शेयर बाजार में 10 साल में सबसे बड़ी गिरावट, इन वजहों से धड़ाम हुआ सेंसेक्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश कर दिया है, लेकिन यह बजट शेयर बाजार को पसंद नहीं आया। बजट में किए गए ऐलानों से बाजार धड़ाम हो गया और सेंसेक्स-निफ्टी में 10 साल में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई।

नई दिल्ली:  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश कर दिया है, लेकिन यह बजट शेयर बाजार को पसंद नहीं आया। बजट में किए गए ऐलानों से बाजार धड़ाम हो गया और सेंसेक्स-निफ्टी में 10 साल में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। BSE का बेंचमार्क सेंसेक्स दिन के कारोबार में एक वक्त 1000 से ज्यादा प्वाइंट्स नीचे ट्रेड करता देखा गया।

तो वहीं निफ्टी 11750 के लेवल से भी नीचे चला गया। आखिर में सेंसेक्स 987.96 अंकों की गिरावट के साथ 39,735.53 पर सिमटा और निफ्टी 318 अंक गिरकर 11643.80 अंकों पर बंद हुआ।

नहीं मिला कुछ खास

बजट में किसी सेक्टर विशेष के लिए कोई खास घोषणाएं नहीं की गईं, फिर चाहे वह काफी समय से सुस्ती झेल रहा ऑटो सेक्टर हो या रियल एस्टेट सेक्टर। उम्मीद थी कि सरकार आर्थिक सुस्ती से बाहर निकलने के लिए खपत को बढ़ावा देने के लिए सुस्ती झेल रहे सेक्टर्स के लिए कुछ ऐलान होंगे।

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टैक्स स्लैब पर कन्फ्यूजन

इनकम टैक्स के सेक्शन 80 सी के तहत सभी छूट खत्म किए जाने को लेकर निराशा। पांच लाख तक की आय वालों को कोई टैक्स नहीं देना है। ऐनालिस्ट्स का कहना है कि पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच में चुनाव के ऑप्शन की वजह से और जटिलताएं सामने आ गई हैं। प्रस्तावित टैक्स प्रस्ताव से मध्य वर्ग को भारी फायदा होगा।

LTCG टैक्स पर भी कोई ऐलान नहीं

सरकार से उम्मीद थी कि इस बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स(LTCG) टैक्स खत्म करेगी या लॉन्ग टर्म की परिभाषा बदलेगी, जो निवेशकों के हित में होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे बाजार निराश हुआ।

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विनिवेश का ऊंचा टारगेट

बजट ऐलानों में सरकार ने डिसइन्वेस्टमेंट पर बड़ा लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2021 के लिए सरकार ने 2.10 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है, जिसे काफी ऊंचा लक्ष्य माना जा रहा है। सरकार ने LIC में अपनी हिस्सेदारी बेटनवे का फैसला किया है। इसके अलावा IDBI में भी सरकार अपना कुछ हिस्सा बेचेगी।

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DDT का खत्म होना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारणण ने बजट में DDT खत्म करने का ऐलान किया, जिससे सरकारी खजाने पर 25000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह निवेशकों के लिए नेगेटिव खबर है क्योंकि डिविडेंड अब टैक्सपेयर की इनकम में जुड़ जाएगा।