कोरोना से जंग में केरल बेमिसाल मगर महाराष्ट्र और गुजरात का बुरा हुआ हाल

देश में कोरोना का पहला केस मिलने के बाद 101 दिन का समय पूरा हो चुका है और पूरा देश इन दिनों एकजुट होकर इस वायरस के खिलाफ संघर्ष में जुटा है।

नई दिल्ली: देश में कोरोना का पहला केस मिलने के बाद 101 दिन का समय पूरा हो चुका है और पूरा देश इन दिनों एकजुट होकर इस वायरस के खिलाफ संघर्ष में जुटा है। देश में कोरोना का पहला केस 30 जनवरी को केरल में मिला था और केरल ने ही कोरोना से जंग में बेमिसाल जज्बा दिखाया है। मौजूदा समय में केरल में कोरोना के महज 20 एक्टिव केस रह गए हैं। केरल के बिल्कुल विपरीत दो अन्य राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात में स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इन दोनों राज्यों में तमाम कोशिशों के बावजूद कोरोना पॉजिटिव केसों की रफ्तार पर लगाम नहीं लग पा रही है।

महाराष्ट्र और गुजरात में लगातार बढ़ रहे केस

यदि हम महाराष्ट्र की स्थिति देखें तो वहां पर कोरोना वायरस का पहला मामला 9 मार्च को सामने आया था और अब वहां स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि अब तक कोरोना के करीब 20 हजार केस दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं गुजरात में भी स्थिति अच्छी नहीं है। वहां भी कोरोना से संक्रमित होने वाले मरीजों का आंकड़ा करीब साढ़े सात हजार पर पहुंच चुका है।

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केरल में सरकार की सख्ती का असर

यदि केरल की स्थिति पर नजर डाली जाए तो वहां अब तक कोरोना के 505 मामले सामने आए हैं और इस वायरस से चार लोगों की मौत हुई है। राज्य में 27 मार्च को कोरोना के सर्वाधिक 39 मरीज मिले थे मगर उसके बाद सरकार के सख्त कदमों की वजह से स्थिति लगातार बेहतर होती गई और अब तो वहां मात्र 20 एक्टिव केस ही बचे हैं।

इस कारण मिली केरल को कामयाबी

माना जा रहा है कि केरल में कोरोना पर पर काबू पाने का कारण यह रहा कि वह क्वारंटाइन को सख्ती से लागू किया गया। कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों को 14 दिन की बजाय 28 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा गया। इसके साथ ही बुखार, खांसी वाले मरीजों को तुरंत अस्पताल में भेजकर उनकी जांच की गई और उन पर लगातार नजर रखी गई। प्रशासनिक अमला भी सरकार के सख्त कदमों को लागू करने में पूरी तरह जुटा रहा और इस कारण कोरोना को काफी हद तक नियंत्रण में कर लिया गया। केरल के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मिजोरम में भी कोरोना पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है।

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महाराष्ट्र में इस कारण बिगड़ रहे हालात

दूसरी और महाराष्ट्र में स्थिति दिन-प्रतिदिन विकट होती जा रही है। यहां कोरोना के केसों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ रही है और जिस तरह अमेरिका में न्यूयॉर्क में हालात बेकाबू हो चुके हैं उसी तरह मुंबई में भी स्थितियां दिन प्रतिदिन बिगड़ रही हैं। यहां कोरोना के केसों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि राज्य में हॉटस्पॉट तो बना दिए गए पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के उपाय नाकाफी रहे। इस कारण कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से फैला।

इसके साथ ही झोपड़पट्टी में रहने वालों को शौचालय के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। इससे भी संक्रमण को रफ्तार मिली। राज्य में लोगों को कोरोना टेस्टिंग के प्रति जागरूक करने में भी देरी हुई और डॉक्टर और बेडों की कमी के कारण भी कोरोना के केस तेजी से बढ़े।

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गुजरात में हो चुकी हैं साढ़े चार सौ मौतें

देश में महाराष्ट्र के बाद कोरोना के सबसे ज्यादा मामले गुजरात में सामने आए हैं। राज्य में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या करीब साढ़े सात हजार पहुंच चुकी है और राज्य में करीब चार सौ लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गृह मंत्री अमित शाह ने एम्स के डायरेक्टर को वहां पर विशेष रुप से भेजा है ताकि कोरोना पर काबू पाया जा सके।

इन राज्यों का हाल भी अच्छा नहीं

महाराष्ट्र और गुजरात के अलावा दिल्ली और तमिलनाडु का हाल भी अच्छा नहीं हैं। मरीजों की संख्या के हिसाब से दिल्ली देश में तीसरे और तमिलनाडु चौथे नंबर पर है। तमिलनाडु में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या छह हजार से ज्यादा हो चुकी है। मध्यप्रदेश में भी कोरोना खतरनाक रूप ले चुका है और करीब साढ़े तीन हजार लोग इससे संक्रमित हैं और 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।