बवासीर हो या वात विकार, इन 5 तेलों के इस्तेमाल से मिलेगा आराम

जयपुर: शरीर से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए आयुर्वेद में इलाज़ है। इसमें प्राकृतिक तरीके से ही हर समस्या के सामाधान बताया गया है। इन्हीं में से एक है तेल। आयुर्वेद में कुछ खास तेलों के बारे में बताया गया है, जो कई तरह के रोग ठीक करने में मददगार हैं।

नारायण तेल: रीढ़ की हड्डी में दर्द, कब्ज, वात रोग, हनुस्म्भ, बहरापन, गतिभंग, कमर का दर्द, अंत्रवृद्धि, पार्श्व शूल, , गात्र शोथ, इन्द्रिय ध्वंस, वीर्य क्षय, ज्वर क्षय, दांतों के रोग, जैसी बीमारियों का इलाज इस तेल से किया जा सकता है। आप इस तेल से मालिश भी कर सकते हैं या दूध में 1-2 बूंद डालकर पी सकते है। ये लकवे की बीमारी के लिए भी फायदेमंद है।

चंदनबला लाशादि तेल: शरीर की 7 धातुओं का इलाज इस तेल से किया जा सकता है. वात विकार भी इस तेल से नष्ट होते हैं. जिन्हें सूजन रहती है, उन्हें भी इससे मालिश करनी चाहिए. इसके आलावा कास, श्वास, क्षय, शारीरिक क्षीणता, दाह, रक्तपित्त, खुजली, शिररोग, नेत्रदाह, सूजन, पांडू और पुराने ज्वर में इस तेल से फायदा होता है। सुबह और शाम आप दो वक्त इस तेल से मालिश कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें…करें ये सरल घरेलू उपाय, इस सर्दी नहीं करेगा आर्थराइटिस आपको परेशान

इरमेदादि तेल: मुंह से जुड़े लगभग सभी रोगों के लिए ये तेल फायदेमंद है। मसूढ़ों के रोग, मुंह से दुर्गंध आना, जीभ, तालू और होठों के रोगों में भी इस तेल के इस्तेमाल से फायदा होता है। आप इस तेल को मुंह में भरकर कुल्ला कर सकते हैं या तीली पर लगाकर अपने दांतों पर लगाएं आराम मिलेगा।

महाभृंगराज तेल: इस तेल को लगाने से गंजेपन की समस्या से राहत मिलती है। इस तेल से आप सिर पर हल्के हाथ से मालिश करें। लगातार कुछ दिनों तक इस तेल से मालिश करने से बाल गिरने की समस्या खत्म हो जाती है। बाल लंबे और घने हो जाते हैं। दिमाग को ठंडक पहुंचती है और सिर पर नए बाल भी उगने लगते हैं।

यह भी पढ़ें…इस हिस्से तेल लगाने से मिलेगी दर्द से राहत, खूबसूरती में भी लगेगा चार चांद

काशीसादि तेल: इस तेल को लगाने से बवासीर में आराम मिलता है। इसके आलावा नाड़ी नासूर और दूषित नासूर के लिए भी ये तेल फायदेमंद है। रुई को तेल में भिगोकर लगाने से बवासीर ठीक हो सकता है।