विधान सभा चुनाव: जानिए क्या है एग्जिट पोल और कैसे निकलते हैं आंकड़े?

एग्जिट पोल हमेशा मतदान पूरा होने के बाद ही दर्शाए जाते हैं। लेकिन अगर चुनाव एक चरण से ज्यादा हो तो जो आखिरी चरण होता है, उस दिन मतदान पूरा होने के बाद इसके नतीजे दिखाए जाते हैं। लेकिन उससे पहले हर चरण के मतदान के दिन डाटा इकट्ठा किया जाता है।

नई दिल्ली: देश के 2 राज्यों(महाराष्ट्र और हरियाणा) में विधान सभा चुनाव के साथ उत्तरप्रदेश के 11 सीटों पर विधान सभा उपचुनाव के लिए वोंटिंग हुई। इसके साथ ही तमाम टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल भी आने लगे। तो आइये आज हम आपको एग्जिट पोल के बारे में बताते हैं।

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चुनाव के बाद सभी के मन में सवाल आने लगता है कि आखिर किसके सर पर ताज सजेगा और कौन हारेगा। इसी सवाल के जिज्ञासा को शांत करने के लिए एग्जिट पोल बनाया गया।

इसमें यह पता चल जाता है कि किस पार्टी के पक्ष में हवा चल रही है। कौन-सा दल इस चुनाव में बाजी मारेगा? आइए आपको बताते हैं कि आखिर एग्जिट पोल होते क्या हैं? कैसे निकलते हैं एग्जिट पोल के आंकड़े?

 

क्या होते हैं एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल हमेशा मतदान पूरा होने के बाद ही दर्शाए जाते हैं। लेकिन अगर चुनाव एक चरण से ज्यादा हो तो जो आखिरी चरण होता है, उस दिन मतदान पूरा होने के बाद इसके नतीजे दिखाए जाते हैं। लेकिन उससे पहले हर चरण के मतदान के दिन डाटा इकट्ठा किया जाता है।

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एग्जिट पोल के लिए हर चरण की वोटिंग के बाद डाटा इकट्ठा किया जाता है वोटिंग के दिन जब मतदाता वोट डालकर निकल रहा होता है, तब उससे पूछा जाता है कि उसने किसे वोट दिया। इस आधार पर किए गए सर्वेक्षण से जो व्यापक नतीजे निकाले जाते हैं। इसे ही एग्जिट पोल कहते हैं। आमतौर पर टीवी चैनल वोटिंग के आखिरी दिन एग्जिट पोल ही दिखाते हैं। इसमें यह दिखाया जाता है कि कौन-से दल के प्रत्याशी जीत रहे हैं और किस दल के प्रत्याशी हार रहे हैं।

पहली बार एग्जिट पोल किसने शुरू किया?

एग्जिट पोल शुरू करने का श्रेय नीदरलैंड के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वॉन डैम को जाता है। उन्होंने 15 फरवरी, 1967 को पहली इसका इस्तेमाल किया था। नीदरलैंड में हुए चुनाव में उनका आकलन सटीक बैठा थां जबकि भारत में इसकी शुरुआत का श्रेय इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन के मुखिया एरिक डी कोस्टा को जाता है। चुनाव के दौरान इस विधा द्वारा जनता के मिजाज को परखने वाले वे पहले व्यक्ति थे।

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