केजरीवाल को क्यों मिले वोट, ‘मोहल्ला क्लिनिक’ के नाम पर?

मोहल्ला क्लिनिक को सरकार अपना बेहद सफल प्रोजेक्ट बता रही है, लेकिन ग्राउंड पर हकीकत क्या है इसकी हमने तहकीकात जब हमने की तो पाया की जनता तो इससे खुश हैं लेकिन स्टाफ को सैलरी से लेकर इश्यू है।

अंशिका शारडा

नई दिल्ली: दिल्ली में चुनावी बिगुल बज गया है। बीजेपी, आप और कांग्रेस तीनों पार्टियां मैदान में हैं, सियासी बयानबाजियां हो रही है| केजरीवाल सरकार काम के नाम पर वोट मांग रही है। जिनमें मोहल्ला क्लिनिक को पहले स्थान पर रखा गया है| मोहल्ला क्लिनिक को सरकार अपना बेहद सफल प्रोजेक्ट बता रही है, लेकिन ग्राउंड पर हकीकत क्या है इसकी हमने तहकीकात जब हमने की तो पाया की जनता तो इससे खुश हैं लेकिन स्टाफ को सैलरी से लेकर इश्यू है।

कैसा था मोहल्ला क्लिनिक?

हमने दिल्ली के कौंडली, पटपड़गंज और लक्ष्मीनगर के मोहल्ला क्लिनिक की पड़ताल की. कौंडली के मोहल्ला क्लिनिक से बाहर ईलाज़ करवा कर आ रहे लोग तो इससे बहुत खुश थे. लोगों ने सरकार के इस प्रोजेक्ट की खूब तारीफ भी की|

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लोगों ने बताया कि मोहल्ला क्लिनिक के कारण वो मंहगे अस्पतालों में जाने से बच जाते हैं और ईलाज़ के लिए ना ही उन्हें लाईनों में लगना पड़ता और ना ही घंटों इंतजार करना पड़ता, लेकिन मोहल्ला क्लिनिक को लेकर कई तरह की परेशानियां भी थी मसलन वहां पर स्टाफ की भारी कमी थी, वहीं डॉक्टरों और सहायक वर्कर्स की पिछले सितंबर के बाद से अब तक सैलरी नहीं आई थी. पब्लिक के लिए टॉयलेट तक की काफी कमी थी मोहल्ला क्लिनिक में। दवाओं की कमी के कारण भी वे डॉक्टर और स्टाफ परेशान थे।

क्यों शुरू हुआ था मोहल्ला क्लिनिक?

दिल्ली में साल 2015 में पहला मोहल्ला क्लिनिक पीतमपुरा की झुग्गियों में शुरु किया गया था. उसके बाद कई दूसरे इलाकों में इसे खोला गया. केजरीवाल ने खुद बताया कि दिल्ली में अभी करीब 450 मोहल्ला क्लिनिक है.केजरीवाल ने 1000 मोहल्ला क्लिनिक खोलने का वादा किया था जिसको लेकर उन्होंने कहा की वो अपने इस वादे को पूरा भी करेगें अगले महीने तक,ऐसा नहीं है कि मोहल्ला क्लिनिक एक बेहद सफल प्रोजेक्ट रहा है|

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जून 2018 में एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में महारानी बाग के बदहाल मोहल्ला क्लिनिक की तस्वीर सामने आई थी। इसी के साथ ही लगातार बीजेपी भी मोहल्ला क्लिनिक प्रोजेक्ट को फेल बता कर केजरीवाल पर निशाना साधती रही है.लेकिन दिल्ली की जनता को मोहल्ला क्लिनिक से फिर भी काफी फायदा है ऐसे में ये केजरीवाल सरकार को वोट दिलवाने में अहम भूमिका निभा सकता है।