Supreme Court ने राफेल पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी से स्पष्टीकरण मांगा

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निर्देश दिया कि वह ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी चोर हैं’ संबंधी अपनी टिप्पणी को राफेल मामले में अदालत के फैसले

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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निर्देश दिया कि वह ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी चोर हैं’ संबंधी अपनी टिप्पणी को राफेल मामले में अदालत के फैसले से ‘गलत तरह से’ जोड़ने पर 22 अप्रैल तक स्पष्टीकरण दें। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह गांधी के खिलाफ दाखिल आपराधिक अवमानना याचिका पर विचार करेगी।

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शीर्ष अदालत ने भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की याचिका पर निर्देश दिया जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गयी है। लेखी ने दावा किया कि राहुल गांधी ने कुछ टिप्पणियां गलत तरीके से उच्चतम न्यायालय से जोड़ दीं जो 10 अप्रैल को राफेल पर उच्चतम न्यायालय के फैसले में नहीं थीं।

अदालत ने कहा कि वह आपराधिक अवमानना याचिका पर विचार करेगी। अदालत ने यह साफ किया कि गांधी द्वारा सार्वजनिक रूप से की गयी टिप्पणियों को गलत तरीके से इस अदालत से जोड़ा गया है।

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मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 अप्रैल की तारीख तय करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि नेताओं को अपने भाषणों में किसी निष्कर्ष या विचार को अदालत से नहीं जोड़ना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश पर कांग्रेस ने कहा कि वह न्यायालय को सफाई देगी जबकि भाजपा ने कहा कि शीर्ष अदालत ने गांधी के ‘‘झूठ’’ का पर्दाफाश कर दिया है।

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष पर ‘‘राजनीतिक दुष्प्रचार’’ के लिए राफेल सौदे को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’ ‘झूठ बोलने का अधिकार’ नहीं है।

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वह लड़ाकू विमान सौदे पर अदालत के आदेश पर झूठ बोल रहे हैं।

शाह ने गुजरात में एक चुनावी रैली में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने एक प्रारंभिक तकनीकी आपत्ति पर राफेल मामले में सुनवाई की। उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला दिया और राहुल बाबा ने कहना शुरू कर दिया कि शीर्ष अदालत ने राफेल मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ।’’ नयी दिल्ली से लोकसभा सदस्य लेखी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि गांधी ने अपनी निजी टिप्पणियों को गलत तरीके से शीर्ष अदालत का बता दिया और पूर्वाग्रह पैदा करने की कोशिश की।

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लेखी की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि गांधी ने पूरी तरह अवमानना की है।

रोहतगी ने कहा कि गांधी ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि ‘उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी चोर हैं’।’

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, ‘‘आप इस बारे में ठीक हैं कि याचिका में जो बात लाई गयी है, वो हमने कभी नहीं कही। हम स्पष्टीकरण मांगेंगे।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने 10 अप्रैल को दावा किया था कि शीर्ष अदालत ने ‘‘साफ’’ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘‘ने चोरी की है।’’ उन्होंने अमेठी में नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही।

शीर्ष अदालत ने 10 अप्रैल को कहा था कि वह कुछ ‘लीक’ दस्तावेजों के आधार पर एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगी। उसने इन दस्तावेजों पर विशेषाधिकार होने संबंधी सरकार की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया।

अदालत के फैसले के बाद गांधी ने कहा था, ‘‘मैं खुश हूं। मैं इतने महीनों से कह रहा हूं कि भारत के प्रधानमंत्री ने वायु सेना का पैसा अनिल अंबानी को दे दिया और उच्चतम न्यायालय ने यह मान लिया है। उच्चतम न्यायालय इस मामले में जांच करेगा।’’

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लेखी की याचिका पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि राफेल फैसले में इस कथित अपमानजनक टिप्पणी के उल्लेख की कोई गुंजाइश नहीं थी कि ‘‘चौकीदार नरेंद्र मोदी चोर हैं।’’ इसे राहुल गांधी ने अदालत से जोड़ा है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘हम यह स्पष्ट करते हैं कि राहुल गांधी द्वारा इस न्यायालय के नाम से मीडिया और जनता में जिस राय, मत अथवा निष्कर्ष का जिक्र कथित तौर पर अपनी टिप्पणी में किया उन्हें गलत तरीके से इस न्यायालय का बताया गया है। हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि इस तरह की टिप्पणी करने का कोई अवसर नहीं था क्योंकि वह चुनिन्दा दस्तावेजों की कानूनी स्वीकार्यता के पहलू पर फैसला कर रहे थे जिन पर अटार्नी जनरल ने आपत्ति की थी।’’

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पीठ ने कहा, ‘‘ इस मसले को स्पष्ट करने के बाद हम उचित समझते हैं कि गांधी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाये।’’

लेखी ने इस पर राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह व्यक्ति संसद में भारतीयों का प्रतिनिधित्व कैसे करेगा जो ‘संवैधानिक नैतिकताओं’ और ‘लोकतांत्रिक परंपराओं’ को नहीं समझता।

उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘एक परिवार के चार सदस्यों में से तीन जमानत पर हैं। क्या वे ईमानदारी और निष्ठा पर पाठ पढ़ाएंगे। अपने झूठ को छिपाने के लिए वे ये सब कर रहे हैं।’’

वह वस्तुत: नेशनल हेराल्ड मामले का जिक्र कर रही थीं।

(भाषा)

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