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Rajya Sabha Election: राज्यसभा की 24 सीटों पर नामांकन, कहां निर्विरोध जीत रहे दिग्गज और कहां फंसा सबसे बड़ा पेंच?
Rajya Sabha Election: 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर मतदान होना है, जबकि नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
Rajya Sabha Election
Rajya Sabha Election: 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर मतदान होना है, जबकि नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस चुनाव में कई राज्यों में मुकाबला लगभग एकतरफा दिखाई दे रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश और झारखंड ऐसे राज्य हैं जहां चुनावी गणित ने राजनीतिक रोमांच बढ़ा दिया है। इन चुनावों को संसद के उच्च सदन में राजनीतिक दलों की ताकत बढ़ाने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किन राज्यों में होंगे चुनाव?
राज्यसभा चुनाव के तहत मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटों, झारखंड की दो सीटों, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की चार-चार सीटों तथा मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश की एक-एक सीट पर मतदान होगा। कई राज्यों में उम्मीदवारों की स्थिति लगभग स्पष्ट है, लेकिन कुछ सीटों पर राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
गुजरात में कांग्रेस का खत्म हो सकता है प्रतिनिधित्व
गुजरात की चार सीटों पर इस बार भारतीय जनता पार्टी ने राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, जिससे भाजपा के सभी उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं बचेगा। यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजस्थान में समीकरण लगभग साफ
राजस्थान की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। यहां किसी बड़े उलटफेर की संभावना कम दिखाई दे रही है।
मध्य प्रदेश बना चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र
इस बार सबसे अधिक चर्चा मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर हो रही है। भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। दो सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन तीसरी सीट के लिए भाजपा के महेश केवट और कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के बीच मुकाबला रोचक बन गया है। विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। गणित के अनुसार भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए अतिरिक्त समर्थन या क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस सीट पर सबसे ज्यादा टिकी हुई है।
झारखंड में निर्दलीय उम्मीदवार ने बढ़ाई चुनौती
झारखंड में दो सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। महागठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने प्रणब झा और जेएमएम ने बैद्यनाथ राम को मैदान में उतारा है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को भाजपा का समर्थन मिलने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। नाथवानी को जीत के लिए अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी, जो सत्ता पक्ष के खेमे से आ सकते हैं। यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनावी परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।
आंध्र प्रदेश में एनडीए की मजबूत स्थिति
आंध्र प्रदेश में चार सीटों पर चुनाव होना है। यहां एनडीए गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने तीन उम्मीदवार और जन सेना पार्टी ने एक उम्मीदवार उतारा है। विधानसभा में टीडीपी, जन सेना और भाजपा के संयुक्त संख्या बल के कारण एनडीए सभी चार सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है। ऐसे में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
कर्नाटक में कांग्रेस को बढ़त
कर्नाटक में भी चार सीटों पर चुनाव हो रहा है। यहां कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खरगे, मंसूर अली खान और पवन खेड़ा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने एम नागराज को मैदान में उतारा है। विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कांग्रेस के तीन और भाजपा के एक उम्मीदवार की जीत की संभावना जताई जा रही है।
पूर्वोत्तर राज्यों में तस्वीर लगभग साफ
मणिपुर में भाजपा ने अधिकारिमयुम सरदा देवी को उम्मीदवार बनाया है और उनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताई तागाक की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) के के. लालतलुआंगकिमा और मेघालय में नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) के जेम्स पी.के. संगमा मजबूत स्थिति में हैं।
राज्यसभा चुनाव भले ही अप्रत्यक्ष मतदान से होते हों, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व बेहद बड़ा होता है। खासकर मध्य प्रदेश और झारखंड के नतीजे यह संकेत दे सकते हैं कि आगामी चुनावों से पहले विभिन्न राज्यों में राजनीतिक समीकरण किस दिशा में बढ़ रहे हैं। इसलिए 18 जून का मतदान और उसके बाद आने वाले परिणाम सभी दलों के लिए अहम माने जा रहे हैं।


