कुंडली में होगा ग्रहों का ये भाव तो जातक को सताएगा ऋण योग

लखनऊ: जीवन खुशी- गम का नाम है। जब खुशी रहती है तो हम हंसते-हंसते झेल लेते है, लेकिन गम के लिए किस्मत को दोषी ठहराते है। क्या आप जानते हैं कि आपके खुशी-गम और बनते-बिगड़ते कामों का क्या कारण हो सकता है? शास्त्रों में कहा गया है कि अगर कोई काम बनते-बनते बिगड़ जाए तो उसके लिए कुछ ऋण जिम्मेदार होते है।

जिन्हें आपके परिजनों द्वारा चुकता ही नहीं किया गया हो और वो ऋण आज भी आपके परिवार के ऊपर आ रहे हैं। इन ऋणों की जानकारी बहुत कम लोगों को होती है। जिन लोगों को इन ऋणों की जानकारी होती है, वो इनको चुकाने में जरा भी देर नहीं करते हैं। कुछ इसी तरह के ऋणों की जानकारी आपको दी जा रही है, जैसे पितृ, मातृ, पत्नी और संबंधी ऋण। इन ऋणों का जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रतीकात्मक फोटो
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ज्योतिषाचार्य सागरजी महाराज के अनुसार ऋण कुण्डली की बहुत बड़ी कमजोरी माना जाता हैं। पूर्वजों का ऋण मतलब अपने पूर्वजों और पितरों के द्वारा किए गए पापों से प्रभावी होगा। दूसरे शब्दों में किसी और के द्वारा की गई गलतियों की सजा रिश्तेदारों को भुगतनी या वहन करनी पड़ती। यदि किसी की कुण्डली में वास्तव में ऋण होते हैं तो सामान्यत: पूरा परिवार ही ऋण से प्रभावित होता है।

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पितृ ऋण
जब किसी कुण्डली में शुक्र, बुध या राहु दूसरे, पांचवें, नौवें अथवा बारहवें भाव में हों तो जातक पितॄ ऋण से पीड़ित होता है। इसका संकेत ये हो  सकता है कि घर के पास में किसी मंदिर में तोड़-फोड़ हुई होगी या कोई पीपल का पेट काटा गया होगा। इसका उपाय है कि परिवार के सभी सदस्यों से सिक्के के रूप में पैसे इकट्ठा करें और किसी दिन पूरे पैसे मंदिर में दान कर दें। यदि आपके पड़ोस या घर में कोई पीपल का पेड़ हो तो उसे पानी दें और उसकी सेवा करें।

 

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स्वयं ऋण
जब किसी की कुण्डली में शुक्र, शनि, राहु या केतु पांचवें भाव में स्थित हों, तो जातक स्वयं के ऋण से पीड़ित माना जाता। आपके पूर्वजों या पितरों ने परिवार के रीति- रिवाज और परम्पराओं को नहीं माना होगा। उन्होंने परमात्मा पर विश्वास नहीं किया होगा। इस ऋण के संकेत घर के नीचे आग की भट्ठी के रुप में मिलेगा। छत में सूर्य की रोशनी आने के लिए बहुत सारे छेद होंगे। इसके लिए ये उपाय है कि  सभी संबंधियों के सहयोग से बराबर-बराबर पैसे इकट्ठा करके यज्ञ कराना चाहिए।

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मातृ ऋण
जब केतु कुण्डली के चौथे भाव में हो तो कुण्डली को मातृ ऋण से प्रभावित माना जाता है। इस तथ्य के पीछे कारण ये हो सकता है कि आपके पूर्वजों ने किसी मां को उपेक्षित किया हो या उसके साथ अत्याचार किया हो अथवा बच्चे के जन्म के बाद मां को उसके बच्चे से दूर रखा हो, या हो सकता है कि किसी मां की उदासी को अनदेखा किया हो।

इसके संकेत आपको इससे मिलेंगे कि अगर कोई पास में कुंए या नदी है और उसकी की पूजा करने के बजाय उसका  इस्तेमाल गंदगी और कचरा डालने के लिए किया जा रहा है। अपने सभी संबंधियों से बराबर-बराबर मात्रा में चांदी लेकर किसी नदी में बहाएं। ये काम एक ही दिन करना है।

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पत्नी ऋण
जब सूर्य, चन्द्र या राहु कुण्डली के दूसरे अथवा सातवें भाव में हो, तो कुण्डली को स्त्री-ऋण से ग्रसित माना जाता है। घर में ऐसे जानवर होंगे जो दांत वाले हों जैसे कि गाय अथवा ऐसे जानवर जो समूह में न रहते हों। इसके लिए अपने सभी सगे-संबंधियों से बराबर-बराबर मात्रा में पैसे लेकर उससे 100 गायों को स्वादिष्ट चारा खिलाएं। ये काम एक ही दिन करना है।

 

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संबंधी ऋण
जब बुध और केतू कुण्डली के पहले अथवा आठवें भाव में हो, तो कुण्डली को संबंधी-ऋण से ग्रसित माना जाता है। इसका कारण ये हो सकता है कि आपके पूर्वजों ने किसी की फसल या घर में आग लगाई हो, किसी को जहर दिया हो अथवा किसी की गर्भवती भैंस को मार डाला हो। घर में किसी बच्चे के जन्मदिन, त्योहारों या अन्य उत्सवों के समय अपने परिवार से दूर रहना अथवा रिश्तेदारों से न मिलना इस दोष के संकेत हैं। अपने सभी संबंधियों से बराबर-बराबर मात्रा में पैसे लेकर उसे दूसरों की मदद के लिए किसी चिकित्सक को दें या उस पैसे को धार्मिक संस्थाओं को दें।

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पुत्री ऋण
जब चन्द्रमा कुण्डली के तीसरे या छठे भाव में हो, तो जातक को पुत्री ऋण से पीड़ित माना जाता है। पूर्वजों या पितरों के द्वारा किसी की बहन या बेटी की हत्या की गई होगी या उन्हें परेशान किया गया होगा। खोए हुए बच्चों को बेचना या उससे लाभ कमाने का प्रयास किया गया हो। सारे संबंधी पीले रंग की कौड़ियां खरीद कर, एक जगह इकट्ठी करके जलाकर राख कर दें और उस राख को दिन नदी में बहा दें।

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अजन्मा ऋण
जब किसी की कुण्डली में सूर्य, शुक्र, मंगल बारहवें भाव में हो, तो जातक  इस ऋण का भागी कहलाता है। इसका कारण ये हो सकता है कि आपके पूर्वजों या पितरों ने ससुराल-पक्ष के लोगों को धोखा दिया होगा या किसी रिश्तेदार के परिवार के विनाश में भूमिका निभाई होगी। दरवाजे के नीचे कोई गंदा नाला बह रहा होगा या कोई विनाशित श्मशान होगा अथवा घर की दक्षिणी दीवार से जुड़ी कोई भट्ठी होगी।  सभी परिजनों से एक-एक नारियल लेकर उन्हें एक जगह इकट्ठा करें और उसी दिन नदी में प्रवाहित कर दें।

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कुदरती ऋण
जब चन्द्रमा, मंगल कुण्डली के छठे भाव में स्थित हों, तो जातक इस कुदरती ऋण से ग्रसित माना जाता है। इसका कारण ये हो सकता है कि आपके पूर्वजों या पितरों ने किसी को बेबस कुत्ते की तरह नष्ट किया होगा। किसी कुत्ते को गोली से मारना, दूसरे के बेटे को मारना अथवा या भतीजे से इतना कपट करना कि वह पूरी तरह बर्बाद हो जाए। इसके लिए एक दिन में सभी परिजनों के सहयोग से 100 कुत्तों को मीठा दूध या खीर खिलानी चाहिए। अपने पास में रहने वाली कम उम्र की विधवा स्त्री की सेवा करके उससे आशीर्वाद लें।