ध्वस्त हो गया लक्ज़री सामानों का ग्लोबल बाजार

बाइन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार महामारी की शुरुआत से एक चौथाई उपभोक्ताओं ने लक्जरी आइटम्स की खरीद को रोक दिया था और धीरे धीरे ये प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। लोग सस्ते विकल्पों की तरफ जा रहे हैं।

नई दिल्ली। विश्व भर में लोगों के खर्चों और व्यक्तिगत पसंद में किस तरह बदलाव आया है वह लक्जरी आइटम्स की इंडस्ट्री के हाल से पता चलता है। व्यक्तिगत इस्तेमाल वाले लक्जरी आइटम्स की ग्लोबल डिमांड कई दशकों से लगातार बढ़ती जा रही थी और 2019 में ये इंडस्ट्री 208 बिलियन डालर की हो गई। लेकिन विलासिता की उम्दा चीजों को पाने की लोगों की अदम्य चाहत पर अचानक ही कोविड-19 ने ब्रेक लगा दिया।

अब एक्स्पर्ट्स की भविष्यवाणी है कि इस साल ही लक्जरी सामानों के बाजार का एक तिहाई हिस्सा खत्म हो जाएगा। चीन जैसे लक्जरी सामानों के बड़े बाजार में लोग अब पैसा बचाने को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं और ये सिलसिला और भी तेज होगा।

चीन की मजबूती

ग्लोबल लक्जरी बाजार में सौन्दर्य संबंधी सामान, परिधान और एसेसरीज़ शामिल होती हैं और ये बाजार 1990 के दशक से 6 फीसदी प्रतिवर्ष की रफ्तार से बढ़ रहा था। हाल के वर्षों में इस बाजार में तेजी और विस्तार आमतौर पर चीनी उपभोक्ताओं की वजह से रहा है। 2019 में विश्व में लक्ज़री सामानों की बिक्री में बढ़ोतरी में 90 फीसदी हिस्सा चीन का रहा है। यूरोप और अमेरिका इसके काफी पीछे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि चीन के युवा लक्जरी सामानों के बहुत बड़े उपभोक्ता हैं। इन युवाओं के पास खर्चा करने की अच्छी ख़ासी हैसियत है और कोविड-19 काल से पहले चीनी युवाओं की खर्च करने की औसत क्षमता बहुत माजूब थी। औसतन एक चीनी युवा 6 हजार डालर (सवा चार लाख रुपये) खर्च करता था।

अब संकट का समय

बंद बाज़ारों और उपभोक्ताओं द्वारा कम खर्चा करने की वजह से 2020 के पहले चार महीनों में लक्जरी आइटम्स की इंडस्ट्री घुटनों के बल आ गई है। स्टोर्स बंद होने के कारण फैशन और लक्जरी आइटम्स के 80 फीसदी निर्माता संकट में आ गए हैं।

नीमन मार्कस जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड ने दिवालिया होने की अर्जी लगा दी है जिससे साफ पता चलता है कि ये इंडस्ट्री किस हाल में है। सबसे बुरा हाल उन कंपनियों का है जो कोविड-19 से पहले से ही ही परेशानी में चल रहे थे।

बाइन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार महामारी की शुरुआत से एक चौथाई उपभोक्ताओं ने लक्जरी आइटम्स की खरीद को रोक दिया था और धीरे धीरे ये प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। लोग सस्ते विकल्पों की तरफ जा रहे हैं।