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1090 मर्डर मिस्‍ट्री के खुलासे पर सवाल, दिव्‍यांग को फंसाकर भी नहीं बची कुर्सी

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 7 July 2018 4:47 PM GMT

1090 मर्डर मिस्‍ट्री के खुलासे पर सवाल, दिव्‍यांग को फंसाकर भी नहीं बची कुर्सी
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लखनऊ: यूपी में इस समय अफसर कुर्सी बचाने के लिए हर जतन करने को तैयार हैं। ताजा मामला राजधानी के 1090 चौराहे पर 10 साल के मासूम ऋतिक की हत्‍या का है। जिसमें अपनी नाक और कुर्सी बचाने की नीयत से तत्‍कालीन एसएसपी दीपक कुमार के नेतृत्‍व में एक दिव्‍यांग को जबरन मुजरिम बताकर खुलासा किया गया। हालांकि इस खुलासे के बाद भी एसएसपी दीपक कुमार अपनी कुर्सी नहीं बचा सके। उन्‍हें शनिवार को एसएसपी लखनऊ के पद से हटाकर गाजियाबाद पीएसी भेज दिया गया।

डीजीपी ओपी सिंह के साथ बेअंदाजी में बैठे आईपीएस दीपक कुमार

राजधानी में ही नहीं था कलाम

लखनऊ पुलिस ने जिस दिव्‍यांग कलाम को मुजरिम बताते हुए ऋतिक का हत्‍यारा करार दिया है। वह घटना वाली रात लखनऊ में ही नहीं था। इतना ही नहीं वह सुबह तक भी राजधानी वापस नहीं आया था।

जिस दिव्यांग कलाम को आरोपी साबित कर पुलिस ने जेल भेजा है, उसे अदम्य साहस और वीरता के लिए सीएम ने सम्‍मानित किया था। इतना ही नहीं उसकी पढ़ाई का खर्च भी सरकार उठा रही थी। वही कलाम अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए खुद चलकर पुलिस के पास पहुंचा था। लेकिन पुलिस ने उसपर थर्ड डिग्री इस्‍तेमाल करके गुनाह कबूल करने पर मजबूर कर दिया।

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सीसीटीवी में कैद हुई रिकार्डिंग

दिव्‍यांग कलाम खुद चलकर हजरतगंज थाने आया था। इस बात की पुष्टि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग से हो गई है। दिव्‍यांग कलाम गुरूवार सुबह साढे नौ बजे से 11 बजे के बीच थाने के गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में साफ देखा जा सकता है। जबकि पुलिस ने उसे अरेस्‍ट करने का दावा किया था।

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कलाम की कद-काठी संदिग्‍ध से नहीं हुई मैच

लखनऊ पुलिस ने घटनास्‍थल के सीसीटीवी फुटेज में जिसे संदिग्‍ध माना था। उसकी कद-काठी दिव्‍यांग कलाम से मैच नहीं हो रही है। इतना ही नहीं फुटेज में संदिग्‍ध पैंट-शर्ट पहने और पीठ पर बैग लटकाए दिख रहा है। ज‍बकि घटनास्‍थल पर ऋतिक के लेटने से लेकर अगली सुबह तक कोई अन्‍य शख्‍स सीसीटीवी की जद में नहीं आया। इससे साफ है कि कलाम घटना वाली रात घटनास्‍थल पर गया ही नहीं था।

एलयू मेें हुई थी अराजकता

कलाम की मोबाइल लोकेशन देवां में

पुलिस अपराधी की मोबाइल लोकेशन से भी उसके घटना में संलिप्‍त होने या न होने की पुष्टि करती है। अगर मोबाइल लोकेशन की बात करें तो बीते 2 जुलाई को दिव्‍यांग कलाम के मोबाइल नंबर 73#########3 की लोकेशन शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक बाराबंकी के दवां में थी। देवां में ही कलाम का गांव भी है।

इसके बाद रात 9 बजे के आस पास यह मोबाइल बक्शी का तालाब इलाके में पहुंचा और अगली सुबह यानी ऋतिक की लाश मिलने वाली सुबह 7बजे तक कलाम का मोबाइल बख्‍शी का तालाब इलाके में था।

एसएसपी दीपक कुमार पर उठे थे सवाल

गौरतलब है कि मासूम ऋतिक की हत्‍या से पहले एसएसपी दीपक कुमार के नेतृत्‍व पर सवाल उठने लगे थे। पॉलीटेक्निक छात्रा संस्‍कृति राय हत्‍याकांड हो या गोमतीनगर में चेकिंग के दौरान सिपाही द्वारा बदसलूकी का मामला। इंदिरानगर में युवती से गैंगरेप हो। लखनऊ पुलिस की खूब किरकिरी हुई थी। इसके बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी में अराजकता मामले में तो एसएसपी दीपक कुमार की कुर्सी पर बात बन आई। इतना ही नहीं हाईकोर्ट द्वारा इसी घटना का संज्ञान लेने पर डीजीपी ओपी सिंह समेत इन्‍हें हाईकोर्ट तलब किया गया था। उस दिन एसएसपी दीपक कुमार डीजीपी के सामने बेअंदाजी में बैठे कैमरे में कैद हो गए। ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ये सबकी आंखों में खटकने लगे। इन सब मामलों पर पर्दा डालने के लिए एक गुडवर्क जरूरी हो गया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि दिव्‍यांग कलाम को पुलिस ने इसके लिए बलि का बकरा बना दिया। हालांकि एसएसपी दीपक कुमार अपनी कुर्सी बचाने में नाकाम रहे।

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