ने अपने दिल का गुबार निकाला। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आरजी कर अस्पताल की उस दर्दनाक और खौफनाक घटना ने उनके भीतर चल रही कशमकश को खत्म कर दिया और उन्होंने इस दलदल से बाहर निकलने का अंतिम फैसला कर लिया। उनके अनुसार, जब पूरा बंगाल इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आया था, तब वह खुद को चुप नहीं रख सके।
सच बोलने की सजा के रूप में मिला था पुलिस का नोटिस
अपने राजनीतिक जीवन के उस काले दौर को याद करते हुए सुखेंदु शेखर रॉय ने बताया कि उन्होंने अपने इतने लंबे सियासी सफर में जनता का ऐसा आक्रोश पहले कभी नहीं देखा था। इसी वजह से उन्होंने बिना डरे जनता की आवाज बुलंद की और मांग की कि इस घिनौने अपराध में शामिल हर एक दोषी को सरेआम फांसी के फंदे पर लटका दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस मांग को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा था और धरने पर भी बैठ गए थे। लेकिन अपनी ही सरकार में सच का साथ देने की सजा उन्हें यह मिली कि पुलिस प्रशासन ने उनके उस एक पोस्ट को लेकर उन्हें पूछताछ का नोटिस थमा दिया, जिससे वह पूरी तरह टूट गए थे।
NDA के साथ मिलकर नई शुरुआत की तैयारी में बागी
साल 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद से लेकर आज तक पार्टी कभी इतने बड़े बिखराव और आंतरिक संकट से नहीं गुजरी थी। ममता बनर्जी के तानाशाही रवैये से नाराज होकर सांसदों और विधायकों का एक बहुत बड़ा धड़ा अब खुलकर बगावत पर आमादा है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो टीएमसी के भीतर लगी यह आग अब बुझने वाली नहीं है और पार्टी बहुत जल्द दो हिस्सों में पूरी तरह बंटने जा रही है। इस बगावती खेमे ने अब केंद्र की सत्ताधारी एनडीए सरकार के साथ नजदीकियां बढ़ा ली हैं, जिससे बंगाल में ममता सरकार के पतन की उल्टी गिनती शुरू होती दिख रही है।