चुनावी आंकड़े

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारतीय राजनीति पर हावी रहने वाले मोदी एक्ज़िट पोल्स में 5 साल और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व कर सकते हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को एग्जिट पोल के पूर्वानुमानों को नकारते हुए कहा, ‘‘ हमें एग्जिट पोल रिपोर्ट की चिंता करने की जरूरत नहीं है, जो अधिकतर मामलों में ठीक नहीं होते।’’

बनर्जी ने ट्वीट किया, “मैं एक्जिट पोल के कयासों पर भरोसा नहीं करती। यह रणनीति अटकलबाजी के जरिए हजारों ईवीएम को बदलने या उनमें हेरफेर करने के लिए प्रयुक्त होती है। मैं सभी विपक्षी पार्टियों से एकजुट, मजबूत और साहसी रहने की अपील करती हूं।”

वाराणसी पिछले दो लोकसभा चुनाव से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की झोली में है । 1991 में पहली बार भाजपा के शिरीषचंद्र दीक्षित 41 फीसदी मतों के साथ यहां से जीते थे। उसके बाद अगले तीन आम चुनाव में भी भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल बड़े अंतर से जीते।

राज्य के सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी हरबंस लाल धीमान ने पीटीआई..भाषा को बताया कि ताशिगांग मतदान केन्द्र समुद्र तल से 15,256 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

इस चरण में 10.01 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे और वे 918 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत का फैसला करेंगे। निर्वाचन आयोग ने मतदान सुगम तरीके से संपन्न कराने के लिए 1.12 लाख मतदान केंद्र बनाए हैं।

लोकसभा चुनाव अपने अंतिम चरण में है। इसके साथ ही 23 मई के संभावित नतीजों को लेकर अभी से राजनीतिक दलों जोड़-तोड़ की रणनीति पर काम भी शुरू कर दिया है। कांग्रेस की ओर से हाल ही में यह संकेत दिए गए कि यदि उसे गठबंधन में पीएम का पद नहीं मिलता है, तब भी उसे कोई समस्या नहीं होगी।

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। इस मौके पर उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  मौजूद है।

डा0 पाण्डेय ने कहा कि 2014 से पहले देश में विकास की जगह अखबारों की सुर्खियां भ्रष्टाचार व मंहगाई बनती थी। 2014 के बाद जब से हमारी सरकार आई है, तब से विकास के मामले में देश आगे बढ़ रहा है। आज मोदी की वजह से देश की अर्थ व्यवस्था भी काफी मजबूत हुई है।

भारतीय जनता पार्टी ने भरत सिंह का टिकट काट वीरेंद्र सिंह मस्त को मैदान मैं उतारकर अपनी मजबूती दर्ज कराई है । तो वही सपा बसपा गठबंधन में मजबूत प्रत्याशी की तलाश में नामांकन से ठीक एक दिन पहले जातिगत समीकरण को देखते हुए।