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Coal Exchange: भारत में जल्द बनेगा कोल एक्सचेंज, कोयला बाजार में आएगी पारदर्शिता
Coal Exchange: भारत में कोल एक्सचेंज स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के इस बड़े सुधार से कोयला व्यापार अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और बाजार आधारित बनेगा।
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Coal Exchange: सरकार ने देश में कोल एक्सचेंज स्थापित करने का रास्ता साफ कर दिया है। यह कदम भारत की कोयला आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने और पारदर्शी तथा बाजार-आधारित ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि हाल ही में लागू खनिज और खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत पहली बार मिनरल एक्सचेंज की अवधारणा पेश की गई है। इसके जरिए केंद्र सरकार को कोयले और उसके प्रसंस्कृत उत्पादों सहित विभिन्न खनिजों के पारदर्शी और प्रभावी व्यापार को बढ़ावा देने का अधिकार मिला है।
कोल एक्सचेंज नियम 2026 हुए अधिसूचित
मंत्रालय के अनुसार, इस कानून को लागू करने के लिए सरकार ने इसी महीने कोल एक्सचेंज नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने दिसंबर 2025 में कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (सीसीओ) को वह प्राधिकरण नियुक्त किया था, जो कोल एक्सचेंजों के पंजीकरण और नियमन की जिम्मेदारी संभालेगा।
पात्र संस्थाओं को मिलेगा कोल एक्सचेंज संचालित करने का अधिकार
मंत्रालय ने बताया कि पात्र संस्थाओं को सीसीओ की ओर से कोल एक्सचेंज स्थापित करने और संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। ये संस्थाएं बाजार के नियम और उपनियम तैयार करेंगी तथा कोयले के व्यापार को सुगम बनाने का काम करेंगी।
कोल एक्सचेंज का पंजीकरण 25 वर्षों तक वैध रहेगा
सरकार के अनुसार, कोल एक्सचेंज का पंजीकरण 25 वर्षों के लिए मान्य होगा। मंत्रालय ने कहा कि कोल एक्सचेंज की शुरुआत कोयला विपणन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगी। इससे अब तक चल रही पारंपरिक "एक विक्रेता से कई खरीदार" व्यवस्था की जगह "कई विक्रेता और कई खरीदार" वाले प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म का विकास होगा।
नए ढांचे के तहत कोयले की कीमतों का निर्धारण अधिक पारदर्शी और बाजार आधारित तरीके से हो सकेगा। इससे कारोबार की दक्षता बढ़ेगी और वाणिज्यिक तथा कैप्टिव खदान संचालकों सहित सभी कोयला उत्पादकों को अधिक संख्या में खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
बाजार आधारित मूल्य निर्धारण से बढ़ेगी पारदर्शिता
इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियां भी इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपनी बाजार भागीदारी को और मजबूत कर सकेंगी। कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "कोल एक्सचेंज पहल सरकार की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस', पारदर्शिता बढ़ाने और आधुनिक तथा आत्मनिर्भर ऊर्जा तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"
मंत्रालय के मुताबिक, अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रभावी कोयला बाजार बनने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ऊर्जा क्षेत्र के विकास और टिकाऊ आर्थिक प्रगति को भी समर्थन देगा।


