लोकसभा चुनाव 2019: मुस्लिमों को लुभाने में नाकाम साबित हो रही है बीजेपी

जहां एक तरफ काँग्रेस बीजेपी से उसके सवर्ण और पिछड़े वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिशों में लगी हुई है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी काँग्रेस से उसके मुस्लिम वोटरों को छीनने की फिराक में है, लेकिन जब हमने इस मुद्दे को उठाकर इसकी सत्यता जानने की कोशिश की तो हमें लोगों की राय ने हिला कर रख दिया।

(शाश्वत मिश्रा)

लखनऊ: चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 का जबसे ऐलान किया गया है, सभी पार्टियां अपने अपने वोटरों को लुभाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही हैं। रोजाना नए-नए तरीके के आरोप प्रत्यारोप सिलसिलेवार तरीके से देश की दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टी बीजेपी और काँग्रेस के बीच में देखने को मिलता है।

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दोनों पार्टियां एक दूसरे के वोटरों को खींचने में अपना पूरा ध्यान लगाए हुए हैं, जहां एक तरफ काँग्रेस बीजेपी से उसके सवर्ण और पिछड़े वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिशों में लगी हुई है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी काँग्रेस से उसके मुस्लिम वोटरों को छीनने की फिराक में है, लेकिन जब हमने इस मुद्दे को उठाकर इसकी सत्यता जानने की कोशिश की तो हमें लोगों की राय ने हिला कर रख दिया। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में जीत दर्ज कर ये साबित करने की कोशिश की, कि उसके साथ देश के मुसलमान खड़े हैं और आंकड़े भी कुछ यही कहते हैं, बीजेपी ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव में देवबंद जैसी सीट अपने नाम की जहां पर 90 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं।

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ट्रिपल तलाक का मुद्दा रहा अहम वजह

बीजेपी ने ट्रिपल तलाक मुद्दे पर राजनीतिक फायदा उठाने के साथ मुस्लिम परिवारों में अपनी पार्टी को खड़ा करने का काम किया है, इस मुद्दे के जरिये बीजेपी ने मुस्लिम महिलाओं को अपने पक्ष में करने का काम किया है। इससे पहले बीजेपी को देश के मुसलमानों का वोट नहीं मिलता था लेकिन आज के समय में इस मुद्दे के जरिये उसे कुछ वोट मिल रहे है, जिससे उसे कुछ हद तक फायदा जरूर पहुचा है और इस फायदे का असर हमें उत्तर प्रदेश के चुनाव में देखने को मिला है, जहां बीजेपी ने एक बड़ी जीत हासिल कर बहुमत पाया था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और बीजेपी की लोकसभा की राह आसान नहीं होगी।

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लखनऊ के मुसलमानों को न मोदी पसंद, न उनकी योजनाएं

लोकसभा चुनाव को देखते हुए जब न्यूज़ट्रैक.कॉम की टीम ने राजधानी के मुसलमानों का हाल जानने की कोशिश की, और उनसे यह पूछा कि लोकसभा चुनाव में वह किसके साथ खड़े हैं, तो उनके जवाबों ने बीजेपी की चिंता बढ़ाने के साथ ही उसके लिए एक सोचनीय मुद्दा भी खड़ा कर दिया है-
लालबाग में चाय बेचने वाले मो. शादाब कहते हैं कि पिछले पाँच सालों में मोदीजी ने सिर्फ जुमलेबाजी की है, देश का कोई विकास नहीं किया है, उन्होने 15 लाख देने का वादा किया था लेकिन किसी को 15 रुपये तक नहीं दिये, इसलिए वो 2019 के चुनाव में हारने वाले हैं, उनकी सारी योजनाओं ने लोगों को नुकसान पहुचाया है,चाहे वह जीएसटी हो या उज्ज्वला योजना।

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तो वहीं एक बैटरी रिक्शा चालक सिराज बताते हैं, कि मोदी जी के आने के बाद से उन्हे नोटबंदी से लेकर अभी तक तरह तरह के नुकसान का सामना करना पड़ा है इनका यह भी कहना है कि वो मोदी को वोट नहीं देंगे क्योंकि प्रधानमंत्री कि वजह से ही इनका रोजगार छिन गया है सिराज बताते हैं कि आज लखनऊ में बैटरी रिक्शा चालकों कि हालत बहुत खराब है, महंगाई भी बहुत बढ़ गयी है। खाने पीने वाली चीजों पर महंगाई के दामों ने उछाल भर दी है जिससे हम जैसे गरीबों को दिक्कत हो रही है।

हमें कुछ मुसलमान चौक, क़ैसरबाग और खदरा में ऐसे भी मिले, जिनके अंदर बीजेपी के लिए इतना गुस्सा है कि वह उनका नाम सुनते ही अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगते हैं। ऐसे में जो निष्कर्ष निकल कर आ रहा ​​​है वो यह है कि भाजपा मुस्लिम वोटरों को अपनी ओर खींचन में नाकाम रही है जो कि बीजेपी के लिए काफी गलत साबित हो सकता है।