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अजब इंस्‍पेक्‍टर के गजब नियम, अपने खिलाफ ही लिख दिया मामला

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 15 July 2018 9:40 AM GMT

अजब इंस्‍पेक्‍टर के गजब नियम, अपने खिलाफ ही लिख दिया मामला
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मेरठ: यूपी पुलिस हमेशा अपने कारनामों के लिए चर्चा में बनी रहती है। वहीं ज्यादातर पुलिसकर्मी अपने कार्य में लापरवाही के कारण उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने पर कार्यवाही से बचने का प्रयास करते हुए तो आपने देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी थानाध्यक्ष ने अपने ही थाने की जीडी में अपनी ही शिकायत अंकित की हो?

चौंकिए मत क्योंकि मेरठ के एक थानाध्यक्ष ने अपने कार्य में अपनी लापरवाही मानते हुए अपने ही थाने की जीडी में अपना और अपने साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तस्करा अंकित कर डाला है।

चाहे जो हो जाए, नियम नहीं तोड़ेंगे

दरअसल, एसएचओ राजेन्द्र त्यागी ने मेरठ के थाना खरखोदा का चार्ज लेने से पहले कुछ नियम बनाए थे। उनका कहना था कि अगर किसी बीट कांस्टेबल के क्षेत्र में कोई चोरी होगी तो उसकी जिम्मेदारी बीट कांस्टेबल की होगी, अगर किसी क्षेत्र में कोई लूट होगी तो उसकी जिम्मेदारी बीट कांस्टेबल और इलाके के हल्का प्रभारी या फिर चौकी प्रभारी की होगी, अगर इलाके में जघन्य अपराध जैसे डकैती गोकशी या हत्या होगी तो उसकी जिम्मेदारी बीट कांस्टेबल, हल्का प्रभारी सहित खुद थानाध्यक्ष की होगी। जिसकी भी जिम्मेदारी में थोड़ी सी भी लापरवाही पाई जाती है, तो उसके खिलाफ जीडी में तस्करा दाखिल किया जाएगा। अगर यह लापरवाही दो बार से ज्यादा पाई गई तो उस पुलिसकर्मी चाहे वह खुद थानाध्यक्ष हो, उसकी शिकायत उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी और उच्च अधिकारी उस पर अपनी कार्यवाही करेंगे।

गौकशी का खुद को माना जिम्‍मेदार

खरखौदा के थाना अध्यक्ष राजेंद्र त्यागी के अनुसार उनका थाने का चार्ज लेने के बाद से अबतक उनके क्षेत्र में छह छोटी-छोटी चोरियां हो चुकी है जिनमें उन्होंने 6 कांस्टेबल के खिलाफ जीडी में तस्करा दाखिल किया है। लेकिन आज उनके क्षेत्र में गौकशी हुई है। जिसमें वह सीधा-सीधा बीट कांस्टेबल हल्का प्रभारी और स्वयं अपने आप को जिम्मेदार मानते हुए अपने ही थाने के जीडी में अपने और बीट कांस्टेबल अनिल तेवतिया, हल्का प्रभारी प्रेम प्रकाश, एसआई चंद किशोर, रात्रि प्रभारी दरोगा सुनील, कॉन्स्टेबल आजाद और नीलेश के खिलाफ जीडी में तस्करा दाखिल किया है। इसके साथ ही साथ अपने क्षेत्र के 19 गौतस्करों के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है और अब उनकी धरपकड़ के लिए दबिशें दी जा रही है। उनका कहना है कि वह अपने क्षेत्र से गौ तस्करी को पूरी तरह बंद करके ही रहेंगे।

2005 में बने थे सब इंस्‍पेक्‍टर

राजेन्द्र त्यागी का कहना है कि उन्होंने 2005 में दरोगा के पद पर यूपी पुलिस में नौकरी हासिल की थी। उसके कुछ समय बाद सर्विलांस की शुरुआत हुई और सर्विलांस के जरिये पुलिस अपराधियों तक पहुँचने लगी। इस बीच कई एनकाउंटर भी हुए। फिर धीरे धीरे जैसे वक्त बढ़ता गया तो अपराधी सर्विलांस को समझने लगे और सर्विलांस की जद से बाहर जाने लगे, अब अपराधी भी हाईटेक हो गए। और पुलिस अपराधियों से पछड़ने लगी। लेकिन अगर अपराध पर लगाम कसना है तो पुलिस को दोबारा जमीनी स्तर पर काम करना होगा यानी कि बीट कॉन्स्टेबल को अपने काम में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि बीट कांस्टेबल ही पुलिस की नींव होता है और इसी मुखबिर तंत्र के माध्यम से ही पुलिस अपराधों पर लगाम लगा सकती है।

अपने इस रास्ते पर चलने में नाकाम हुए थाना अध्यक्ष राजेंद्र त्यागी ने अपनी गलती मानते हुए अपने और अपनी टीम के खिलाफ अपने ही थाने की जीडी में तस्करा दाखिल कर दिया।

एसएसपी ने की एसएचओ की सराहना

वही जब इस मामले में हमने एसएसपी राजेश पांडे से बात की तो उन्होंने थाना अध्यक्ष राजेंद्र त्यागी के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि राजीव त्यागी ने अपने ही बनाए हुए नियम का सख्ती से पालन किया और ऐसे पुलिसकर्मी जो अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरते हैं उनके लिए एक मिसाल भी दी। अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा की राजेंद्र त्यागी की यह पहल पुलिस प्रणाली के सुधार में कितनी कारगर साबित होगी।

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