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IIT कानपुर: दलित प्रोफ़ेसर उत्पीड़न मामले में कार्रवाई के खिलाफ लामबंद हुए प्रोफ़ेसर

Manali Rastogi

Manali RastogiBy Manali Rastogi

Published on 21 Oct 2018 4:38 AM GMT

IIT कानपुर: दलित प्रोफ़ेसर उत्पीड़न मामले में कार्रवाई के खिलाफ लामबंद हुए प्रोफ़ेसर
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कानपुर: कानपुर आईआईटी में एयरो स्पेस विभाग के असिस्टेंस प्रोफ़ेसर ने चार वरिष्ट प्रोफेसरों पर दलित उत्पीडन का आरोप लगाया था। इस में कार्यवाई करते हुए बीओजी ने तीन प्रोफेसरों को डिमोट और एक प्रोफ़ेसर को चेतावनी देकर छोड़ दिया है। इस कार्यवाई के खिलाफ बीते शनिवार को आईआईटी कानपुर के प्रोफेसरों ने गोपनीय बठक कर रणनीति तैयार की है। बीओजी की इस कार्यवाई के खिलाफ प्रोफ़ेसर दो भागो में बट गए है। प्रोफेसरों एक जुटता किसी बड़े आन्दोलन का रूप ले सकती है।

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आईआईटी कानपुर के प्रोफ़ेसर बीओजी के फैसले पर नाराजगी जतायी है बल्कि फैसले को षड्यंत्र के तहत की गयी कार्यवाई बताया है। प्रोफेसरों का कहना है कि जब सभी चारो वरिष्ट प्रोफ़ेसर किसी न किसी संसथान के निदेशक पर पहुँचने वाले थे तभी उन पर इस तरह की कार्यवाई की गयी है। इसके खिलाफ एक बड़ा आन्दोलन भी खड़ा हो सकता है या फिर चारो प्रोफ़ेसर इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण भी ले सकते है।

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वही दूसरी तरफ पीड़ित प्रोफ़ेसर डॉ सुब्रमण्यम सडरेला नेशनल कमीशन फॉर सेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) कमिटी के इशारे का इन्तजार कर रहे है। यदि कमिटी उनको ऍफ़आईआर कराने का आदेश देती हो तो वो चारो प्रोफेसरों के खिलाफ ऍफ़आईआर कराने के लिए तैयार है।

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स्पेस विभाग के चार प्रोफ़ेसर डॉ राजीव शेखर जो आईआईटी धनबाद के निदेशक है ,डॉ संजय मित्तल ,डॉ ईशान शर्मा,डॉ सीएस उपाध्यक्ष पर दलित उत्पीडन का आरोप लगा था। चारो पर प्रोफेसरों पर नेशनल कमीशन फॉर सेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) ने आईआईटी कानपुर को आदेश दिया था की इन चारो प्रोफेसरों को संस्पेंड कर ऍफ़आईआर दर्ज की जाये। इस फैसले के खिलाफ प्रोफ़ेसरो ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसमे उन्हें स्टे मिल गया है जिसमे कोर्ट ने सस्पेंड ,ऍफ़आईआर समेत किसी भी कार्यवाई पर रोक लगा दी है । इसके साथ ही आन्तरिक कमिटी बनाने का आदेश किया था।

कानपुर आईआईटी में दलित प्रोफ़ेसर के साथ उत्पीडन का मामला 9 मार्च 2018 को मिडिया के संज्ञान में आया था। इसके बाद आईआईटी के निदेशक ने एकेटीयू के कुलपति विनय कुमार पाठक की अगुवाई में तीन सदस्यी टीम का गठन किया था। जाँच कमिटी ने अपनी रिपोर्ट आईआईटी निदेशक मनिन्द्र अग्रवाल को सौप दी थी और बीते 19 मार्च को बीओजी की बैठक में इस रिपोर्ट को रखा गया था।

बैठक में सभी बिन्दुओ पर विस्तार से चर्चा की गई थी। बीओजी के चेयरपर्सन आर सी भार्गव ने बात चीत कर दोनों पक्षों में सुलह कराने की बात कही थी लेकिन एक हफ्ते बाद भी दोनों पक्षों में कोई बात नही बनी। जब इसकी जानकारी एससी आयोग को हुई तो उसने नोटिस भेजा था।

एनसीएससी ने बीते 10 अप्रैल 2018 को आईआईटी के कार्यवाहक निदेशक मनिन्द्र अग्रवाल व् एरोस्पेस के एचओडी प्रोफ़ेसर एके घोस नेशनल कमीशन फॉर सेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) कमिटी के समक्ष पेश हुए थे। इस पूरे मामले में एनसीएससी आयोग के सदस्यों ने कार्यवाई नही होने पर नाराजगी जाहिर की थी। आयोग ने चारो प्रोफेसरों को सस्पेंड कर ऍफ़आईआर दर्ज करने का आदेश सुनाया था।

एयरो स्पेस विभाग के असिस्टेंस प्रोफ़ेसर डॉ सुब्रमण्यम सडरेला ने जनवरी 2018 में ज्वाइन किया था। इसी दौरान जनवरी लास्ट में विभाग के चार वरिष्ट प्रोफेसरों ने डॉ सुब्रमण्यम पर जाती सूचक टिपण्णी की थी। इसके साथ ही उनका आय्दीन मजाक उड़ाया जाने लगा। काफी दिनों तक यह सहने के बाद डॉ सुब्रमण्यम ने इसकी शिकायत आईआईके निदेशक से की थी।

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