Tamil Nadu Politics: AIADMK में बढ़ी अंदरूनी कलह, पूर्व सांसद वेणुगोपाल ने छोड़ी पार्टी

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में एआईएडीएमके को बड़ा झटका लगा है। तिरुवल्लूर से पूर्व सांसद डॉ. पी. वेणुगोपाल ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठाए हैं।

Newstrack/IANS
Published on: 24 May 2026 3:10 PM IST
Dr P Venugopal
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Tamil Nadu Politics: एआईएडीएमके को रविवार को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब तिरुवल्लूर से दो बार के सांसद डॉ. पी. वेणुगोपाल ने पार्टी से अपने इस्तीफे की घोषणा की। वेणुगोपाल अनुसूचित जाति के बड़े नेताओं में से एक हैं। डॉ. वेणुगोपाल कई वर्षों से एआईएडीएमके से जुड़े थे और पार्टी की मेडिकल विंग की शुरुआत से ही उसमें अहम जिम्मेदारियां निभा रहे थे। उन्होंने लोकसभा में एआईएडीएमके संसदीय दल के नेता के तौर पर भी काम किया।

डॉ. वेणुगोपाल ने अपने एक बयान में पार्टी की गिरती स्थिति के पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक कारणों का जिक्र किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद अनुसूचित जाति समुदायों के बीच समर्थन में लगातार हो रही कमी की ओर इशारा किया। उन्होंने पार्टी के खराब प्रदर्शन के पीछे के भी इसकी वजह बताई।

डॉ. वेणुगोपाल के मुताबिक, पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए एक ऐसे समावेशी राजनीतिक दृष्टिकोण की जरूरत होगी जो संगठन के भीतर सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर चल सके। अंदरूनी कलह के बीच उन्होंने पार्टी छोड़ी है। हाल के हफ़्तों में पूर्व मंत्री एस. सेम्मलाई और पूर्व स्पीकर पी. धनपाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी पार्टी छोड़ी है।

उन्होंने एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व के तरीके पर भी निशाना साधा। डॉ. वेणुगोपाल ने सुझाव दिया कि संगठन और चुनाव से जुड़े अहम फैसलों में बेहतर राजनीतिक सूझबूझ की जरूरत है। उन्होंने उम्मीदवारों के चयन से जुड़े फैसलों की आलोचना की और कहा कि जयललिता के नेतृत्व में वरिष्ठ नेताओं को राज्यसभा में अवसर दिए जाते थे जबकि मौजूदा रवैये ने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं।

बता दें कि एआईएडीएमके को चुनावों में लगातार हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी अपने पुराने राजनीतिक दबदबे को फिर से हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है। वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने और गुटबाजी सामने आने के साथ ही एआईएडीएमके पर अब संगठनात्मक चुनौतियों से निपटने और भविष्य की राजनीतिक लड़ाइयों से पहले अपने आधार को फिर से मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है।

Vineeta Pandey

Vineeta Pandey

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