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माह – मार्गशीर्ष,तिथि – प्रतिपदा ,पक्ष – कृष्ण,वार – बुधवार,नक्षत्र – कृत्तिका ,सूर्योदय – 06:41,सूर्यास्त – 17:28, चौघड़िया लाभ – 06:46 से 08:06,अमृत – 08:06 से 09:25,शुभ – 10:45 से 12:05,चर – 14:45 से 16:05

हिंदू धर्म में कार्तिक माह का बड़ा महत्व है। पूरे मास स्नान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। भगवान विष्णु को ये मास बहुत प्रिय है। इस मास के आखिरी दिन कार्तिक पूर्णिमा का महत्व सारी तिथियों में अधिक है। 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा  है।इस दिन गंगा स्नान और दीपदान करना चाहिए।

मंगलवार 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा है । इस पूर्णिमा का धर्म शास्त्रों में बहुत महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से स्वर्ग का मार्ग मिलता है। इस लोग गंगा, सरयू, नर्मदा और यमुना में डुबकी लगाते हैं । कार्तिक पूर्णिमा पर व्रत भी करने का विधान है।

सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्मदिन हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। उनके अनुयायी उन्हें गुरु नानक, बाबा नानक और नानकशाह जैसे कई नामों से संबोधित करते हैं।

माह –कार्तिक ,तिथि – चतुर्दशी , पक्ष – शुक्ल,वार – सोमवार,नक्षत्र – अश्विनी ,सूर्योदय – 06:40, सूर्यास्त – 17.29 ,चौघड़िया अमृत – 06:44 से 08:04,शुभ – 09:25 से 10:45,चर – 13:25 से 14:45,लाभ – 14:45 से 16:05

तिथि- त्रयोदशी, पक्ष- शुक्ल, माह-कार्तिक, दिन -रविवार, नक्षत्र – रेवती, सूर्योदय – 06:39, सूर्यास्त – 17:30, राहु काल – 16:09 से 17:30तक, चौघड़िया चर – 08:04 से 09:24,लाभ – 09:24 से 10:44,अमृत – 10:44 से 12:05,शुभ – 13:25 से 14:45।

हिन्दूओं के धर्मग्रंथों में अयोध्या का वर्णन है। वेदों, पुराणों और उपनिषदों सहित अन्‍य ग्रंथों में इस महान नगरी कीर्ति का यशगान है। रामायण  के अनुसार , मर्यादापुरुषोत्‍तम श्रीराम की ये जन्‍मभूमि है। इस नगर को स्वयं मनु ने बसाया था, ऐसा महर्षि वाल्‍मीकि ने महाकाव्‍य रामायण में लिखा है।

भगवान विष्णु को संसार का पालनहार कहा जाता है। विष्णुपुराण के अनुसार जब दुनिया खतरे में होती है तो बुरी शक्तियों से संसार को बचाने के लिए भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। 12 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा है।

जयपुर माह – कार्तिक,तिथि – द्वादशी ,पक्ष – शुक्ल,वार – शनिवार, नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद,सूर्योदय – 06:38, सूर्यास्त – 17:30,चौघड़िया शुभ – 08:03 से 09:24, चर – 12:05 से 13:25, लाभ – 13:25 से 14:46, अमृत – 14:46 से 16:06।

प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागते ही सारे शुभ काम शुरु हो जाएंगे। इस दिन से भगवान विष्णु निंद्रा से जागते हैं और शुभ कार्य शुरू होते हैं। 8 नवंबर से शादियों का सीजन शुरु हो जाएगा। हर तरफ शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी।लेकिन इधर ग्रहों के राशि परिवर्तन के चलते इस बार विवाह के मुहू्र्त 19 नवंबर से है।