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अब जेल से निकले इस लेटर बम से सनसनी, बंदी धर्मराज की ऐसे हुई थी हत्‍या

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 23 July 2018 3:56 PM GMT

अब जेल से निकले इस लेटर बम से सनसनी, बंदी धर्मराज की ऐसे हुई थी हत्‍या
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बलरामपुर: जिला कारागार में निरुद्ध एक बंदी की जेल में पीट-पीट कर हत्त्या कर दी गई। बंदी की मौत के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जेल व पुलिस प्रशासन ने मामले को दबाने का भरपूर प्रयास किया और बंदी की मौत का कारण बीमारी बताया। साथी बंदी की मौत से नाराज तमाम बंदियों ने जेल से लेटर जारी कर बताया कि जेल हेड, फार्मासिस्‍ट व एक सिपाही ने बीमारी की हालत में बंदी धर्मराज की जमकर पिटाई की। जिससे उसने दम तोड़ दिया और खुद को बचाने के लिए जेल प्रशासन ने बंदी की बीमारी से मौत की झूठी कहानी मीडिया और परिजनों को सुनाई है। जेल से लेटर बाहर आने के बाद जेल हेड सहित 3 पर केस दर्ज कर पुलिस ने कार्यवाई शुरू कर दी है। ये आलम तब है जब हाल ही में बागपत जेल में माफिया मुन्‍ना बजरंगी की हत्‍या के बाद जेलों की सुरक्षा की समीक्षा की गई है।

ये है मामला

यहां जेल में निरुद्ध धर्मराज पुत्र मोतीलाल को रेहरा थाने की पुलिस ने अवैध शराब बनाने के दौरान संयंत्र सहित गिरफ्तार किया था। 20-07-18 को उसे जेल भेजा था। 22-07-2018 को सुबह करीब 7:35 बजे उसकी मौत हो गई। जिसके बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौत के बाद बंदियों ने जेल में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना के बाद अपर पुलिस अधीक्षक, ADM रामानुज, SDM सहित भारी पुलिस बल के साथ जिला कारागार पहुँच कर हंगामा शांत कराया। मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह ने जिला कारागार में निरुद्ध धर्मराज की मौत बीमारी से होना बताया और बंदियों के हंगामे को उनकी व्यक्तिगत समस्या से जोड़ दिया था।

वकील को साथियों ने दिया लेटर

बंदी की मौत के बाद जेल में अपने बंदी रोमी गुप्ता से मिलने गए अधिवक्ता को मामले में वादी मुकदमा रोमी ने ही अधिकारियों को दी गयी तहरीर की कॉपी अपने अधिवक्ता को दी जिसके बाद मामले में मारपीट के बाद हत्त्या का खुलासा हुआ। लेटर में दर्जनों बंदियों ने जेल हेड चीफ श्याम मनोहर, सिपाही राधेश्याम सत्यार्थी व फार्मशिस्ट अशफ़ाक पर सीधा आरोप लगते हुए बीमारी की हालत में बंदी धर्मराज को बैरेक न0 9 से निकाल कर पीटने व उसकी हत्त्या का आरोप लगाया है और स्वयं को चश्मदीद बताया है जिसके बाद लेटर वाइरल हो गया और प्रशासन पर मीडिया व उच्चाधिकारियों के बढ़ते दबाव में कोतवाली देहात पुलिस को जेल हेड सहित 3 पर मजबूरन मुकदमा दर्ज करना पड़ा।

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