Aligarh News: 'राधे-राधे' नाम से गूंजा ब्रज, 84 कोसी परिक्रमा में उमड़ा भक्तों का सैलाब

Aligarh News: मथुरा की ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए, गांवों ने सेवा की मिसाल पेश की, वहीं सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर मांगें भी उठीं।

Update:2026-06-09 21:14 IST

 'राधे-राधे' नाम से गूंजा ब्रज, 84 कोसी परिक्रमा में उमड़ा भक्तों का सैलाब (Photo- Newstrack)

Aligarh News: मथुरा ब्रज की गलियां आजकल सिर्फ एक ही स्वर से गूंज रही हैं - "राधे-राधे"। हर तीन साल में लगने वाली ऐतिहासिक 84 कोस परिक्रमा शुरू होते ही पूरा ब्रज मंडल भक्ति के रंग में डूब गया है। हरियाणा, यूपी और राजस्थान की सीमाओं को छूती 268 किलोमीटर लंबी यह दिव्य यात्रा यमुना तट से निकलकर मालव मंदिर, मार्कण्डेय तीर्थ, सूर्य नारायण मंदिर और जैदपुरा गांव होते हुए मथुरा में प्रवेश कर चुकी है।

नंगे पांव, हाथ में छड़ी और मुख पर राधा नाम। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग - आस्था की एक डोर में बंधे हजारों श्रद्धालु इस कठिन पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। धूप-गर्मी की परवाह किए बिना भक्तों का जोश देखते ही बन रहा है। मानो पूरा ब्रज ही एक विशाल आध्यात्मिक मेले में बदल गया हो। गांव-गांव में भक्तों के लिए "राधे-राधे" के जयकारे और फूलों की बारिश हो रही है।

अव्यवस्था आई सामने 

लेकिन इस भक्ति के मेले के बीच व्यवस्था की कड़वी हकीकत भी सामने आ रही है। कई श्रद्धालुओं ने शिकायत की है कि 84 कोस के लंबे रूट पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं है। खोया-पाया केंद्र न होने से बिछड़े लोगों को दिक्कत हो रही है। 40 डिग्री पार तापमान में कई बुजुर्ग और महिलाएं सड़क किनारे छांव ढूंढने को मजबूर हैं।

राहत की बात ये है। कि मालव, जैदपुरा और आसपास के गांव वालों ने मोर्चा संभाल रखा है। स्थानीय लोग स्वास्थ्य शिविर लगा रहे हैं, ठंडा पानी, छाछ और कूलर-पंखे की व्यवस्था कर रहे हैं। सेवा भाव की मिसाल पेश करते हुए ग्रामीण दिन-रात भक्तों की देखभाल में जुटे हैं।

श्रद्धालुओं की बस एक मांग है। प्रशासन भी उतनी ही तत्परता दिखाए जितनी श्रद्धा से वे इस परिक्रमा को पूरा कर रहे हैं। आस्था अपनी जगह, पर सुरक्षा और सुविधा भी उतनी ही जरूरी है।

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