फगुआ तो कहीं लट्ठमार, गुझिया तो कहीं गुलाल, ये है होली का त्योहार

Published by suman Published: February 19, 2018 | 10:33 am

लखनऊ: होली आने में अब ज्यादा दिन बाकी नहीं रह गए हैं। रंगों के इस त्योहार में हफ्तेभर पहले से ही बच्चे गुब्बारे और पिचकारी से खेलना शुरू कर देते हैं। ये त्योहार अपने साथ ढेर सारे रंग और खुशियां लेकर आता है। इस त्योहार पर तरह-तरह के पकवान खाने को मिलते हैं। होली का त्योहार देश में अलग-अलग अंदाज से मनाया जाता है।

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बिहार का फगुआ
होली का त्योहार हो और बिहार की बात ना हो, कैसे संभव है। होली का रंग यहां के लोगों के अंदाज की तरह ही निराला है। यहां होली को फगुआ कहा जाता है। यहां की होली की हुड़दंग देखते बनती है। इस दिन लोग रंग-गुलाल, मिट्टी, कीचड़ और गोबर सबसे होली खेलते हैं और साथ में ढ़ोल-मजीरे के साथ फगुआ और चैता गाते हैं। इस दिन यहां पुवा, मालपुवा बनाने की परंपरा है।

छत्तीसगढ़ की धूल पंचमी
वैसे तो बरसाने की लट्ठमार होली जगजाहिर है, लेकिन छत्तीसगढ़ में जांजगीर से 45 किलोमीटर दूर पंतोरा गांव है। यहां हर साल धूल पंचमी यानी रंगपंचमी के दिन कुंआरी कन्याएं घूम-घूम कर पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं। इस मौके पर गुजरने वाले हर पुरुष को लाठियों की मार झेलनी पड़ती है, चाहे वो कोई भी हो। करीब 300 सालों से अधिक समय से चली आ रही ये लट्ठमार होली अब परंपरा बन गई है।

महाराष्ट्र की धुलेंड़ी 
महाराष्ट्र में धुलेंड़ी के बाद पंचमी के दिन रंग खेलने की परंपरा है। यहां सूखे रंग के गुलाल से होली खेली जाती है। भोजन में पूरनपोली बनाने का खास महत्व होता है। उसके साथ आमटी, चावल और पापड़ आदि तलकर खाने की परंपरा है। कोंकण में इसे शमिगो नाम से मनाया जाता है।

मध्यप्रदेश की होली(गेर)
यहां होली पर गेर का आयोजन किया जाता है। जिसमें सड़कों पर रंग मिश्रित सुगंधित जल छिड़का जाता है। सूखे रंगों से होली खेलकर और एक-दूसरे पर रंग उड़ेलकर इस त्योहार को मनाया जाता है। होली के त्योहार पर अधिकतर घरों में इस दिन श्रीखंड और भजिए, आलूबड़े, भांग की ठंडाई का लुत्फ उठाया जाता है। खास तौर पर इंदौर में होली पर जुलूस निकालने की पुरानी परंपरा है, जिसे गेर कहा जाता है। इस गेर के जुलूस में बैंड, बाजे, नाचना, गाना सबकुछ शामिल होता है। बड़े टैंकों में रंगीन पानी भर कर जुलूस शामिल लोगों पर रंग डाला जाता है। इस जुलूस में सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं।

बंगाल की दोल यात्रा
होली का स्वरूप बंगाल में धार्मिक होता है। इस दिन पूर्व यहां दोल यात्रा निकाली जाती है। महिलाएं लाल किनारी वाली पारंपरिक सफेद साड़ी पहनकर शंख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं और प्रभात फेरी निकालती हैं। इसमें गाजे-बाजे के साथ, कीर्तन और गीत गाए जाते हैं। दोल शब्द का मतलब झूला होता है। झूले पर राधा-कृष्ण की मूर्ति रखकर महिलाएं भक्ति गीत गाती हैं और उनकी पूजा करती हैं। इस दिन अबीर और रंगों से होली खेली जाती है।

उत्तर प्रदेश की लट्ठमार होली
होली का त्योहार में यूपी के मथुरा, वृदांवन और बरसाने की लट्ठमार होली के बिना सब अधूरा है। यहां की होली विश्व भर में प्रसिद्ध है। वहीं, बाराबंकी में सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर भी होली खेली जाती है। यहां हिंदू-मुस्लिम मिलकर एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर इस त्योहार को खुशी-खुशी मनाते हैं। इस दरगाह पर खेली जाने वाली होली कौमी एकता का संदेश देती है।
इस दिन यहां हर घर में बेसन की सेंव और दही बड़े बनाए जाते हैं। इसमें कांजी, भांग और ठंडाई इस त्योहार के विशेष पेय हैं। कई स्थानों पर होली के दिन घर में खीर-पूड़ी आदि व्यंजन बनाए जाते हैं। इस त्योहार पर खासकर गुझियों का स्थान विशिष्ठ महत्वपूर्ण है।

राजस्थान की सतरंगी होली
इस अवसर पर यहां लाल, नारंगी और फिरोजी रंग हवा में उड़ाने की परंपरा है। यहां जैसलमेर के मंदिर महल में लोक नृत्यों में डूबा वातावरण देखने का अपना अलग ही मजा है। लोग नाच-गाने के साथ इस त्योहार का भरपूर आनंद लेते है।