कोरोना वायरस

संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के साथ ही टेस्टिंग भी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। देशभर में अभी तक 25 लाख से अधिक सैंपल टेस्ट के लिए एकत्रित किए गए हैं। जानकारों का कहना है की टेस्टिंग के स्पीड तेज होने से इस वायरस के संक्रमण की रफ्तार को रोकने में मदद मिलेगी।

चीन ने लगातार अंतरराष्ट्रीय शोध का और इस बात का खंडन करता रहा है कि विषाणु की उत्पत्ति मध्य चीनी शहर में स्थित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में एक उच्च-सुरक्षा जीव विज्ञान प्रयोगशाला में हुई। जहां पिछले साल के अंत में कोविद -19 बीमारी का प्रकोप हुआ था।

अमेरिका के प्रसिद्ध प्रिंसटन विश्वविद्यालय के शोध मैं कोरोना वायरस के संबंध में एक नई जानकारी दी गई है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्मी या उमस भरे मौसम में भी कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार कम नहीं होगी।

कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद दुनिया भर के वैज्ञानिक इस वायरस पर अध्ययन करने में जुटे हुए हैं। इस बीच ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में खुलासा किया है कि कोरोना वायरस जानवरों के मुकाबले इंसानों के शरीर को तेजी से संक्रमित करता है।

कोरोना वायरस ने समय पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है और इस वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से मानी जा रही है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस वायरस की वैक्सीन खोजने में जुटे हुए हैं मगर अभी तक किसी को कामयाबी नहीं मिल सकी है।

पूरी दुनिया इन दिनों कोरोना संकट से जूझ रही है और विभिन्न देशों के नेता इस संकट से बाहर निकलने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। दुनिया भर में गहराते संकट के बीच सात देशों की महिला नेताओं ने अपने नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है।

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शायद अपने जीवनकाल में यूँ पहली बार ही इतने दिनों के लिए थम गई है। और थमी भी ऐसा है कि चलने का नाम ही नहीं ले रही है। सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज की पहली पांच कंपनियां मुंबई में उतर चुकी हैं। लॉकडाउन 4.0 प्रारम्भ हो गया है, लेकिन कोरोना …

इसमें राहत देने के सभी संभव प्रयास किये जाएंगे। इस दौरान अधिकांश दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को खोलने की इजाजत दे दे जाएगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी इजाजत दे दी जाएगी। इस दौरान कंटेनमेंट जोन को सील कर दिया जाएगा ताकि आर्थिक गतिविधियां चलाई जा सकें।

अध्ययनों से पता चला है कि वायरस कई दिनों तक कई प्रकार की सतहों पर रह सकता है। हालांकि, ये अधिकतम अवधि केवल सैद्धांतिक हैं क्योंकि उन्हें प्रयोगशाला स्थितियों के तहत दर्ज किया गया है और वास्तविक दुनिया के वातावरण में फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं है।

कोरोना महामारी के इस दौर में भले ही कई लोग संत कोरोना से बीमारी से बचाने की प्रार्थना करने ना जा रहे हों लेकिन क्या पता इसके कारण जाने वाली नौकरियों और आने वाली आर्थिक परेशानियों से रक्षा के लिए लोग फिर से संत कोरोना की प्रार्थना करने लगें।