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फर्जी एनकांउटर में शामिल था पूर्व डिप्‍टी मेयर, हाईकोर्ट ने सुनाई सजा

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 29 Jun 2018 4:39 PM GMT

फर्जी एनकांउटर में शामिल था पूर्व डिप्‍टी मेयर, हाईकोर्ट ने सुनाई सजा
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लखनऊ: अलीगंज में 1994 में हुए गोपाल मिश्रा एनकाउंटर में अपर सत्र न्यायाधीश स्वप्ना सिंह ने शुक्रवार को तत्कालीन डिप्टी मेयर अभय सेठ व अलीगंज व्यापार मंडल के तत्कालीन महामंत्री अशोक मिश्र सहित दो पुलिस कर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनायी है। ये दो पुलिसकर्मी कांस्टेबल रामचंदर सिंह चंदेल व शिवभूषण तिवारी हैं जो उस समय अलीगंज थाने पर तैनात थे। कोर्ट ने सभी चारों मुल्जिमों पर दस-दस हजार रूपये का जुर्माना भी ठोंका है। इस केस में अलीगंज के तत्कालीन एसओ डीडीएस राठौर व कांसटेबल मुंशीलाल भी आरोपी थे, लेकिन मुकदमे के विचारण के दौरान उनकी मौत हो गयी थी।

दिन दहाड़े हुआ था एनकाउंटर

26 फरवरी, 1994 की दोपहर एक बजे केंद्रीय सेवा से रिटायर एक कर्मचारी सद्गुरु शरण मिश्रा के इकलौते पुत्र गोपाल मिश्रा के थाना अलीगंज के चौधरी टोला इलाके में पुलिस ने एक एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था। 11 दिसंबर, 1997 को सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेश से इस वारदात की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु हुई।

इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गयी। जिसने अपनी जांच में पुलिस की मुठभेड़ को फर्जी करार दिया व इसे सुनियोजित हत्या का मामला पाया। 27 सितंबर, 2003 को सीबीसीआईडी ने इन सभी मुल्जिमों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 302, 504 व 506 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 ए(1) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही फर्जी मुठभेड़ के मामले में दर्ज एफआईआर में अंतिम रिपोर्ट भी दाखिल की। सात अक्टूबर, 2008 को अदालत ने मुल्जिमों पर आरोप तय कर मुकदमे का विचारण शुरु किया। अभियोजन की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए। इन गवाहों में मृतक की मां अम्बेश्वरी मिश्रा भी थीं।

यह है मामला

सरकारी वकील शैलेंद्र यादव व रामस्वरुप के मुताबिक मुल्जिम अशोक मिश्रा व्यवसायिक काम्पलेक्स व बड़ी बड़ी इमारतें बनाने का काम करता है। अलीगंज में डंडइया बाजार के पास मानस काम्पलेक्स भी अशोक ने बनवाया है। उसके रसूख से प्रभावित होकर मृतक गोपाल मिश्रा उसके साथ रहने लगा था। वह अलीगंज के शेखुपुरा इलाके में किराए के एक मकान में रहते हुए अशोक मिश्रा का फुटकर कामकाज करने लगा था। उसकी मां अम्बेश्वरी मिश्रा भी उसके साथ रहती थीं।

अशोक मिश्रा मानस काम्पलेक्स से कुछ दूरी पर चौधरी टोला इलाके में नजूल की 50 हजार वर्ग फीट की जमीन को हथियाकर वहां अपना व्यवसायिक काम्पलेक्स बनाना चाहता था। लेकिन इस जमीन पर हाजरा बेगम ने राजा राम मोहन राय मिशन के नाम से एक संस्था स्थापित कर रखा थी। जो विधवा, असहाय व प्रताड़ित महिलाओं के लिए कार्य करती थीं। इसके साथ ही इस जमीन पर कई गरीब मजदूर लोग झोपडियां बनाकर भी रहते थे। गोपाल की मां अम्बेश्वरी भी इस संस्था की सक्रिय सदस्य हो गई थीं।

अशोक मिश्रा चाहता था कि गोपाल व उसकी मां इस मिशन का साथ छोड़ दें। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बल्कि गोपाल ने नजूल की जमीन पर रहने वाले मजदूरों में साहस फूंकने का काम किया। जिससे अशोक मिश्रा अपने को अपमानित व सामाजिक रुप से आहत महसूस करने लगा।

26 फरवरी, 1994 को घटना वाली दोपहर गोपाल मिश्रा चौधरी टोला इलाके में हाजरा बेगम की बहन मोहसिना के घर पर था। जहां पहले से उसकी मां अम्बेश्वरी मिश्रा भी मौजूद थीं। तभी अशोक मिश्रा अपने मकान से मोहसिना के मकान में कूद पड़ा। जबकि सामने के दरवाजे से थाना अलीगंज के एसओ डीडीएस राठौर व अन्य मुल्जिम पुलिसकर्मी जबरिया अंदर आए। दरवाजे पर अभय सेठ भी था। अशोक के बताने पर राठौर व अन्य मुल्जिम पुलिसकर्मियों ने गोपाल को गोलियों से छलनी कर दिया। अशोक दौड़कर अपने घर से एक छोटी बंदूक व कारतूस लाया। जिससे एसओ राठौर ने फायर करके मृत गोपाल के हाथ के नीचे रख दिया। इसके बाद अशोक ने वहां मौजूद लोगों को गालियां देते हुए अपने घर में छुप जाने की हिदायत दी। कहा कि यदि किसी ने अपनी जुबां खोली तो उसका इससे भी बुरा हाल होगा। चौदह साल से अधिक खिंचे इस मुकदमें में शुक्रवार को अदालत ने चार मुल्जिमों को सजा सुना दी।

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