मीटिंग में आत्मविश्वास से रखें अपनी बात, इन बिंदुओं का रखें खास ध्यान

 

एक वक्त था जब मीटिंग समस्याओं पर बात करने और उनका हल निकालने के लिए रखी जाती थी। मीटिंग आज भी उसी मकसद से रखी जाती है, लेकिन थोड़े बदलाव के साथ। अब मीटिंग में क्विक सलूशन की डिमांड की जाती है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अगर आपको एक कुशल इम्प्लाई बने रहना है तो मीटिंग के दौरान इन बातों का ध्यान रखना होगा। कहते हैं कि अगर अपने विचारों को आत्मविश्वास के साथ रखा जाए तो न सिर्फ उन्हें सुना जाता है बल्कि उसे अमल में भी लाया जाता है।

इसलिए मीटिंग में पूरी तैयारी के साथ जाएं और पूर्ण आत्मविश्वास से अपनी बात रखें। अगर मीटिंग पिछली किसी मीटिंग से जुड़ी है तो पहले के नोट्स ले जाना न भूलें। मुद्दे के हर बिंदु पर गौर करें और उसके बारे में अच्छी तरह से नोट्स तैयार करें। इससे आप बेहतर ढंग से बोल सकेंगे। याद रखिए कि फैक्ट्स और फिगर्स सबको आकर्षित करते हैं।ऑई कांटेक्ट बनाना जरूरी

मीटिंग में बोलते हुए या प्रेजेंटेशन देते समय कोशिश करें कि सबसे ऑई कंाटेक्ट हो। आप सबकी तरफ बराबर ध्यान दें और अपनी बात रखें। यह संचार का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। अगर सिर्फ आपको ही प्रेजेंटेशन देना है तो बैठकर न दें। इससे कम्युनिकेशन गैप आ सकता है। खड़े होकर ऑई कांटेक्ट करने से आप बिना झिझक अपनी बात कह पाते हैं। इससे बॉस आपको नोटिस करता है और भविष्य में कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है।हमेशा प्रैक्टिस करें

अगर आपको पता है कि आप मीटिंग में बोलने वाले हैं तो आपको अभ्यास करना चाहिए। लगातार प्रैक्टिस करने से आप संवाद में परफेक्ट बन सकते हैं। बोलते समय सामने कोई शीशा रख लें और खुद को जज करें। अगर किसी कलीग से अच्छी दोस्ती है और वो विश्वस्त हो तो आप उसका फीडबैक ले सकते हैं। कहां रुकना है, कहां टोन बदलना है, यह बात मीटिंग से पहले ही समझ में आ जाए तो आप एक बेहतर प्रेजेंटर बन सकते हैं। एक समस्या पर कई सुझाव देना बेहतर

अगर मीटिंग में किसी समस्या पर बात होनी है और आपसे सुझाव मांगा जाए तो एक समस्या पर कम से कम दो सुझाव जरूर रखें। ऐसे बात करें कि यह महसूस हो कि आप संस्थान के प्रति जिम्मेदार हैं और हर एक पहलू पर गौर करते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका लीडर आपसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएगा।बेवजह तनाव न पालें

कई बार अकेले मीटिंग में बोलने की वजह से आप बेवजह तनाव पाल लेते हैं। ऐसा न करें। आत्मविश्वास को कम करने वाले विचारों और लोगों से बचकर रहें। अगर आपको भरोसा है कि आप कॉन्फिडेंट हैं तो आप बोलते समय भी आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करेंगे। जब भी समय मिले अपनी बॉडी लैंग्वेज पर काम करें। तनावमुक्त रहने के लिए योग और प्राणायाम भी कर सकते हैं।