टाटा को मिली राहत, वाडिया ने केस लिए वापस, जानिए क्या हुआ…

नुस्ली वाडिया ने प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की सलाह पर रतन टाटा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दर्ज अवमानना का मामला सोमवार को वापस ले लिया। चीफ जस्टिस बोबडे ने वाडिया समूह के चेयरमैन के इस कदम की प्रशंसा की। न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हम इसकी प्रशंसा करते हैं।”

Published by suman Published: January 14, 2020 | 12:26 pm

ई दिल्ली नुस्ली वाडिया ने प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की सलाह पर रतन टाटा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दर्ज अवमानना का मामला सोमवार को वापस ले लिया। चीफ जस्टिस बोबडे ने वाडिया समूह के चेयरमैन के इस कदम की प्रशंसा की। न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हम इसकी प्रशंसा करते हैं।” पीठ में दो अन्य सदस्य न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत थे।

 

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सायरस मिस्त्री मामला खुलने के बाद टाटा के स्वतंत्र निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद वाडिया ने आपराधिक अवमानना मामला दर्ज कराया था। टाटा ने लगातार यही बात कही थी कि उनका अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था। वरिष्ठ अधिवक्ता सी.ए. सुंदरम ने कोर्ट को बताया कि अगर दूसरा पक्ष उन पर लगाए आरोप वापस ले तो उनका मुवक्किल मामला वापस लेना चाहता है।

चीफ जस्टिस ने वाडिया और टाटा के बीच शांति की वकालत करने की कोशिश की और सलाह दी कि कोर्ट बंबई हाईकोर्ट के निष्कर्ष को मान सकता है कि टाटा का वाडिया का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था। कोर्ट ने वाडिया के वकील से पूछा, दूसरे पक्ष को आपके संबंध में कोई शिकायत है, और वे कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं। यह मानहानि कैसे हो सकती है।

 

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ये था मामला

नुस्ली वाडिया ने स्वतंत्र निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद रतन टाटा के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज कराया था। वाडिया पहले टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा केमिकल्स के बोर्ड्स में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर थे। 2016 में स्वतंत्र निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद स्ली वाडिया ने रतन टाटा और अन्य के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करवया था। जुलाई 2019 ने बॉम्बे हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना को रदद् कर दिया था। बॉबे हाइकोर्ट के फैसले को नुस्ली वाडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।