गौतम बुद्ध नगर सांसद का रिपोर्ट कार्ड: विकास तो हुआ मगर बहुत कुछ बाकी

दीपांकर जैन

नोएडा: दिल्ली और हरियाणा की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र की पहचान में नोएडा और ग्रेटर नोएडा की मौजूदगी चार चांद लगाती है। ये दोनों औद्योगिक महानगर नकेवल देश बल्कि वैश्विक स्तर पर ठोस पहचान बना चुके हैं। औद्योगिक महानगरों से इतर इस इलाके की पहचान बेहतरीन खेती के इलाके के रूप में भी है। दो नदियों हिंडन और यमुना के बीच बसे इलाके की अधिकांश जमीन बेहद उपजाऊ है। अलबत्ता खेती के मुकाबले औद्योगिक क्रांति के चलते शहरों की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है। खुर्जा के अरनिया ब्लाक में 1201 एकड़ भूमि पर करीब 11 हजार करोड़ रुपए की लागत से 1320 मेगावाट क्षमता की विद्युत परियोजना समूचे इलाके के विकास में अहम भूमिका निभाएगी। जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की मंजूरी मिलने के बाद से इलाके में संपर्क मार्गों समेत विकासीय परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। दिल्ली के बाहर एनसीआर में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मेट्रो का सबसे बड़ा नेटवर्क है।

खास बातें

1. 2008 में परिसीमन के बाद यह लोकसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था। उससे पहले यह खुर्जा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा रहा है।

2. 2009 में पहली बार हुए चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में सुरेंद्र सिंह नागर सांसद बने थे। कांटे के मुकाबले में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी डॉ.महेश शर्मा को हराया था।

3. 2014 के लोकसभा में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी रमेश चंद तोमर भाजपा के पक्ष में बैठ गए थे। उसके बावजूद कांग्रेस को करीब 12227 मत मिले थे।

4. बसपा प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का गांव बादलपुर इसी लोकसभा क्षेत्र में है।

5. यहां से दो नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे निकलते हैं।

6. इतिहास में यह क्षेत्र रामायण काल से जुड़ा है। रावण के पिता विसेस्व ऋषि का जन्म बिसरख में हुआ था। बिसरख को रावण की जन्मस्थली माना जाता है।

7. द्वापर युग महाभारत काल में यहां पर द्रोणाचार्य का आश्रम था। द्रोणाचार्य के शिष्य एकलव्य इसी क्षेत्र के थे।

8. स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान ग्राम नलगढ़ा में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु छिपे थे। उन्होंने यहीं रहकर विधानसभा में बम विस्फोट की योजना बनाई थी।

क्या रही शिकायतें

1- सेक्टरों एव कस्बों तक ही जनसंपर्क रहा। ग्रामीण इलाके उपेक्षित रहे।

2- किसानों की जमीन के मसले जैसे लीजबैक, आबादी निस्तारण, 10 फीसद भूखंड आवंटित नहीं हुए।

3- प्राधिकरणों के कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी।

4- सैमसंग समेत बड़ी कंपनियों ने नौकरी को लेकर स्थानीय युवाओं की उपेक्षा की।

वादे जो किए

विकास को लेकर इलाके को नई पहचान देना।

जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण।

दादरी रेलवे लाइन पर ऊपरगामी पुल का निर्माण।

इलाके में लगने वाली कंपनियों में स्थानीय युवाओंं की नौकरी।

वादे जो पूरे न हुए

गोद लिए नीमका गांव में वाईफाई, गोबर गैस संयंत्र, कन्या इंटर कॉलेज।

किसानों की आबादी निस्तारण समेत मुआवजे की समस्या।

जेवर हवाई अड्डे का निर्माण कार्य।

विकास के साथ समस्याएं भी

नोएडा, ग्रेटर नोएडा के विश्वस्तरीय शहर और दादरी, सिकंदराबाद व खुर्जा के कस्बाई क्षेत्र समेत यहां के गांव इलाके को मिश्रित पहचान देते हैं। कस्बों में रहने वाली बड़ी आबादी के लिए कानून व्यवस्था, सुचारु बिजली आपूर्ति, जल-सीवर और रोजगार की प्राथमिकता है। वहीं गांवों में रहने वाले अभी भी सुलभ और सस्ता इलाज व शिक्षा संबंधी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांवों के निवासी अभी भी बिजली, जलापूर्ति, नालियों, खडज़े, स्कूल शिक्षा को उपलब्ध कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं, देश के अलग-अलग इलाकों से आने वालों को रोजगार और कारोबार की शरणस्थली के रूप में अपनी विश्व मानचित्र पर अलग पहचान बनाई है।

नोएडा जहां देश के अच्छे औद्योगिक इलाकों में शुमार है। वहीं ग्रेटर नोएडा की पहचान बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उच्च शिक्षण संस्थाओं की बनी है। ग्रेटर नोएडा से जेवर आगरा की तरफ जाने वाले एक्सप्रेस वे के किनारे यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र है। भले ही जमीनी स्तर पर यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की योजनाएं अभी तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रही हैं, लेकिन जेवर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक प्राधिकरण के रूप में इसे पहचान जरूर मिल चुकी है।

सांसद के दावे

सांसद डॉ. महेश शर्मा बताते हैं कि इलाके में पहले भी सांसद रहे हैं। उनके कार्यकाल में हुए कार्यों बनाम पिछले सांसदों का कार्यकाल खुद ही अंतर बताने के लिए पर्याप्त है। मैंने देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जेवर में बनाने का वादा क्षेत्र की जनता से किया था जिसे साकार कर दिया गया है। परियोजना को लेकर जरूरी तकरीबन सभी अनुमति मिल चुकी हैं। प्रभावित किसानों की मुआवजे की समस्या का समाधान हो चुका है। विकास का विरोध करने वाले कुछ लोग किसानों को जरूर बरगला रहे हैं। यह समस्या भी आने वाले दिनों में दूर हो जाएगी क्योंकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के चारों तरफ 100 किलोमीटर क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा। साथ ही एक लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सेक्टर-94 में 24 एकड़ जमीन पर नोएडा हैबिटेट सेंटर की योजना शुरू कराई जिससे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मानचित्र पर स्थान मिला है।

समूचे इलाके में 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए करीब 11 हजार करोड़ रुपए की लागत से बिजली परियोजना तैयार हो रही है। दिल्ली और शहर को जोडऩे वाले नोएडा प्रवेश द्वार को जाम मुक्त करने के लिए शाहदरा नाले के पुश्ते पर 650 करोड़ रुपए की लागत से ऊपरगामी मार्ग बनाने को मंजूरी दिलाई है। 5.5 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। डा.शर्मा ने कहा कि सेक्टर-38ए में 164 एकड़ में बने बॉटैनिक गार्डन में 400 करोड़ रुपए की लागत से जीन बैंक, हरबेरियम इकाई, आर्किड हाउस व नर्सरी की सुविधाएं संचालित कराई हैं।

सांसद ने कहा कि सेक्टर-62 में 98 करोड़ रुपए की लागत से केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का भारतीय पाक कला संस्थान शुरू कराया गया है। इसी सेक्टर में 110 करोड़ रुपए की लागत से केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान का निर्माण कराया जा रहा है। ये दोनों परियोजनाएं इलाके की पहचान में नई कड़ी जोड़ेंगी। ग्रेटर नोएडा में 25एकड़ भूमि पर 289 करोड़ रुपए की लागत से पंडित दीन दयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान तैयार किया गया है जो देश भर से पुरातत्व के क्षेत्र में शोध या पढ़ाई करने वालों के लिए अनूठा केंद्र साबित होगा। पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत बुलंदशहर के लिए 435 करोड़ एवं गौतम बुद्ध नगर के लिए 287 करोड़ रुपए की लागत से कार्य पूर्ण कराया। सांसद ने दावा किया कि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम से गौतम बुद्ध नगर लोकसत्रा क्षेत्र में कुल 308 करोड़ रुपए का निवेश स्वीकृत कराया।

आदर्श गांव में तब्दील हुआ नीमका

डॉ. महेश शर्मा ने सांसद के रूप में नीमका गांव को गोद लिया है। जेवर इलाके में पडऩे वाला यह गांव पहले पूरी तरह से उपेक्षित था। इसी वजह से इस गांव को उन्होंने चुना था। आज स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। यह गांव वर्तमान में पूरी तरह से विकास की नई लाइन लिख रहा है। गांव में सडक़, बिजली की दिक्कतें पूरी तरह से दूर हो चुकी हैं। टंकी से पानी की आपूर्ति हो रही है। ग्रामवासियों के स्वास्थ्य, शिक्षा संबंधी दिक्कतों का समाधान किया गया है। वैसे यहां रहने वाले तेजवीर विकास के इस दावे को पूरी तरह से मानने को तैयार नहीं है। वे मानते हैं कि सडक़ और बिजली को लेकर सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इसका श्रेय सांसद को नहीं दिया जा सकता। सरकारी योजनाओं के चलते भी काफी सुधार हुआ है। जलापूर्ति करने वाली टंकी का निर्माण अखिलेश सरकार के कार्यकाल में हुआ था। गांव में वाईफाई, गोबर गैस संयंत्र और कन्या इंटर कॉलेज खोलने के वादे पूरे नहीं हुए हैं।