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कच्चा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि सावन में कढ़ी नहीं खानी चाहिए। ये चीजें वात दोष बढ़ा देते हैं जिससे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकता हैं। इन सभी चीजों को भगवान को तो अर्पित करनी चाहिए लेकिन इनका सेवन नहीं करना चाहिए।  

माह – आषाढ़ पूर्णिमा, तिथि – पूर्णिमा – 27:10:05 तक,,नक्षत्र – पूर्वाषाढा – 20:44:04 तक,करण – विष्टि – 14:27:08 ,पक्ष – शुक्ल,वार – मंगलवार,, सूर्योदय – 05:33:23, सूर्यास्त – 19:20:36।

ज्योतिष के अनुसार यदि जन्म, मास, गोचर और दशा, अंतर्दशा, स्थूलदशा आदि में ग्रहपीड़ा होने का योग है। किसी महारोग से पीड़ित होने पर। मुकदमा आदि में फंसने पर, हैजा-प्लेग आदि महामारी से लोग मर रहे हों।,राज्य या संपदा के जाने का अंदेशा हो।, धन-हानि हो रही हो।

जिससे ग्रहण का प्रभाव ज्यादा पड़ेगा। सूर्य के साथ राहु और शुक्र भी रहने वाले हैं। सूर्य और चंद्र चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। इस दौरान मंगल नीच का रहेगा।ग्रहों का यह योग और इस पर लगने वाला चंद्र ग्रहण तनाव बढ़ा सकता है।

प्रतियोगी क्षेत्रों में उन्नति हेतु और समय देना पड़ सकता है। धन निवेश में लाभ की स्थिति होगी। सेहत खिली हुई होगी। विरोधी पक्ष आपकी छवि धूमिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

इस बार सावन माह में इस बार कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस बार सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन कुंभ योग भी बन रहा है। सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को व रक्षाबंधन भी एक ही दिन मनाया जाएगा।

श्रीकृष्ण के द्वारा कुछ ऐसे काम हैं जिन्हें अपनी आदतों में शामिल करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता हैं और मन को सुकून मिलता हैं। इसी के साथ ही व्यक्ति को हर कार्य में सफलता प्राप्त होती हैं। तो जानते हैं महाभारत में भगवान श्री कृष्ण द्वारा बताए गए जीवन की सफलता के राज।

वार- रविवार, माह- आषाढ़, पक्ष- शुक्ल, तिथि- त्रयोदशी, नक्षत्र- ज्येष्ठा, सूर्य राशि- मिथुन, स्वामीग्रह-बुध, चंद्र राशि- वृश्चिक, अभिजीत- 11:59 से 12:54 तक, राहुकाल- सायंकाल 04:30 से 06 बजे तक।

जीवन में हर कार्य किसी न किसी के द्वारा सिखाया जाता है। जिससे हम सिखते है वह हमारे लिए गुरु की तरह होता हैं वह 'गुरु' कहलाता है। साधार‍णतया गुरु का महत्व अध्यात्म में सर्वोपरि माना गया है जिसमें दीक्षा किसी न किसी रूप में दी जाए शिष्य की देखरेख उसके कल्याण की भावना से की जाती है।

घर के आसपास पेड़ पौधे होना बहुत शुभ होता है, लेकिन घर की किस दिशा में कौन सा  होना चाहिए यह देखना भी जरूरी है। कुछ वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और कुछ नकारात्मक। इनमें से जो पेड़ या वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा देते हैं उन्हें घर की किस दिशा में लगाएं यह जानना जरूरी है