सुलग रही है यूपी BJP, निशाने पर बंसल… सुलह का मंत्र ले आएंगे शाह

विजय शंकर पंकज
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई में महाघमासान मचा हुआ है। मीडिया में भाजपा की कलह पर भले ही शांति का लबादा पड़ा हो परन्तु राज्य मुख्यालय से लेकर सचिवालय के सत्ता के गलियारे, मंत्रियों/ सांसदों, विधायकों के आवास से लेकर क्षेत्र और जिला भाजपा कार्यालयों से क्षेत्रीय, मंडल और बूथ कमेटियों तक कपडा फाड़ राजनीति से लेकर आरोप-प्रत्यारोपों की निचली स्तर तक के वाद-विवाद चल रहे है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के पास शिकायतों के अम्बार लगातार बढते जा रहे हैं, परन्तु कोई भी इस मामले में हाथ डालने की हिम्मत नही जुटा पा रहा है। सत्ता में आये भाजपाई मस्ती में डूबे है तो संगठन निष्प्राण होकर मोदी मंत्र से मुग्ध है।
कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के लिए भाजपा नेतृत्व ने सितम्बर माह तक का विस्तृत कार्यक्रम निचले स्तर तक निर्धारित कर दिया है परन्तु सारे कार्यक्रम विफल साबित हो रहे है। भाजपा के कार्यक्रमों में कार्यकर्ता नही जा रहे है। पार्टी कार्यक्रमों में अनुशासनहीनता पराकाष्ठा पर है। पार्टी कार्यालयों पर पहुंचने वाले पदाधिकारियों की आये दिन आपसी बहस एवं गरमागरमी की शिकायतें बढाती जा रही है।
भाजपा कार्यकर्ताओं के आक्रोश, मंत्रियों एवं पदाधिकारियों द्वारा उपेक्षा एवं अनादर के आरोप, मंत्रियों एवं कुछ प्रभावशाली नेताओं पर बढ़ते भ्रष्टाचारों के आरोप ने शीर्ष नेतृत्व की चिन्ताएं बढ़ा दी है। अगले लोकसभा चुनाव में अब जबकि 18 से 20 माह का समय शेष है कि देश के सबसे बड़े राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं की इन शिकायतों से प्रधानमंत्री कार्यालय सक्रिय हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पार्टी कार्यकर्ताओं के इस आक्रोश एवं शिकायतों के अम्बार की घटनाओं पर गहरी नाराजगी जताते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 28 जुलाई को खत्म होते ही इस दिशा में कदम उठाये जाएगें।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लखनऊ के तीन दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। इन तीन दिनों में भाजपा के यूपी से लोकसभा एवं राज्यसभा सदस्यों, विधानसभा एवं विधान परिषद के सदस्यों, प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ ही जिला एवं मंडल स्तर के पदाधिकारियों को विभिन्न सत्रों में बैठाकर कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।
सूत्रों का कहना है, कि अमित शाह की इसी मैराथन दौर में नये प्रदेश अध्यक्ष एवं नयी राज्य इकाई के गठन का स्वरूप तैयार होगा। अभी तक केशव प्रसाद मौर्य राज्य सरकार में उप मुख्यमंत्री होने के बाद भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का दोहरा कार्य देख रहे है। मंत्री बनने के बाद से मौर्य संगठन को समुचित समय नही दे पा रहे। सरकार बनने के बाद से फिलहाल उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान संगठन महामंत्री सुनील बंसल के हवाले है। सुनील बंसल की विवादास्पद तिकड़ी को लेकर पार्टी के वरिष्ठ से युवा कार्यकर्ताओं तक में दहशत का माहौल है।
चर्चा है कि प्रदेश भाजपा कार्यालय में स्थापित भगवान शिव के दर्शन तो आसान है परन्तु सुनील बंसल से मुलाकात ‘‘काया-कल्प’’ की तरह मुश्किल है। प्रदेश भाजपा में कुछ एक को छोडकर अन्य किसी पदाधिकारी की भी नही चलती है। भाजपा में यह तूफान उच्च न्यायालय से लेकर जिला न्यायालयों में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति के बाद आया है। पिछले तीन माह से चल रही इस कवायद में महामंत्री संगठन सुनील बंसल के यहां सूची तैयार किये जाने की चर्चा होती रही है।
शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति प्रकरण में मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर विधि मंत्री, महाधिवक्ता एवं प्रमुख सचिव न्याय तक ने अपना हाथ पीछे खींच लिया था और साफ तौर पर यह कह दिया गया कि संगठन से जो सूची आएगी, उस पर ही मुहर लगा दी जाएगी।

आरोप है कि शासकीय अधिवक्ताओं की सूची में सही मानकों का इस्तेमाल नही किया गया और विवादास्पद, दागी, अपराधी प्रकृति तथा विपक्षी दलों से संंबंध रखने वाले लोगों को तरजीह दी गयी। इस विवादास्पद सूची में सुनील बंसल के सलाहकार पदाधिकारियों को लेकर आरोप लगने लगे है।
भाजपा के प्रदेश कार्यालय में पदाधिकारियों से लेकर राज्य भर से आने वाले कार्यकर्ताओं का आक्रोश दिन भर देखने को मिल जाता है। यहां तक कि कई पदाधिकारियों के कक्षों में भी यह चर्चाएं आम होने लगी है। भाजपा कार्यालय कार्यकर्ताओं की अनुशासनहीनता और आरोपों का केन्द्र बन गया है। आम कार्यकताओं की सुनी नही जाती है। वैसे तो आम जनता की सुनवाई के लिए प्रत्येक दिन एक मंत्री एवं एक पदाधिकारी के बैठने के लिए तिथि एवं समय निर्धारित किया गया है परन्तु इसमें दूर-दराज से आने वालों लोगों की आम शिकायतों की ही कागजी खाना पूर्ति की जाती है। इन शिकायतों पर शासन-प्रशासन की तरफ से कार्रवाई होने की कोई रिपोर्ट नही आती।
मंत्री कार्यकर्ताओं की तो छोड़िये विधायकों तक की सुनते। विधायकों एवं कार्यकर्ताओं को टालने के लिए मंत्री कहते है, कि संगठन से लिखवा कर संस्तुति पत्र लाइये, तभी शासन स्तर पर संज्ञान में लिया जाएगा। प्रदेश भाजपा कार्यालय का कोई पदाधिकारी ऐसी कोई संस्तुति करने को तैयार नही होता। इसके विपरीत कुछ महत्वपूर्ण कामों की संस्तुति पत्र संगठन से लेकर कुछ विशिष्ट लोग मंत्रियों के पास पहुंचते है और इसके साथ ही शासन प्रणाली सक्रिय हो जाती है।
संगठन की कुछ ऐसी संस्तुतियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एतराज जता चुके है। संगठन की ऐसी संस्तुतियों में भ्रष्टाचार एवं पक्षपात की गंध आती है। ऐसे कुछ मामलों को लेकर सरकार एवं संगठन में तकरार की स्थिति लगातार बढती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों को साफ कर दिया है कि संगठन की ऐसी संस्तुतियों की उच्च स्तरीय जांच कर ही उचित कार्रवाई करे अन्यथा ऐसे कार्यो का आरोप मंत्री विशेष पर ही जाएगा।
यह मामला भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के पास पहुंचा है। अमित शाह तीन दिवसीय प्रवास में सरकार एवं संगठन में समन्वय बनाकर काम करने की रणनीति बनाएगे। मंत्रियों को काम करने के साथ ही संगठन की संस्तुतियों के लिए मानक तैयार किये जाएगे और उसके लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टारलेंस की नीति पर चलने की अपनी नीति से शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा चुके है परन्तु उनके कुछ वरिष्ठ मंत्री तथा संगठन के कुछ पदाधिकारियों का काकस इसको विफल करने में जुटा हुआ है।

योगी अपने कार्यालय के कुछ अधिकारियों की एक गोपनीय टीम गठित की है जिसके माध्यम से वह भ्रष्टाचार संबंधी मामलों पर नजर रखेगी। इसमें मंत्रियों से लेकर भाजपा के पदाधिकारियों की संस्तुतियों को लेकर तथ्य जुटाये जाएगे ताकि समय से उन्हें ऐसे तत्वों से बचने के संकेत दिये जा सके। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योगी को सरकार के कामकाज में किसी के हस्तक्षेप न किये जाने का आश्वासन देते हुए शासन प्रणाली को पारदर्शी बनाने का संकेत दिया है। इसके बावजूद योगी की परेशानी यह है कि वह अपने मंत्रीमंडल सहयोगियों एवं संगठन पदाधिकारियों पर उस प्रकार का अकुंश नही लगा पा रहे है जितना की केन्द्र सरकार में मोदी का है।
समझा जाता है कि अमित शाह की बैठक के बाद भाजपा के नये पदाधिकारियों की घोषणा होगी। इसके साथ ही सरकार और संगठन में समन्वय बनाने के लिए एक कोर कमेटी बनायी जाएगी, जो ऐसे कामों का निर्णय करेगी।