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इस साल खरमास 16 दिसंबर से लग रहा है। साल में दो बार जब सूर्य, गुरु की राशि धनु व मीन में संक्रमण करता है, उस समय को खर, मल व पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। खर मास आगामी 14 दिसम्बर से शुरू हो रहा है। शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य जबतक गुरू की राशि मीन अथवा धनु में होता हैं

तिथि-द्वितीया, नक्षत्र- पुनर्वसु, सूर्योदय- 07.09सूर्यास्त-17.21 पक्ष-कृष्ण, माह-पौष, वार- शनिवार। आज किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे दीप दान करें।

माह – पौष,तिथि – प्रतिपदा ,पक्ष – कृष्ण,वार – शुक्रवार,नक्षत्र, राहुकाल – 10:57:29 से 12:15:05 तक,सूर्योदय – 07:04,सूर्यास्त – 17:25,चौघड़िया चर – 07:09 से 08:26,लाभ – 08:26 से 09:42,अमृत – 09:42 से 10:59,शुभ – 12:15 से 13:32। शुक्रवार से पौष मास की शुरुआत हो रही है इस दिन से सूर्य को नियमित जल चढ़ाएं व एक महीना तक सूर्य मंत्र का जप करें।

साल का आखिरी सूर्यग्रहण 26 दिसम्बर को लगने वाला है।खंडग्रास सूर्यग्रहण के चलते 26 दिसंबर को नगर के मंदिरों में पूजन दर्शन एक दिन पहले ही रात को 8 बजते ही बंद हो जायेंगे।

माह – मार्गशीर्ष,तिथि – पूर्णिमा ,पक्ष – शुक्ल,वार – गुरूवार,नक्षत्र – मृगशिरा ,सूर्योदय – 07:03,सूर्यास्त – 17:25, चौघड़िया -शुभ – 07:08 से 08:25,चर – 10:58 से 12:15,लाभ – 12:15 से 13:31,अमृत – 13:31 से 14:48। गुरूवार को मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा भी है इस तरह दान करके पुण्य कमाएं।

उन्हें शिक्षित करने में अथक प्रयास करेंगे। प्रेम संबंधों में विश्वास बढ़ेगा। यदि जातक बिजनेस करते हैं तो लाभ होगा। नौकरी में सहयोगी परेशान करेंगे।परिवार में माता-पिता की इज्जत करें।परिवार में किसी बात को लेकर तनाव होगा। सेहत को लेकर सावधान रहें। ऑफिस में आपके खिलाफ सब रहेंगे। फिर भी बॉस

कल यानि 12 दिसंबर 2019 का दिन हिंदू पंचांग में बहुत महत्व रखता है। इस दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा है। धर्मानुसार पूर्णिमा को विशेष तिथि के रूप में देखा जाता है। हर माह की शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि पूर्णिमा कहलाती है। ज्योतिषानुसार, इस पूर्णिमा की रात को चंद्रमा भी ग्रहों की मजबूत स्थिति में रहता है।

हिंदू मास व पंचांग के अनुसार पौष का महीना दसवां मास होता है। पौष मास की पूर्णिमा को चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है और इसी कारण इस महीने को पौष का मास कहते हैं। इस महीने में भगवान सूर्यनारायण की विशेष पूजा अर्चना से उत्तम स्वास्थ्य और मान सम्मान की प्राप्ति होती है।दरअसल जिस महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उस महीने का नाम उसी नक्षत्र के आधार पर रखा जाता है।

माह – मार्गशीर्ष, तिथि – त्रयोदशी , पक्ष – शुक्ल, वार – मंगलवार,नक्षत्र – कृत्तिका, सूर्योदय – 07:02,सूर्यास्त – 17:25, राहुकाल – 14:49:14 से 16:07:00 तक, चौघड़िया चर – 09:40 से 10:57, लाभ – 10:57 से 12:14, अमृत – 12:14 से 13:30, शुभ – 14:47 से 16:04

ब्राह्मांड में स्थित 9 ग्रहों की स्थिति पर हमारा जीवन निर्भर करता है। इन ग्रहों की स्थिति पर हर माह बदलती रहती है। सारे ग्रहों का अपना अलग-अलग समय है। विवेक और बुद्धि का कारक बुध ग्रह दिसंबर से तुला से वृश्चिक में प्रवेश कर गए है। जब कोई ग्रह गोचर करता है तो उसका व्‍यक्‍ति के जीवन पर असर पड़ता है।