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50 साल लंबी प्रेम कहानीः राजकपूर भी जिनके यहां करते थे काम

चंदूलाल शाह अपने करियर की शुरुआत में एक शेयर दलाल थे। उनके बड़े भाई दयाराम शाह फिल्में बनाते थे और चंदूलाल शाह फुर्सत के क्षणों में स्टूडियो में ये दृश्य देखा करते थे।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 25 Nov 2020 5:44 AM GMT

50 साल लंबी प्रेम कहानीः राजकपूर भी जिनके यहां करते थे काम
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50 साल लंबी प्रेम कहानीः राजकपूर भी जिनके यहां करते थे काम (Photo by social media)
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लखनऊ: शायद ही नई पीढ़ी में किसी ने प्रसिद्ध निर्माता निर्देशक चंदूलाल शाह का नाम सुना होगा। इनके रणजीत स्टूडियो में के.एल सहगल, मोतीलाल और राजकपूर की तरह अनेक सितारे मामूली वेतन पर नौकरी करते थे। आज चंदूलाल शाह का निधन हुए 45 साल हो गए। हम जिक्र कर रहे हैं एक ऐसी प्रेम कहानी का जो लगभग 50 साल तक चली। लेकिन कभी शादी तक नहीं पहुंचा लेकिन समर्पण गजब का रहा।

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चंदूलाल शाह अपने करियर की शुरुआत में एक शेयर दलाल थे

चंदूलाल शाह अपने करियर की शुरुआत में एक शेयर दलाल थे। उनके बड़े भाई दयाराम शाह फिल्में बनाते थे और चंदूलाल शाह फुर्सत के क्षणों में स्टूडियो में ये दृश्य देखा करते थे। एक बार उनके भाई बीमार पड़ गए। उनकी फिल्म विमला अधूरी थी। बड़े भाई की मदद के लिए उन्होंने वह फिल्म पूरी करने आगे आए लेकिन इससे उन्हें फिल्मों का जो चस्का लगा वह मरते दम तक नहीं छूटा।

फिल्म के निर्माण के दौरान ही उनकी मुलाकात नायिका गौहर से हुई, जो उस समय की अत्यंत खूबसूरत महिला थी। चंदूलाल शाह और गौहर को एक-दूसरे से प्रेम हो गया, जो पचास वर्ष तक चला।

Chandulal Shah- Chandulal Shah- (Photo by social media)

घटना से है मूक फिल्मों का दौर खत्म होने के बाद जब चंदू लाल शाह फिल्म गण सुंदरी दोबारा बना रहे थे तब उनकी मुलाकात नायिका गौहर से हुई, इन दोनों की जोड़ी ने न केवल गोल्डेन जुबली फिल्में बनाई वरन् अपने प्रेम की भी स्वर्ण जयंती मनाई। बताते हैं कि दोनो का प्रेम 1925 में पनपा था और चंदूलाल शाह की मृत्यु 1975 में हुई।

गौहर ने कभी चंदूलाल शाह का साथ नहीं छोड़ा। गौहर करीम भाई मामाजीवाला की पुत्री थीं और करीम भाई अर्देशर ईरानी के मित्र थे, जिन्होंने 1931 में भारत की पहली बोलती फिल्म ‘आलमआरा’ बनाई थी। उन्हीं के आग्रह पर गौहर ने अभिनय शुरू किया था। चंदूलाल शाह ने गौहर के साथ ‘द टायपिस्ट गर्ल’ बनाई। हिन्दी फिल्म का टाइटल अंग्रेजी में होना आज की ही बात नहीं है। ये तब भी था उस दौर में गौहर अभिनीत एक फिल्म का नाम था ‘फॉरच्यून एंड फूल्स’ और दूसरी का नाम था ‘फेयरी फ्राम श्रीलंका’।

चंदूलाल शाह और गौहर हर साल तकरीबन बारह फिल्में करते थे

जामनगर के राजा रणजीत सिंह के भतीजे दिग्विजय सिंह ने चंदूलाल शाह की आर्थिक मदद की और मुंबई के दादर क्षेत्र में रणजीत स्टूडियो की स्थापना हुई। चंदूलाल शाह और गौहर हर साल तकरीबन बारह फिल्में करते थे। रणजीत स्टूडियो में के.एल सहगल, मोतीलाल और राजकपूर की तरह अनेक सितारे तथा तकनीशियन माहवारी वेतन पर काम किया करते थे। उस समय के लगभग सभी नामचीन सितारे रणजीत स्टूडियो में थे। बहुत बड़ा स्टूडियो था जिसमें 600 कर्मचारी थे।

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एक समय ऐसा आया जब सितारों को मुंहमांगी कीमत मिलने लगी। स्टूडियो टूटने लगा। फिल्में असफल होने लगीं। चंदूलाल शाह को स्टूडियो, बंगला, गाड़ियां सब बेचनी पड़ीं और वे कंगाल हो गए। लेकिन तब भी गौहर उनके साथ रहीं। उन्होंने अपने जेवर बेच दिए और चंदूलाल शाह की मदद की। यहां महत्वपूर्ण ये है कि दोनो का कभी विवाह नहीं हुआ लेकिन प्यार इतना प्रबल था कि गौहर ने सब कुछ लुटा कर चंदूलाल शाह की सेवा की। ये था अमर प्रेम।

रिपोर्ट- रामकृष्ण वाजपेयी

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