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सिद्धू ने वाजपेयी की लाहौर यात्रा से की तुलना, बोले- आर्मी चीफ की बातों से भावुक हो दे दी झप्‍पी

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 21 Aug 2018 8:48 AM GMT

सिद्धू ने वाजपेयी की लाहौर यात्रा से की तुलना, बोले- आर्मी चीफ की बातों से भावुक हो दे दी झप्‍पी
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चंडीगढ़: पाकिस्‍तान में इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में वहां के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा से गले मिलना पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के गले की हड्डी बन गई है। सिद्धू मंगलवार को सामने आए और पूरी माने पर सफाई दी। उन्‍होंने अपनी यात्रा की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा से कर डाली। बाजवा को झप्‍पी देने के हालातों को भी स्‍पष्‍ट करने की कोशिश की। उन्‍होंने कहा कि बाजवा ने गुरु नानक देव जी का नाम लिया और मैं भावुक हो गया और उनको झप्‍पी दे दी।

वाजपेयी की लाहौर यात्रा से की तुलना

सिद्धू ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत की। उन्‍होंने अपनी यात्रा की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा की तुलना तक कर डाली। उन्होंने कहा, मैं पाकिस्‍तान अमन के लिए गया था। मेरी यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच शांति और दोस्‍ती का माहौल बनाने गया था।

आर्मी चीफ की बातों से भावुक हो दे दी झप्‍पी

सिद्धू ने कहा, मेरी यात्रा पर अंगुलियों को उठाया जा रहा है। बाजवा मुझे पहली कतार में बैठा देख कर बोले करतारपुर का रास्ता खोलने का विचार है। मेरे लिए यह बड़ी बात थी और मैंने उनको गले से लगा लिया। चंद लम्हों के बाद बाजवा से कोई मुलाकात नही हुई। मुझे आलोचना करने वालों से दुखी हूं। मेरे लिए यह यात्रा सम्मान वाली थी।

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दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ी

सिद्धू ने कहा, दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ी है। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी कहा कि पड़ोसी देश के साथ शांति बनाई जाएगी। यह सद्भावपूर्ण यात्रा थी, राजनीतिक नहीं थी। मेरी यात्रा भारत और पाकिस्‍तान के बीच शांति के दरवाजे खुलेंगे।

पाकिस्‍तान यात्रा के लिए मेरे ऊपर सवाल उठाना सही बात नहीं

उन्‍होंने इस मौके पर वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि दी। उनकी बस यात्रा का जिक्र किया। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान यात्रा के लिए मेरे ऊपर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन वाजपेयी जी भी तो बस से लाहौर गए थे। इसके बाद क्‍या हुआ, कारगिल का युद्ध हुआ तो क्‍या वाजपेयी देशभक्‍त नहीं थे? उसी परवेज मुशर्रफ से आगरा वार्ता हुई, जिसने कारगिल की लड़ाई शुरू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिना बुलाए पंजाब के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पारिवारिक समारोह में बिना बुलाए गए थे। उन पर तो कोई सवाल नहीं उठाता अौर मैं पाकिस्‍तान गया तो निशाना बनाया जा रहा है।

Aditya Mishra

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