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माह – कार्तिक, तिथि – एकादशी , पक्ष – शुक्ल, वार – शुक्रवार, नक्षत्र – पूर्वाभाद्रपद ,सूर्योदय – 06:37, सूर्यास्त – 17:31, चौघड़िया चर – 06:42 से 08:03, लाभ – 08:03 से 09:23, अमृत – 09:23 से 10:44, शुभ – 12:05 से 13:25। स्नान दान व्रत से करें एकादशी तिथि  का शुभारंभ।

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं।और इस दिन से शुभ कार्य का आरंभ होता है। श्रीविष्णु की पूजा विधि-विधान की जाती है। देवउठनी एकादशी 08 नवंबर को है। इस दिन उपवास रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मोक्ष का मार्ग खुलता है।

कार्तिक  मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन सिख धर्म के प्रवर्तक गुरुनानक देव की जयंती होती हैं। इस साल गुरुनानक देव की 550वीं जयंती हैं। 12 नवंबर को पूरे देश में हर्षोल्लास से  मनाई जा रही है।

जब किसी लड़के-लड़की शादी होती है तो हर घर में खुशी का माहौल होता है। खासकर लड़कों के घरों में जहां बहू के रुप में शादी के बाद नए सदस्य की एंट्री होती है। वहीं उस दुल्हन के घर में शादी के बाद उदासी छा जाती है। जहां से उसकी विदाई होती है।

भगवान श्री विष्णु के स्वरूप शालिग्राम का विवाह तुलसी माता से जिस दिन हुआ था।  उस दिन को तुलसी विवाह के नाम से जानते हैं। तुलसी विवाह का उत्सव हर साल कार्तिक मास की एकादशी तिथि को मनाया जाता हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री विष्णु देवशयनी एकादशी के दिन विश्राम करने

माह – कार्तिक, तिथि – दशमी ,  पक्ष – शुक्ल,वार – बृहस्पतिवार,नक्षत्र – शतभिषा , सूर्योदय – 06:37,सूर्यास्त – 17:32, राहुकाल  – 13:26:33 से 14:48:26 तक, चौघड़िया शुभ – 06:41 से 08:02, चर – 10:44 से 12:05, लाभ – 12:05 से 13:25, अमृत – 13:25 से 14:46।

4 माह के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं। इस बार 8 नवंबर देवउठनी एकादशी है। इस दिन श्रीविष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

कार्तिक मास, पक्ष शुक्ल तिथि नवमी 07:21:16 के बाद दशमी, नक्षत्र शतभिष करण कौलव,वार बुधवार। बुधवार को गणेश पूजा करें और हरी वस्तु का दान करें।

कार्तिक के शुक्ल पक्ष अष्टमी को गोपाष्टमी कहते हैं। इस दिन बछड़े सहित गो माता की पूजा का विधान हैं।  इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चराने की शुरुआत की।आज के दिन गाय को स्पर्श से लाभ मिलता है।

माह – कार्तिक, तिथि – अष्टमी,पक्ष – शुक्ल,वार – सोमवार,नक्षत्र – श्रवण, सूर्योदय – 06:34,सूर्यास्त – 17:34, चौघड़िया अमृत – 06:39 से 08:00,शुभ – 09:22 से 10:43,चर – 13:26 से 14:47, लाभ – 14:47 से 16:09।