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वार- शनिवार,माह- श्रावण,पक्ष- कृष्ण,तिथि- तृतीया 09:15 तक फिर चतुर्थी,नक्षत्र- शतभिषा,करण- विष्टि 09:15 तक फिर बव,सूर्य राशि- कर्क, स्वामीग्रह-चंद्रमा,चंद्र राशि- कुम्भ, स्वामीग्रह-शनि.राहुकाल- प्रातःकाल 09 बजे से 10:30 बजे तक।

भगवान शिव शंकर का प्रिय महिना यानी सावन का महीना शुरु हो चुका है। हर साल सावन  के महीने में लाखों की संख्‍या में लोग कांवड़ लेकर पदयात्रा करते हैं। कांवड़ यात्रा की पंरपरा की शुरुआत किसने और कब की थी। हर साल सावन के महीने में लाखों की संख्‍या में लोग भारतभर से कांवड़ में गंगाजल लेकर पदयात्रा

माह – श्रावण,तिथि – द्वितीया – 06:56:41 तक,नक्षत्र – धनिष्ठा – 28:25:11 तक,करण – गर – 06:56:41 तक, वणिज – 20:04:23 तक,पक्ष – कृष्ण,योग – आयुष्मान – 29:17:50 तक,वार – शुक्रवार,सूर्योदय – 05:34:58,सूर्यास्त – 19:19:31,राहु काल – 10:44:11 से 12:27:15 तक।

यदि शादी हुए काफी समय बीत गया है और  संतान सुख से वंचित हैं तो भगवान शिव संतान सुख का आशीर्वाद भी प्रदान करेंगे, साथ ही यदि धन की कमी आ रही है या आमदनी नहीं बढ़ रही है तो इस समस्या का समाधान भी होगा। नीचे तीन उपाय दिए गए हैं, 

इन मंत्रों के जप-अनुष्ठान से सभी प्रकार के दुख, भय, रोग, मृत्यु भय आदि दूर होकर मनुष्‍य को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। देश-दुनिया भर में होने वाले उपद्रवों की शांति और अभीष्ट फल की प्राप्ति को लेकर रूद्राभिषेक आदि यज्ञ-अनुष्ठान किए जाते हैं। इसमें शिवोपासना में पार्थिव पूजा का भी विशेष महत्व होने के साथ-साथ शिव की मानस पूजा का भी महत्व है

आज के दिन आपको स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव की परिस्थिति से गुज़ारना पड़ सकता है। परिस्थिति को हो सके तो पहले समझे बाद में अन्य सुयोग्य या अनुभवी व्यक्ति से सलाह ले कर ही आज आगे बढ़े। आज हो सके तो फ़िज़ूल की यात्रा को टाल दें।

सावन में प्रतिदिन भगवान की शिव की पूजा बहुत ही फलदायी है। भगवान शिव बहुत ही भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव है । राशि के अनुसार करें भगवान शिव की पूजा उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए पूजा का अलग अलग महत्व है...

पौराणिक मान्यता के अनुसार हिन्दू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने से भगवान शिव के शरीर का तापमान बढ़ने लगा था। ऐसे में शरीर को शीतल रखने के लिए भोलेनाथ ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और अन्य देव उन पर जल की वर्षा करने लगे।

कार्य करने में आत्मविश्वास बना रहेगा। भाइयों एवं घर परिवार का सहयोग बना रहेगा। माता के विचारों का सम्मान करें। माता के भाग्य से आपको सफलता मिलेगी। भाग्य अनुकूल है, नौकरी में पदोन्नति हो सकती है। व्यवसाय वालों को आर्थिक लाभ होगा।

कच्चा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि सावन में कढ़ी नहीं खानी चाहिए। ये चीजें वात दोष बढ़ा देते हैं जिससे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकता हैं। इन सभी चीजों को भगवान को तो अर्पित करनी चाहिए लेकिन इनका सेवन नहीं करना चाहिए।