कोरोना वायरस

“भारत में कोरोना से लड़ रही टीमें संक्रमण की पूरी चेन का पता लगा कर उसकी जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन ये काम आसान नहीं है। इस जंग में टेक्नालजी का भी बहुत बड़ा हाथ है।“

यह एप यूजर की लोकेशन की मदद से उसे ट्रैक करेगी और अगर वह किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है या आसपास रह रहा है तो उसे अलर्ट कर देगी। यह एप यूजर की लोकेशन को हर एक घंटे बाद ट्रैक करती है और उसे बताती है कि उस पर कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा है या नहीं।

कोरोना संक्रमण को रोकने में केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्इइन्फेक्शन मशीन विकसित कर के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए इसकी तकनीक भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) को सौंप दी है।

दावे तो आयुर्वेदिक उपचार से कोरोना वायरस ठीक करने के हुए हैं लेकिन मान्यता किसी को नहीं मिली है। अब ये नए तरीके की वैकल्पिक पद्धति सामने आयी है। जिसमें ध्वनियों की तरंगों को आधार बनाकर  ईएफवी (इलेक्ट्रो-फ्रीक्वेंसी-वाइब्रेंशन) मॉडल पेश किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि ५ अप्रैल,२०२०की रात ९ बजे सब लोग अपने अपने घरों की छत अथवा बालकनी या घरों की लक्ष्मण रेखा के अंदर रहते हुए नौ मिनट तक दीपक या मोमबत्ती जलायें और कुछ न हो तो टार्च या मोबाइल से रोशनी फैलायें।

इस बात की गवाही सरकारी आंकड़े भी दे रहे हैं जिनके अनुसार देश के कुल 509 जिले अभी तक कोरोना के संक्रमण से बचे हुए हैं। मात्र 211 जिलों में कोरोना वायरस के मामले पाए गए हैं। देश में कुल 720 जिले हैं। लगभग 40 फीसदी जिले यानी देश का आधा हिस्सा संक्रमण से बचा हुआ है। हमें इसको बढ़ाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेतावनी के बावजूद हम इस खतरनाक वायरस के प्रति बेपरवाह हैं। ऐसे नहीं हो जाएगा कोरोना, कोई चिपक नहीं जाएगा, कोरोना जैसे जुमले बोल रहे हैं। हमें नहीं होगा कोरोना। मास्क नहीं लगा रहे हैं। दोस्तों के साथ झुंड बनाकर गली, मोहल्लों के नुक्कड़ घरों के बाहर, चौराहों पर अड़ी पंचायत लगाने की अपनी आदत को नहीं छोड़ पा रहे हैं।

लॉकडाउन के कारण घरों में कैद लोगों को भले ही कुछ दिक्कतें हो रही हों लेकिन यह भी सच्चाई है कि इसके कई सकारात्मक नतीजे भी निकले हैं।

कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर स्थित एक सुपर हाईटेक लैब से निकला था। ब्रिटेन सरकार के मंत्रियों ने कहा है की कहने को भले ही ये कहा....

वैसे तो किसी भी व्यक्ति की असमय मौत किसी भी परिवार के लिए बहुत बड़ा आघात होती है लेकिन जो जाने वाला चला गया उसके जाने के बाद उसके परिवार को खुद अपने परिजनों और समाज के अन्य लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए इस की जानकारी होना अनिवार्य हो गया है।