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रासुका के दुरुपयोग संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने से प्राधिकारियों को रोकने के लिए वह कोई व्यापक आदेश नहीं दे सकता।

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sumanBy suman

Published on 25 Jan 2020 5:54 AM GMT

रासुका के दुरुपयोग संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने से प्राधिकारियों को रोकने के लिए वह कोई व्यापक आदेश नहीं दे सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रासुका के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती, लेकिन इस संबंध में सभी के लिए कोई निर्देश भी नहीं दिया जा सकता, क्योंकि विरोध के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को आग लगायी जा रही है और यह संगठित भी हो सकता है।

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यमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि रासुका लगाने के संबंध में कोई व्यापक आदेश नहीं दिया जा सकता। पीठ ने अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा से कहा कि वह इस मामले में अपनी याचिका वापस ले सकते हैं। पीठ ने शर्मा से कहा कि रासुका के उल्लंघन के बारे में विवरण देते हुये नयी याचिका या नागरिकता संशोधन कानून प्रकरण में लंबित याचिकाओं में अंतरिम आवेदन दायर कर सकते हैं।शर्मा ने इस याचिका में रासुका लगाये जाने पर सवाल उठाते हुये कहा था कि यदि नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ विरोध कर रही जनता पर दबाव डालने के लिये ही यह कदम उठाया गया है।

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दिल्ली के शाहीन बाग और दूसरे स्थानों पर शांतिपूर्ण तरीके से नागरिकता संशोधन कानून का विरोध हो रहा है और राज्यों को विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ इस कठोर कानून को लागू करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने 10 जनवरी को रासुका की अवधि 19 जनवरी से तीन महीने के लिए बढ़ा दी थी। इस कानून के तहत दिल्ली पुलिस को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार प्राप्त है। रासुका के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति को बगैर किसी मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रख सकती है। देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ इस समय विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

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