SC ने पूछा- कौन सा कानून लड़की को अपराधी से प्यार करने से रोकता है?

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केरल में लव जिहाद मामले में अखिल अशोकन उर्फ़ हादिया को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एनआईए से पूछा कि क्या कोई ऐसा कानून है कि किसी अपराधी के साथ बालिग लड़की प्यार या शादी नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने केरल उच्च न्यायलय से भी पूछा कि वो कैसे एक याचिका पर शादी को शून्य करार दे सकती है। वहीँ इससे पहले एनआईए ने कोर्ट को बताया था कि केरल में कट्टरता और लव जिहाद मामलों के पीछे पूरी एक मशीनरी काम कर रही है।

दरअसल, केरल में साल 2016 में एक हिंदू लड़की ने अपने माता-पिता की रजामंदी के बगैर ही एक मुस्लिम लड़के से प्रेम विवाह किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पिता की याचिका पर मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी। वहीँ केरल हाईकोर्ट ने इस निकाह को रद्द कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मुस्लिम युवक शैफीन जहां की याचिका की सुनवाई के दौरान लड़की के पिता और मामले के प्रतिवादी के.एम.अशोकन को आदेश दिया कि वह 27 नवम्बर को अगली सुनवाई के दौरान अपनी बेटी अखिला अशोकन उर्फ हादिया को पेश करें। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि युवती बालिग है और इस मामले में उसका पक्ष भी जानना जरूरी है। इसलिए न्यायालय हादिया का पक्ष भी खुली अदालत में सुनेगा।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनआईए को कड़ी फटकार भी लगाई और कहा कि देश का कोई भी कानून किसी लड़की को एक अपराधी से प्यार करने से नहीं रोकता। यदि लड़की वयस्क है तो केवल उसकी सहमति ही जरूरी होती है।
इससे पहले केरल लव जिहाद मामले में तीन अर्जियां सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर इस पूरे मामले की एनआईए से जांच कराने की मांग की गई थी।