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ये हैं लखनऊ के 5 ऐसे कॉलेज, जिन्‍होंने एजुकेशन को बना दिया है ‘धंधा’

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 18 July 2018 11:08 AM GMT

ये हैं लखनऊ के 5 ऐसे कॉलेज, जिन्‍होंने एजुकेशन को बना दिया है ‘धंधा’
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लखनऊ: अभी तक हमने आपको अपनी मिशन एडमिशन सीरीज में ये बताया कि कहां एडमिशन लेना चाहिए। लेकिन अब हम आपको राजधानी के कुछ ऐसे स्‍कूलों के बारे में बता रहे, जहां एडमिशन लेने से बचना चाहिए। इन्‍होंने एजूकेशन को धंधा बना दिया है। यही कारण है कि इन स्‍कूलों को मान्‍यता देने वाले यूपी बोर्ड ने भी इन्‍हें अपने दागी कालेजों की लिस्‍ट में शामिल कर लिया है।

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दयानंद इंटर कालेज, इंदिरानगर

दयानंद इंटर कालेज को देश की सर्वोच्च परीक्षा कराने वाले संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने अपनी सूची में डिबार कर रखा है। यूपीएससी का मानना है कि इस स्कूल में परीक्षा कराने से परीक्षा की शुचिता पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसके बावजूद इसे पिछले वर्ष बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केंद्र बनाया गया। इसके बाद यहां पर नकल होने की चर्चाएं आम रहीं।

इस बार भी इस स्कूल ने परीक्षा केंद्र बनने के लिए आवेदन किया था। जिसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबुओं को इस स्कूल की भौतिक स्थिति का जायजा लेकर रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजनी थी। सूत्रों के अनुसार आलम यह था कि जिस परीक्षा केंद्र को यूपीएससी अपनी परीक्षा के लिए उचित नहीं मानता, उस कालेज को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबू साठगांठ करके इस बार केंद्र बनाने पर आमादा थे। लेकिन सख्‍ती के चलते इस बार इस स्‍कूल के प्रबंधन की एक नहीं चली।

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एसबीएन इंटर कालेज, नरपतखेड़ा

इस कालेज को नकल माफियाओं का सुरक्षित गढ़ माना जाता है। इसके परीक्षा कक्षों की खिड़कियां बाहरी रोड पर खुलती हैं। इसके चलते परीक्षा देने वाले कैंडीडेट्स को बाहर से मदद पहुंचा दी जाती है। इसके चलते यूपीएससी ने इस स्कूल को भी अपनी सारी परीक्षाओं के लिए बैन कर दिया, लेकिन डीआईओएस कार्यालय इस कालेज को यथा संभव परीक्षा का केंद्र बना ही देता है।

आवासीय पब्लिक इंटर कालेज, रायबरेली रोड

इसे 18 जून 2017 की यूपीएससी परीक्षा में दागी करार दिया गया है। यहां प्रश्नपत्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे स्टाफ के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मोबाइल फोन बरामद हुआ था। कक्ष परीक्षक के पास पहचान पत्र भी नहीं था। कुछ लोग शिक्षक के तौर पर डयूटी करते मिले थे, जो वास्तव में जुगाड़ से बाहर से लाए गए बेरोजगार लोग थे। सचल दस्ते ने कई को संदिग्ध मानकर डयूटी करने से रोका था।

कई परीक्षकों को उनके लापरवाह रवैये को लेकर टोका भी गया था। इसके साथ ही यहां पर शौचालय, पेयजल और सुरक्षा मानकों सहित जनसुविधाओं का टोटा रहता है। इस कालेज की कमियों का तोड़ निकाल कर इसे किसी न किसी परीक्षा का आए दिन केंद्र बना दिया जाता है।

प्रियदर्शनी इंटर कालेज, साउथ सिटी

यह स्कूल मुख्य सडक़ मार्ग से काफी अंदर संचालित हो रहा है। यहां भी सुविधाओं का टोटा है। मानक के हिसाब से कई कमियां हैं। इसे सेंटर बनाए जाने पर संघ लोक सेवा आयोग,एसएससी समेत कई आयोग सवाल उठा चुके हैं। डीआईओएस कार्यालय के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शिक्षा विभाग के उच्च पद से सेवानिवृत्त एक अधिकारी के इशारे पर इसे परीक्षा केंद्रों की सूची में येन केन प्रकारेण शामिल कर लिया जाता है।

एस आर मेमोरियल इंटर कालेज

यह स्कूल मुख्य मार्ग से बहुत अंदर है। एक टूटी फूटी सडक़ इसे मुख्य मार्ग से जोड़ती है। सचल दस्ते के अधिकारियों को इस स्कूल को ढूंढने में ही बहुत परेशानी होती है। अगर कहीं बारिश हो जाए तो पैदल ही मुख्य मार्ग से इस स्कूल तक पहुंचा जा सकता है। यहाँ मानकों की कमी है। यहाँ पर शौचालय, पेयजल, फर्नीचर आदि जनसुविधाओं का भी टोटा है। यूपीएससी ने इसे भी अपनी परीक्षाओं के लिए उपयुक्त नहीं माना है। यूपी बोर्ड ने इसे अपने दागी कालेजों की सूची में बहुत दबाव के बाद शामिल किया है।

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