गोरक्षा के नाम पर हिंसा: SC ने कहा- हर जिले में तैनात करें नोडल अफसर

Published by aman Published: September 6, 2017 | 1:57 pm
Modified: September 6, 2017 | 4:36 pm

नई दिल्ली: गोरक्षा के नाम पर देश में आए दिन हो रही हिंसा और हत्या की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कथित गोरक्षकों द्वारा की जा रही हिंसा को रोकने के लिए देशभर के हर जिले में एक नोडल अफसर की तैनाती का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि हर जिले में एक सीनियर पुलिस अधिकारी को नोडल अफसर बनाकर तैनात किया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य, दोनों से ही कहा है, कि गोरक्षा के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिवों को इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट एक हफ्ते में सौंपने का आदेश दिया है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, कि ‘ऐसे लोगों के खिलाफ ऐक्शन लेने के लिए कानून है।’

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बताएं, कार्रवाई क्या की गई?
तुषार मेहता के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कानून है, लेकिन कार्रवाई क्या की गई?’ चीफ जस्टिस ने कहा, कि ‘सरकार सुनियोजित कार्रवाई कर सकती है, ताकि गोरक्षा के नाम पर हिंसा न बढ़े।’

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मुख्य सचिवों को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताव राय और जस्टिस एम खानविलकर की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने राज्यों के मुख्य सचिवों को गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा की घटनाओं की रोकथाम के लिए की गई कार्रवाई के विवरण के साथ स्थिति रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया।

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ये पूछा केंद्र से
इस तीन सदस्यीय खंडपीठ ने केंद्र से कहा, कि ‘वह इस तर्क पर जवाब दाखिल करें कि क्या वह संविधान के अनुच्छेद- 256 के अंतर्गत सभी राज्यों को कानून-व्यवस्था से संबंधित मुद्दे पर निर्देश जारी कर सकती है।’

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तुषार गांधी ने दी थी जनहित याचिका
सुप्रीम कोर्ट महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा पर अंकुश पाने के उपाय करने का सभी राज्य सरकारों को निर्देश देने सहित कई राहतें प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। तुषार गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयिसंह ने गोमांस रखने या इसका सेवन करने या इसे ले जाने के नाम पर हिंसक भीड़ द्वारा लोगों को पीट-पीट कर मार डालने की घटनाओं की ओर कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया।