मोदी लहर के बावजूद रायबरेली की जनता ने सोनिया पर जताया भरोसा

पूरे देश में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत का असर रायबरेली सीट पर नहीं पड़ा यहाँ प्रियंका गांधी का जादू चल गया।
प्रियंका गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में जमकर मेहनत की और इसका परिणाम ये रहा कि सोनिया को यहाँ से जीत मिली।

रायबरेली : रायबरेली में यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने निकटतम प्रतिद्विंदी भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह को कड़े मुकाबले में हरा दिया। भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह ने सोनिया गांधी को कड़ी टक्कर जरूर दी लेकिन वो जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रहे।

पहले ही चक्र से सोनिया गांधी ने जो बढ़त बनाई वो अंत तक बनी रही।

पूरे देश में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत का असर रायबरेली सीट पर नहीं पड़ा यहाँ प्रियंका गांधी का जादू चल गया।
प्रियंका गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में जमकर मेहनत की और इसका परिणाम ये रहा कि सोनिया को यहाँ से जीत मिली।

दरअसल यहाँ पर पहले आम चुनाव से ही कांग्रेस का दबदबा रहा है। यहाँ से नेहरू – गांधी परिवार को ही जीत मिली है। 1977 में जनता पार्टी के राजनारायण और 1996,1998 में भाजपा के अशोक सिंह की कांग्रेस का अभेध किला फतह कर पाए थे। इस बार के चुनाव में भाजपा के दिनेश सिंह ने सोनिया को कड़ी चुनौती दी थी लेकिन प्रियंका के जादू के जादू के आगे वो टिक नहीं पाए। कभी कांग्रेस पार्टी में रहे दिनेश सिंह सोनिया और राहुल का गुणगान करते नहीं थकते थे लेकिन एक साल पहले ही उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

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भाजपा का दामन थामते ही दिनेश कांग्रेस पर हमलावर हो गए। भाजपा ने उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें टिकट दे दिया। टिकट मिलने के बाद दिनेश प्रताप सिंह ने सोनिया, राहुल और प्रियंका पर जमकर प्रहार करते रहे लेकिन प्रियंका गांधी ने रायबरेली में डाल दिया और अपनी मां के पक्ष में प्रचार शुरू कर दिया। रायबरेली में सोनिया की जीत में जनता के भावनात्मक जुड़ाव ने अहम् भूमिका निभाई। रायबरेली की जनता अभी भी गांधी नेहरू परिवार से भावनात्मक रूप से जुडी है ऐसे में किसी और पार्टी पर भरोसा नहीं कर पा रही है।

1977 में रायबरेली की जनता ने इंदिरा गांधी को हरा दिया था लेकिन तीन साल में ही जनता को अपनी अहसास हुआ और 1980 के चुनाव में इंदिरा गांधी को जीत से नवाज़ा था। 1977 की हार से इंदिरा गांधी एंटी नाराज़ थी कि 1980 के चुनाव में इंदिरा ने रायबरेली और मेंढक सीट से पर्चा भरा था। इंदिरा गांधी दोनों सीट से जीती लेकिन 1977 की हार से नाराज़ इंदिरा गांधी ने रायबरेली सीट छोड़ दी थी।

उसके बाद से रायबरेली सीट पर गांधी परिवार के करीबी चुनाव जीतते रहे लेकिन उन्होंने रायबरेली के विकास के लिए कोई बेहतर काम नहीं किया। अरुण नेहरू , शीला कौल और सतीश शर्मा सिर्फ कांग्रेस की चरण वंदना में लगे रहे लेकिन रायबरेली की जनता से भावनात्मक रिश्ते कायम नहीं रख पाए। अरुण नेहरू ने तो 1999 के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर रायबरेली से चुनाव लड़ा था और हार गयी थे।

2004 में जब सोनिया गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ने का फैसला किया तो रायबरेली जनता ने उन्हे सिर आंखों पर बिठाया क्यूंकि सोनिया गांधी ने यहां की जनता से एक भावनात्मक रिश्ता कायम कर लिया था। देश भर में 2004 में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री के पद का त्याग करने के बाद सोनिया की छवि और भी बेहतर हो गई। 2006 में ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट के मुद्दे पर त्यागपत्र देकर दुबार चुनाव लड़ा और फिर प्रचंड जीत हासिल हुई। इसके बाद सोनिया ने रायबरेली के विकास के लिए बहुत काम किया। रायबरेली को एजुकेशन हब बना दिया और यहाँ कई विकास के प्रोजेक्ट स्थापित किये जिसमे रेल कोच फैक्ट्री,एम्स प्रमुख रहे।

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रायबरेली से बीजेपी के प्रत्याशी एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह का बयान सबसे पहले देशवासियों को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने एक बार फिर मोदी पर भरोसा जताया है। इनका जो नारा था अबकी बार पांच लाख के पार उस हिसाब से मैं अपने को जीता मान रहा हूँ। रायबरेली की जनता ने मुझ किसान के बेटे को इतना वोट दिया।सोनिया गांधी को मैं जीत की बधाई देता हूँ। वो हमारी सांसद है और रहेंगी। भगवान उनको दीर्घायु दे।