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20 हजार स्टूडेंट्स के निलंबन पर IET और AKTU में ठनीं, डायरेक्‍टर बोले- फर्जी नहीं हैं हमारे स्‍टूडेंट्स

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amanBy aman

Published on 27 Feb 2017 1:45 PM GMT

20 हजार स्टूडेंट्स के निलंबन पर IET और AKTU में ठनीं, डायरेक्‍टर बोले- फर्जी नहीं हैं हमारे स्‍टूडेंट्स
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लखनऊ: राजधानी स्थित डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के एडेड और प्राइवेट इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों के 20 हजार छात्रों के प्रवेश को संदिग्‍ध मानते हुए यूनिवर्सिटी ने हाल ही में निलंबित कर दिया। इसमें प्रदेश के 600 सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के साथ ही लखनऊ आईईटी के बच्‍चों का नाम भी सामने आया।

इसे लेकर इंस्‍टीटयूट आॅफ इंजीनियरिंग एंंड टेक्‍नॉलॉजी (आईईटी) के डायरेक्‍टर प्रोफेसर एएस विद्यार्थी ने सोमवार (27 फरवरी) को कड़ा एतराज जताया। उन्‍होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि एकेटीयू द्वारा उनके यहां पंजीकृत जिन बच्‍चों पर सवाल उठाए गए हैं, उनका पंजीकरण एकदम सही है। उनके कॉलेज के बच्‍चों में एक भी फर्जी छात्र नहीं है।

आईईटी बन रहा है ऑटोनॉमस बॉडी

-आईईटी के डायरेक्‍टर प्रोफेसर एएस विद्याथी ने बताया कि एकेटीयू की हम सिर्फ कांस्‍टीटयूशनल बॉडी हैं।

-धीरे धीरे हम कॉलेज को ऑटोनॉमस बॉडी बना रहे हैं।

-हमारे अपने बॉय लाॅज हैं और हम वर्तमान में आंशिक रूप से ऑटोनॉमस बॉडी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

-हम 2017-18 के शैक्षिक सत्र से यूजी, पीजी और पीएचडी एडमिशन के लिए खुद के आर्डीनेंस को फॉलो करने जा रहेे हैं।

-हमें नैक से भी मान्‍यता प्राप्त है।

-इसके अलावा हमने कई अवार्डस भी जीते हैं।

-एकेटीयू द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें किन कॉलेजों के स्‍टूडेंट्स हुए हैं निलंबित...

इन कॉलेजों के स्‍टूडेंट्स हुए हैं निलंबित

एकेटीयू के रजिस्‍ट्रार पवन गंगवार ने बताया कि पूरे प्रदेश के करीब 600 कॉलेजों के 20 हजार छात्रों के प्रवेश संबंधी दस्‍तावेजों में गड़बड़ी के चलते बड़े पैमाने पर निलंबन की कार्यवाही की गई है। इसमें एडेड और प्राइवेट दोनों कॉलेज शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से आईटी लखनऊ, केएनआईटी सुल्‍तानपुर, आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज आगरा, एमआईटी मेरठ, एबीईएस कॉलेज गाजियाबाद, हिंदुस्‍तान इंस्‍टीटयूट ऑफ टेक्‍नॉलॉजी एंड मैनेजमेंट आगरा, राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग कॉलेज अलीगढ़, यूनाइटेड कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट इलाहाबाद, गोपीचंद्र कालेज बागपत, श्री राममूर्ति स्‍मारक कॉलेज ऑफ टेक्‍नॉलाजी बरेली, अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज गाजियाबाद, इंद्रप्रस्‍थ कॉलेज गाजियाबाद, महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज कानपुर, दयानंद एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्‍टडीज कानपुर, कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्‍टडीज कानपुर, आजाद इंजीनियरिंग कॉलेज लखनऊ, बीबीडी एनआईटीएम लखनऊ, आईआईएसई लखनऊ, इंस्‍टीटयूट ऑफ इनवायरमेंट एंड मैनेजमेंट लखनऊ, शेरवुड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग लखनऊ सहित करीब 600 कॉलेज शामिल हैं।

ऐसे पकड़ी गई कमी

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अधिकारियो द्वारा ऑनलाइन डेटाबेस प्रवेश परीक्षा के टाइम पर तैयार किया गया था और बाद में जब कॉलेजों से हार्ड कॉपी में डॉक्यूमेंट आए उसका मैन्युअल चेक किया गया। इसमेंं बड़े पैमाने पर खामियांं पाए जाने के बाद प्रदेश के 600 कॉलेजों के 20 हज़ार छात्रों को निलंबित कर दिया गया। निलंबित छात्रों का जो छाटा प्रवेश फार्मों में दर्ज था, उसके दस्‍तावेज साथ में संलग्‍न नहीं थे। इसके पीछे एकेटीयू के अधिकारी कॉलेजों द्वारा जल्‍दबाजी में सीटें भरने की कवायद को बता रहे हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़ें निलंबित स्टूडेंट्स के लिए क्या है मौका ...

27 फरवरी से 8 मार्च तक मिलेगा मौका

एकेटीयू के वाइस चांसलर विनय कुमार पाठक ने बताया कि इस कार्यवाही में जिन छात्र छात्राओं का निलंबन हुआ है, विश्वविद्यालय स्तर पर उन छात्रों के संबंधित संस्थानों को 8 मार्च तक का समय दिया गया है। इन निलंबित छात्रों को एकेटीयू 27 फरवरी से 8 मार्च तक मौका देगा। इस दौरान कॉलेजों को अपने संसथान के निलंबित छात्रों के दस्तावेजोंं का सत्यापन करवाना होगा। जिन छात्रों के दस्तावेजों को संस्थान द्वारा दी गई समय सीमा के अंदर सत्यापित करवा लिया जाएगा, उनके यहां के छात्रों का निलंबन बहाल कर दिया जाएगा और उन पर चल रही निलंबन की कार्यवाही खुद ही समाप्त हो जाएगी। इसके बाद में शेष निलंबित पंजीकृत छात्रों के एनरोलमेंट को रद्द कर दिया जाएगा।

फर्जीवाड़े में शामिल कॉलेजों पर होगी कार्यवाही

एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश देने वाले कॉलेजों पर विश्वविद्यालय सख्त कार्यवाही करने के मूड में है। विश्वविद्यालय स्तर पर संबंधित संस्था्न की सीटों में कटौती और यूनिवर्सिटी द्वारा दोषी संसथान की संबद्धता समाप्त किए जाने का भी निर्णय लिया जा सकता है। गौरतलब है कि पूर्व में भी समाज कल्याण द्वारा दी जाने वाली छात्र प्रतिपूर्ति की धनराशि को गबन करने के लिए कई कॉलेजों द्वारा फ़र्ज़ी प्रवेश भी दिए गए थे। जिसके बाद भी विश्वविद्यालय स्तर पर बड़ी कार्यवाही के कदम उठाए गए थे।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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