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हिमाचल 2012 : जब अल्लाह हुआ मेहरबान तो ये 8 बने पहलवान, लग चुकी थी लंका

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 25 Oct 2017 3:39 PM GMT

हिमाचल 2012 : जब अल्लाह हुआ मेहरबान तो ये 8 बने पहलवान, लग चुकी थी लंका
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शिमला : 68 सीटों वाले हिमाचल में हार और जीत का अंतर कई बार इतना मामूली होता है कि उम्मीदवार समझ ही नहीं पाता की कमी कहां रह गई। पिछले विधान सभा चुनाव में 8 विधानसभा सीटें ऐसी थीं जहां उम्मीदवारों के बीच हार-जीत का अंतर हजार वोट से भी कम था।

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कसौली विधानसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार राजीव सहजल सिर्फ 24 वोट से विजयी हुए थे। बीजेपी के तीन उम्मीदवार ऐसे थे। जिनकी जीत का अंतर हजार वोटों से कम था। वहीं, सत्ताधारी कांग्रेस के दो विधायक ऐसे ही हैं।

जीत और हार में कम अंतर का एक कारण ये भी रहा कि पिछले चुनाव में वोटिंग प्रतिशतता भी कम रही थी। 2012 के चुनाव में 73.51 प्रतिशत वोटिंग दर्ज हुई थी।

-कसौली भाजपा राजीव सहजल 24 मतों से जीते

-भटियात भाजपा विक्रम जरियाल 111 मतों से जीते

-चिंतपूर्णी कांग्रेस कुलदीप कुमार 438 मतों से जीते

-कांगड़ा निर्दलीय पवन काजल 563 मतों से जीते,

-शिमला भाजपा सुरेश भारद्वाज 628 मतों से जीते

-चौपाल निर्दलीय बलवीर वर्मा 647 मतों से जीते

-रेणुका कांग्रेस विनय कुमार 655 मतों से जीते

-पावंटा साहिब निर्दलीय किरनेश जंग 790 मतों से जीते

ये भी देखें: हिमाचल चुनाव : जानिए किस सीट पर, कितने नेता हैं उम्मीद से

पिछले 5 विधानसभा चुनाव में मैदान में थे इतने उम्मीदवार

-2012 में 459 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई

-1993 में उम्मीदवारों की संख्या 416

-1998 में उम्मीदवारों की संख्या 369

-2003 में उम्मीदवारों की संख्या 408

-2007 में उम्मीदवारों की संख्या 336

इस बार युवा होंगे भाग्य विधाता

2017 में हो रहे चुनाव में प्रदेश में करीब पचास लाख वोटर्स हैं। लिस्ट पर नजर डालने पर पता चलता है कि इस बार अधिकांश वोटर युवा हैं। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि इस बार युवा ही सरकार चुनने वाले हैं।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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