यूरिया बना काल! माटी में कम हो रहे पोषक तत्व, नहीं रही रोगों से लडऩे की क्षमता

 

       योगेश मिश्र

लखनऊ: चावल, गेहूं, दाल और फल-सब्जियों के बूते शरीर को पोषक तत्व मुहैया कराने का सपना अब दूर की कौड़ी हो गई है। आपको खुद और अपने बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए अब धरती की कोख से उपजने वाले अनाज और फल-सब्जियों के अलावा कृत्रिम पौष्टिक अहारों पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा।

क्योंकि हमारी माटी की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। सूक्ष्म पोषक तत्वों के मामले में तो तकरीबन यह चुक सी गई है। यह कृषि वैज्ञानिकों के साथ-साथ चिकित्सकों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।

अनाज, फल और सब्जियों से हमें चार तरह के पोषक तत्व मिलते हैं। पहली श्रेणी में मिलने वाले तत्वों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश होता है। जबकि द्वितीय श्रेणी के पोषक तत्वों में कैल्शियम, मैग्निशियम और सल्फर आते हैं। इसके साथ ही सूक्ष्म पोषक तत्वों की फेहरिस्त में जिंक, कापर, आयरन, मैग्नीज, मालवेंडेनम, वोरान और क्लोरीन को रखा गया है। ये सारे तत्व माटी से हमारे खाद्य पदार्थों के मार्फत हमें प्राप्त होते हैं।

जबकि माटी में खड़ी फसलें वातावरण से कार्बन, हाइड्रोजन और आक्सीजन लेकर पोषक तत्वों को मजबूत बनाती हैं। इन पोषक तत्वों में 0.8 फीसदी कार्बन की मात्रा दरकार है। पर हमारी माटी में फसलें वातावरण से जद्दोजहद के बाद भी 0.2 और 0.3 से अधिक कार्बन तैयार नहीं कर पाती हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का ही नतीजा है कि सौ ग्राम दाल में आयरन की मात्रा छह ग्राम की जगह 2.7 ग्राम पाई जाती है। रोटी में भी जरूरी पोषक तत्व 4.9 की जगह 2.7 ही होते हैं। चावल में पोषक तत्वों की मात्रा 0.2 कम मिली है।

गौरतलब है कि चावल में पोषक तत्वों की मात्रा 0.7 होनी चाहिए। लेकिन पड़ताल में केवल 0.5 प्राप्त हुई है। इतना ही नहीं, पड़ताल के दौरान पोषक तत्वों अकेले दाल में फास्फोरस की मात्रा ४ मिली ग्राम, रोटी में 49 मिली ग्राम और चावल में 10 मिली ग्राम कम पाई गई है। सिर्फ दाल की जांच पड़ताल पर अगर नजर टिकाएं तो कैल्शियम की मात्रा 110 मिली ग्राम की जगह 73 मिग्रा पाई गई है। रोटी में 48 की जगह 41 मिग्रा कैल्शियम और चावल में 10 की जगह 9 मिग्रा कैल्शियम पाया गया। माटी के अंधाधुंध दोहन का असर फाइबर की मात्रा पर भी कम नहीं पड़ा है।

दाल में 1.5 ग्राम फाइबर की जगह 1.3 ग्राम, रोटी में 1.9 की जगह 1.7 ग्राम और चावल में मानक से दो ग्राम कम फाइबर मिला है। दाल में 33.5 की जगह 33.1, रोटी में 34.8 की जगह 33.8 तथा चावल में 345 की जगह 341 कैलोरी ऊर्जा ही मिल पाती है। शरीर के लिए सबसे जरूरी प्रोटीन की मात्रा भी हमारी दाल, रोटी और चावल में कम हुई है। दाल में यह कमी 1.6, रोटी में 1.1 और चावल में 6.8 प्रोटीन की मात्रा कम दर्ज हुई है।

नरेंद्र देव कृषि विवि के कृषि वैज्ञानिक एमपी सिंह इसकी वजह बखान किया है, ‘हमने गोबर खाद, हरी खाद और वर्मी कम्पोस्ट सरीखी जैविक खादों से मुंह मोड़ लिया है। दलहनी फसलें- उड़द, मूंग तथा अरहर आदि भी हम नहीं बो रहे हैं। दलहनी फसलों की जड़ों में ऐसे बैक्टीरिया होते थे, जो आसमान से नाइट्रोजन आदि खींचकर माटी की उर्वरता बढ़ाते थे। जैविक खादों में भी कमोवेश ऐसी ही गुणवत्ता पाई जाती थी। कार्बन की कमी की वजह तो पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई है।’

सूबे में हर साल औसतन पंद्रह से बीस लाख मिट्टी का सैंपल लेकर मृदा परीक्षण किया जाता है, पर दो करोड़ 17 लाख किसाना परिवार वाले भारी-भरकम सूबे में यह आंकड़ा भी संतोषजनक नहीं है। परीक्षण में जो नतीजे सामने आते हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। शुरुआती दौर के परीक्षणों में जिंक की कमी पाई गई। अब तो सल्फर और आयरन भी चुकने की स्थिति में आ गए हैं। सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रेंट) तो लापता हो गए हैं।

आमतौर पर जिन खादों का उपयोग हमारा किसाान कर रहा है वे प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पोषक तत्वों की किसी तरह भरपाई तो कर देता है। पर सूक्ष्म पोषक तत्व तैयार करने अथवा बढ़ाने का कोई जरिया हमारी खादों में नहीं होता है।

संयुक्त निदेशक शोध एवं मृदा एलबी सिंह के मुताबिक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी की वजह यूरिया का अधिक प्रयोग है। किसानों का चाहिए कि माटी की जांच कराकर जिन तत्वों की कमी हो, उस तरह की खेती करें या फिर कम्पोस्ट, वर्मी अथवा जैविक खादों के भरोसे उसे पूरा करें। लेकिन यह करता हुआ कोई दिखता नहीं है। ऐसे में अब शरीर के जरूरी पोषक तत्वों की भरपाई अनाज, फल और सब्जियों से हो पाएगी, इस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की कमी से चिकित्सक भी खासे चिंतित हैं, क्योंकि यह एक ओर जहां शरीर में रोगों से लडऩे की प्रतिरोधक क्षमता को घटा रहा है, वहीं विकास पर भी असर डाल रहा है। जैसे आयरन की कमी से लीवर और हड्डियों, प्रोटीन से मांसपेशियों, कैल्शियम से महिलाओं के स्वास्थ्य और फाइबर की कमी से पाचन शक्ति प्रभावित हो रही है। फास्फोरस की कमी ने आदमी की याद्दाश्त पर असर डालना शुरू कर दिया है।