Mamata Banerjee: 'दिल्ली में मल्हम, बंगाल में जख्म...' ममता के साथ बहुत बड़ा खेला कर रही कांग्रेस?

Mamata Banerjee: दिल्ली में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के गले मिलने की तस्वीर के पीछे बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा पाखंड छिपा है। एक तरफ दिल्ली में दोस्ती का नाटक चल रहा है, तो दूसरी तरफ टीएमसी बिखर रही है और अधीर रंजन ने विलय की सलाह दी है।

Harsh Srivastava
Published on: 9 Jun 2026 2:28 PM IST
Mamata Banerjee: दिल्ली में मल्हम, बंगाल में जख्म... ममता के साथ बहुत बड़ा खेला कर रही कांग्रेस?
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Mamata Banerjee: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक की बैठक से एक ऐसी राजनैतिक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश के सियासी गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस तस्वीर में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी एक-दूसरे के गले मिलती हुई नजर आ रही हैं। कैमरे के सामने ममता बनर्जी के चेहरे पर तो सुकून और मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन सोनिया गांधी के मन में उस वक्त क्या चल रहा था, यह कहना बेहद मुश्किल है।

इस महत्वपूर्ण बैठक के भीतर ममता बनर्जी को सोनिया गांधी के बिल्कुल बगल वाली कुर्सी पर बिठाया गया था, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद थे। लेकिन सच तो यह है कि ममता बनर्जी के लिए खुश होने का मौका सिर्फ उस बंद कमरे के अंदर ही था। जैसे ही वह कमरे से बाहर नजर डालतीं, उन्हें अपने राजनीतिक साम्राज्य में बर्बादी की एक बहुत बड़ी सुनामी दिखाई देती। जिस वक्त ममता दिल्ली की बैठक में थीं, ठीक उसी समय उनके अपने सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पार्टी से इस्तीफा दे रहे थे और टीएमसी के कई बागी सांसद दिल्ली में ही बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ गुप्त बैठक कर रहे थे।

दिल्ली में दोस्ती का नाटक और कोलकाता में दुश्मनी का खेल

ममता बनर्जी को इस गहरे संकट के समय कांग्रेस से जो समर्थन मिल रहा है, वह सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित है। पश्चिम बंगाल की धरती पर कदम रखते ही यह दोस्ती दुश्मनी में बदल जाती है। इस कड़वे सच की शुरुआत साल 2024 के आम चुनाव के समय ही हो गई थी, जब राहुल गांधी अपनी 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' लेकर बंगाल पहुंचने वाले थे। ठीक उससे पहले ममता बनर्जी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करके कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंप दिया था। उन्होंने नीतीश कुमार की तरह गठबंधन तो नहीं छोड़ा, लेकिन उनका रवैया बिल्कुल वैसा ही था।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस के कद्दावर नेता और अपने सबसे बड़े राजनीतिक दुश्मन अधीर रंजन चौधरी को हराने के लिए गुजरात से पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को मैदान में उतार दिया, जिसके कारण अधीर रंजन चुनाव हार गए। इस हार की वजह से कांग्रेस का सीटों का शतक बनते-बनते रह गया। इसके बाद भी राहुल गांधी ने बड़ा दिल दिखाते हुए ममता के खिलाफ कोई तीखा बयान नहीं दिया। यहां तक कि जब लोकसभा स्पीकर के चुनाव के समय ममता नाराज हुईं, तो राहुल गांधी ने खुद फोन करके उन्हें मनाया। लेकिन जैसे ही बंगाल के चुनाव नजदीक आए, ममता ने फिर से कांग्रेस के लिए नो-एंट्री का बोर्ड लगा दिया।

राहुल गांधी का तीखा प्रहार

दिल्ली के चुनावों में जिस तरह राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा था, ठीक उसी तरह बंगाल के चुनावों में ममता बनर्जी भी उनके निशाने पर आ गईं। राहुल गांधी ने बंगाल के चुनावी मंचों से ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार करने और परोक्ष रूप से बीजेपी की मदद करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान जनता के सामने गरजते हुए कहा था कि केवल कांग्रेस पार्टी ही असल मायने में बीजेपी और नरेंद्र मोदी से लोहा ले रही है।

राहुल गांधी ने अपनी रैलियों में भावुक होते हुए कहा था कि बीजेपी से लड़ने की वजह से वह खुद जमानत पर बाहर हैं, उनका सरकारी घर छीन लिया गया, उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई और उन पर छत्तीस से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इसके बाद उन्होंने बंगाल की जनता से एक बड़ा सवाल पूछते हुए कहा कि मैं जानना चाहता हूं कि आखिर ममता जी के खिलाफ नरेंद्र मोदी ने आज तक कितने मुकदमे दर्ज कराए हैं? राहुल गांधी के इस एक बयान ने दिल्ली और कोलकाता के बीच के सारे राजनीतिक पाखंड की पोल खोलकर रख दी थी।

चुनावी हार के बाद बदला समीकरण

हालांकि, चुनाव के नतीजे आने के बाद जब टीएमसी को तगड़ा झटका लगा, तो राहुल गांधी के सुर थोड़े नरम जरूर पड़े। उन्होंने सोशल मीडिया पर उन कांग्रेस नेताओं को फटकार लगाई जो ममता की हार पर जश्न मना रहे थे। राहुल ने चुनाव आयोग पर उठाए गए ममता के सवालों का समर्थन भी किया। लेकिन वह यह कभी नहीं भूल सकते कि कैसे हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद ममता बनर्जी ने राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सरेआम सवाल उठाए थे और खुद विपक्ष का चेहरा बनने की दावेदारी ठोक दी थी।

आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। दिल्ली में चुनाव हारने के बाद अरविंद केजरीवाल, बिहार में शिकस्त के बाद तेजस्वी यादव और बंगाल में पैर उखड़ने के बाद ममता बनर्जी, सभी नेता आज एक ही लाचार मोड़ पर आकर खड़े हो गए हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस आज भी अपनी जगह मजबूती से टिकी हुई है और उसके पास चार राज्यों में अपनी सरकारें हैं। इस बीच, बंगाल की धरती से अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को एक बेहद कड़वी और अनोखी सलाह दे डाली है। उन्होंने कहा है कि अगर ममता को अपना राजनीतिक वजूद बचाना है, तो उन्हें तुरंत तृणमूल कांग्रेस का विलय वापस कांग्रेस पार्टी में कर देना चाहिए। अब ममता को भी यह समझ आ रहा होगा कि बीजेपी जहां उनके साथ हर जगह एक जैसा कड़ा व्यवहार कर रही है, वहीं कांग्रेस दिल्ली में मल्हम और बंगाल में जख्म देने का दोहरा खेल खेल रही है।

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