चुनावी भाषण

उन्होंने कहा कि मतदाता अब प्रतिद्वन्द्वियों के गठबंधन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। जेटली ने कहा कि जाति आधारित गठबंधन अब मान्य नहीं है और अब लोग फर्जी मुद्दे पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

लुगुदेशम पार्टी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा शनिवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात किये जाने के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पिटे हुए मोहरे हैं।

रविवार को अखिलेश यादव बीते गुरुवार को जम्मू कश्मीर के शोपियां में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुए रोहित यादव के परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा उनके परिवार के साथ खड़ी है ।

अखिलेश यादव ने कहा कि यदि चुनाव आयोग द्वारा गोरखपुर में मुख्यमंत्री व उनके मंत्रियों तथा जिला पुलिस प्रशासन की इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक न लगाई गई तो 19 मई को निष्पक्ष मतदान सम्भव नही होगा।

नरेश अग्रवाल ने कहाकि देश में भारतीय जनता पार्टी फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी। साथ ही हरदोई की भी दोनों सीटें भाजपा जीतेगी। उन्होंने कहाकि जो चुनावी विश्लेषण करते हैं उनसे कह दूं कि 23 मई को उन्हें करारा झटका लगेगा क्योंकि पीएम पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे।

बता दें कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं ओमप्रकाश राजभर अभी यूपी सरकार में मंत्री भी हैं। फिलहाल राजभर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन अभी इस संबंध में यूपी सरकार की ओर से कोई कार्यवाही सामने नहीं आई है।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महिला मोर्चा की कार्यकत्रियों के साथ बैठक किया जहां उन्होंने महिलाओं को बीजेपी के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील भी की।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव बाद गठबंधन की संभावना की ओर संकेत देते हुए शुक्रवार को उम्मीद जताई कि मायावती और अखिलेश यादव भाजपा के साथ नहीं जाएंगे।

बता दें कि इससे पहले भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। विवाद बढ़ता देख उन्होंने यूटर्न लिया और बाद में बयान पर माफी मांग ली। लेकिन पीएम ने कहा कि मैं उन्हें कभी मन से माफ नहीं कर पाउंगा।

उन्होंने कहा कि तय आप को करना असल शहीद के बेटे को चुनना है या फिल्‍मी शहीद को। क्‍योंकि वो जानती हैं कि पठानकोट में सबसे अधिक शहीद सैनिकों के परिजन रहते हैं। वैसे भी पंजाब में शहीद सैनिकों के परिजनों की संख्‍या अधिक है। अब फैसला यहां की जनता को करनी है।