यूपी के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल बोले ‘कर्जमाफी भी होगी और विकास भी’

Vijay Shankar Pankaj

लखनऊ : यूपी की वर्तमान वित्तीय स्थिति कतई अच्छी नहीं है। राज्य में सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद बजट का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा वेतन/पेंशन में चला जाना है। वित्तीय वर्ष 2‚16-17 के अनुमानित राजस्व वसूली में 35 प्रतिशत की कमी आयी है। इसके साथ ही अन्य प्रशासनिक खर्चो में भारी बढ़ोतरी हुई है। नयी सरकार के लिए अपनी चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के साथ ही विकास कार्यों को पूरा करने की चुनौती है। क्या करेगी सरकार और क्या हैं इरादे इस बारे में राज्य के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल से प्रतिनिधि विजय शंकर पंकज बात चीत की।

अपना भारत- चुनावी वादों के अनुसार प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी के लिए राज्य सरकार क्या कर रही है?
वित्तमंत्री — यह सही है कि प्रदेश का किसान पिछले तीन वर्षो में दैवी आपदा से काफी पीड़ित रहा है और उसकी आर्थिक हालत अति दयनीय है। प्रदेश की योगी सरकार और भाजपा नेतृत्व इस मामले पर काफी संवेदनशील है। इसके लिए योगी सरकार अपने संसाधनों के हिसाब से पूरी कार्य योजना बना रही है। भाजपा ने किसानों की कर्जमाफी के लिए कोई घोषणा पत्र जारी नही किया है। भाजपा का संकल्प पत्र है। घोषणा पत्र पूरा करने की अनिवार्यता होती है जबकि संकल्प पत्र के लिए प्रयास किया जाता है।

अपना भारत — प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कइ जनसभाओं में लघु एवं सीमान्त किसानों की कर्जमाफी का वादा करते हुए कहा कि सरकार बनने पर पहली कैबिनेट में यह निर्णय लिया जाएगा। अब क्या योगी सरकार अपने बर्ड़िे नेताओं की इन घोषणाओं ने पीछे हट रही है?
वित्तमंत्री — नही, राज्य सरकार अपने प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष के वादे को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए हम कटिबद्ध है। पिछली सरकार की वित्तीय अनियमितता तथा भ्रष्टाचार से राज्य की वित्तीय स्थिति सोचनीय है और उसे पटरी पर लाने के साथ ही किसानों की कर्जमाफी के वादे को भी पूरा करना है।

अपना भारत — किसानों की कर्जमाफी के लिए राज्य सरकार ने क्या खाका तैयार किया है?
वित्तमंत्री — प्रदेश में 2.15  करोड़ लघु एवं सीमान्त किसान है जिसमें 1.85 करोड़ सीमान्त एवं .30 करोड़ लघु किसान है। इन सभी के कर्जो का पूरा ब्योरा तैयार कर लिया गया है और उस दिशा में काम किया जा रहा है। इसका विस्तृत ब्योरा अभी मीडिया को दिया जाना संभव नही है।

अपना भारत — राज्य की वर्तमान खस्ताहाल वित्तीय स्थिति में किसानों की कर्ज माफी का लंबा बजट माफ करना क्या संभव है, जबकि राजस्व में कमी आयी है और संसाधन बढ़ाने के स्रोत नही है।
वित्तमंत्री — संसाधन जुटाना राज्य सरकार का दायित्व है और इसका विस्तृत ब्योरा बजट में आएगा। बजट से पूर्व किसी भी मामले का खुलासा नही किया जा सकता है।

अपना भारत –राज्य के सामने किसानों की कर्जमाफी के साथ ही सरकारी कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग के अनूरूप भुगतान करना है। यह दोनों ही धनराशि प्रदेश के बजट का खाका बिगाडर्निे के लिए काफी है। ऐसे में राज्य सरकार वित्तीय समन्वय बनाने के लिए क्या करेगी?
वित्तमंत्री–राज्य सरकार कर्मचारियों को सातवे वेतन आयोग के अनुरूप वेतन/पेंशन देने के साथ ही किसानों की कर्जमाफी भी करेगी और विकास कार्यो को गति देने के लिए तेजी लायी जाएगी।

अपना भारत — विकास योजनाओं को गति देने के लिए कहा से धनराशि ले आयेगे?
वित्तमंत्री —हम राज्य की चल रही सभी विकास योजनाओं की पुर्नसमीक्षा कर रहे है। इसमें राजनीतिक लाभ के लिए चालू की गयी तथा निष्क्रिय योजनाओं को समाप्त कर राज्य के विकास योजनाओं को ही गति दी जाएगी।

अगली स्लाइड में देखिए 8 6,241 करोड़ का कर्जा है किसानों पर
वित्तीय वर्ष 2‚16-17  का यूपी का बजट लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का था। केन्द्रीय सहायता में वृद्धि और जीएसटी लागू होने के बाद वर्ष 2‚17-18 का यूपी बजट लगभग 3.8‚ लाख करोड़ से 4 लाख करोड़ रुपए तक का हो सकता है। 2‚15-16 के आकड़ों के अनुसार प्रदेश के किसानों ने विभिन्न बैंकों से लगभग 86,241 करोड़ रुपए का कर्ज ले रखा था जिसमें पिछले वर्ष में इजाफा हुआ है। इसमें से 27,42‚ करोड़ रुपये लघु एवं सीमान्त किसानों का है। मूल धन पर पिछले तीन वर्षों का ब्याज ही लगभग 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। प्रदेश में कुल 2.15 करोड़ लघु एवं सीमान्त किसान हैं जिनके पास ढाई एकड़ से कम जमीन है। गन्ना किसानों का लगभग 8 हजार करोड़ रुपये बकाया है।