शिमला रेप केस में पुलिस का सच जान, आपका उठ जाएगा विश्वास

    वेद प्रकाश सिंह

शिमला: अमूमन शांतिप्रियता और अपराध रहित समाज के रूप में पहचान बना चुका हिमाचल प्रदेश आज सकते में हैं। सीबीआई ने एक गैंग रेप और मर्डर के आरोपी की हत्या के मामले में आईजी समेत आठ लोगों पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एसपी समेत चार अधिकारी अभी भी सीबीआई के राडार पर हैं।

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सीएम की फेसबुक पेज से वायरल हुई तस्वीरों के साथ शुरू हुए बवाल ने पूरे प्रकरण की दिशा ही पलट दी। इन सब उलटफेर के बीच जो सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है वह है पुलिसिया साख अगर अमीरों के प्रभाव में आकर पुलिस ने एक गरीब बाप की बेटी के लिए इंसाफ का गला सच में घोंटा होगा तो फिर वह जनता से कैसे मुह मिलाएगी, इससे भी बड़ा असमंजस जनता के लिए है वह आगे कैसे पुलिस पर यकीन कर पाएगी।

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एक तरह जहां कोई भी पुलिस की थ्योरी पर यकीन नही कर रहा था। वहीँ दूसरी तरफ पुलिस हिरासत में ही एक आरोपी की मौत ने आग में घी का डाल दिया। जनता की विश्वास बहाली के लिए सरकार ने मामले की जांच को सीबीआई को सौपने का फैसला किया। यहीं से इस केस ने ऐसी करवट ली की आज हर हिमाचली सकते में है और पुलिसिया करतूतों पर शर्मिंदा भी।

इतने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अधिकारियों की हिमाचल के इतिहास में यह पहली गिरफ्तारी है। सीबीआई सूत्रों की माने तो इस गिरफ्तारी का कारण पुलिस द्वारा सूरज की हत्या करना और उसे एक साजिश के तहत उसके दोस्त को उस हत्या का आरोपी बनाने के केस में हुई है।

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गरीब समझ पुलिस ने मामले को दबाने की साजिश रची
सीबीआई द्वारा हुई इस गिरफ्तारी का स्वागत करते हुए गुडिया के पिता ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस सोचती थी मैं गरीब हूँ, जैसे चाहे वैसे काम करे। लेकिन सीबीआई जांच शुरू होने के बाद मेरा यकीन बिटिया के इंसाफ के लिए बढ़ गया है। इसके साथ ही उन्होंने न्याय की लड़ाई में शामिल जनता को भी धन्यवाद दिया।

वहीँ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने सीबीआई के इस कदम का स्वागत हुए इसे न्याय की लड़ाई का पहला पड़ाव बताया और कहा कि बीजेपी पहले से ही सीबीआई जांच की मांग इसीलिए कर रही थी। जबकि कांग्रेस सचिव नरेश चौहान का कहना है कि सरकार ने निष्पक्ष जांच के लिए ही सीबीआई को जांच सौंपी थी।

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अपनी गर्दन फसंते देख संतरी ने खोले राज
सीबीआई सूत्रों की माने तो लॉकअप में हुई हत्या अपने आप में एक पहेली लग रही थी। जब जांच शुरू हुई तो सबसे पहले उस संतरी दिनेश से पूछताछ की गयी, कि आखिर वह ड्यूटी पर था तो उसने लड़ते झगड़ते देख उन्हें रोका क्यों नहीं। इसके बाद संतरी दिनेश ने सूरज की हत्या का सच बताया।

सूत्रों की माने तो सूरज की हत्या लॉकअप के बाहर हुई। इसके बाद सारी कहानी प्लांट की गयी। जिसमे आईजी ने दिनेश कुमार से उसके दस्तखत सादे पेज पर लेने की बात भी सामने आई है। वहीँ डीएसपी मनोज जोशी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है की वह रात के बारह बजे के बाद भी कोटखाई थानें में मौजूद थे, जबकि उन्होंने वहां से उनकी रवानगी 11 बजे ही दर्ज है। ऐसे में सवाल लाजिमी है कि उन्होंने उस रात आखिर क्यों गलत एंट्री करवाई। इन्ही तथ्यों की जानकारी के लिए सीबीआई ने सभी अधिकारियों को 4 सितम्बर तक रिमांड पर लिया है।

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अभी इस मामले में शिमला के एसपी और एएसपी सीबीआई शिकंजे से बाहर है, सूत्रों की माने तो उनसे भी पूछताछ हुई, जिसके बाद उन पर भी सीबीआई कार्यवाही कर सकती है।

लोगों के विश्वास को झकझोर देने वाले इस पूरे प्रकरण पर एक नज़र डालते है, कब कब क्या हुआ और कैसे जिनपर रक्षा की दायित्व था वही कैसे भक्षक बन गए।

बात चार जुलाई की है। जब शिमला के कोटखाई स्कूल से अपने घर के लिए निकली मासूम छात्रा गुड़िया (काल्पनिक नाम) घर नही पहुंची। परिजन उसे खोजते रात को थानें पहुंचे और पुलिस को पूरी बात बताई। पिता की माने तो उनके मन में अगर एकाध बार भी बुरे खयाल आये तो बस यही की कहीं वह किसी जंगली जानवर का शिकार न बन गयी हो। समय के साथ डर भारी होता गया।

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दो दिन बाद छः जुलाई को हलाइला गाँव ले निकट जंगलों में उसकी लाश नग्न अवस्था में मिली। अगले दिन हुए पोस्टमार्टम में उसके साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की बात सामने आयी।
8 जुलाई तक पूरी बात जंगल में आग की तरह फ़ैल गयी थी। जगह-जगह लोगों ने प्रदर्शन कर गुड़िया के लिए इंसाफ की मांग की।
10 जुलाई मामले को बढ़ता देख सरकार ने तेजतर्रार आईजी साउथ के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल गठित कर दिया।
11 जुलाई को पुलिस ने शक के आधार पर जांच करते हुए कई लोगों से पूछताछ की। सर्विलांस और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच करते हुए पुलिस ने इस केस को जल्द सुलझाने का दावा किया।
12 जुलाई शाम को सीएम वीरभद्र सिंह के अधिकारिक फेसबुक पेज से पांच संदिग्धों की तस्वीरे वायरल हो गयी।
13 जुलाई को डीजीपी ने केस को सुलझाने का दावा करते हुए एक प्रेस वार्ता की। उन्होंने पांच आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा करते हुए उनकी पहचान और पूरे घटना का विवरण प्रस्तुत किया।

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यहाँ से बात बिगडनी शुरू हुई
पुलिस द्वारा पकड़े गए अपराधी मजदूर थे जो कोटखाई के एक बागवान के यहाँ काम करते थे, जबकि सीएम के फेसबुक पेज पर पोस्ट हुई पांच युवकों की तस्वीरों में वे रईसजादे लगते थे। यहीं से बात बिगडनी शुरू हो गयी। लोगों ने पुलिस पर अमीरजादों को बचाने और मजदूरों को फसाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिए।
14 जुलाई को बढ़ते जनाक्रोश के बीच सीएम ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने के निर्देश दिए।
15 जुलाई को सीएम के फेसबुक पेज पर वायरल हुए संदिग्धों में दो की मेडिकल जांच करवाई।

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19 जुलाई इस पूरे प्रकरण में यह दिन सबसे महत्वपूर्ण रहा। पुलिस मामले की जांच सीबीआई को सौपने का आदेश जारी हो चुका था। इसी दौरान पुलिस कस्टडी रिमांड में एक आरोपी सूरज की हत्या हो जाती है। पुलिस इस हत्या का आरोप भी उसके साथी राजू पर मढ देती है। इस मौत के साथ पब्लिक उग्र हो जाती है और कोटखाई थाने को आग के हवाले कर देती है।

स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आईजी समेत कई वरिष्ट अधिकारियों को अपनी जान बचाने के लिए वहां से वर्दी छोड़ सिविल ड्रेस में भागना पड़ता है। दूसरी तरफ सूरज की लॉकअप में हत्या ने कई अनसुलझे सवाल खड़े किये तो पुलिस की काबिलियत पर भी सवाल उठे।

लोगों का आरोप था कि सीबीआई जांच में सूरज कुछ ऐसा बताने वाला था जिससे पुलिस की थ्योरी खुद भी बेनकाब हो जाती इसीलिए उसकी हत्या करवाई गयी है। जिससे उसके साथ ही सारे राज भी दफ़न हो जाएं।

22 जुलाई : सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण में दो अलग अलग केस दर्ज किये और एक एसआईटी का गठन किया।
23 जुलाई को शिमला पहुंची सीबीआई ने जांच शुरू की अगली दिन लॉकअप में मारे गए सूरज का फिर से पोस्टमार्टम करवाया।

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2: अगस्त को सीबीआई ने कोर्ट में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल कर और समय माँगा जिसपर कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते का समय दिया। इसके बाद सीबीआई ने पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की।
16 अगस्त जांच में शामिल एसआईटी के तीन अधिकारियों से पुलिस ने की पूछताछ।
17 अगस्त सीबीआई ने हाईकोर्ट में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल की, कोर्ट ने काम में तेजी लाने को कहते हुए लगाईं फटकार।
24 अगस्त सीबीआई ने सरकार का जांच में सहयोग न देने का लगाया आरोप।
29 अगस्त : लंबी पूछ्ताछ के बाद सीबीआई ने आईजी समेत आठ अधिकारियों को अरेस्ट कर लिया