अब सर्दी-जुकाम के वायरस से होगा 100 तरह के कैंसर का इलाज

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे वायरस की खोज की है जो कि दुनियाभर में पाए जाने वाले लगभग 100 से ज्यादा तरह के कैंसर का इलाज करने में सक्षम है।

Published by Shreya Published: November 12, 2019 | 3:20 pm
अब सर्दी-जुकाम के वायरस से होगा 100 तरह के कैंसर का इलाज

अब सर्दी-जुकाम के वायरस से होगा 100 तरह के कैंसर का इलाज

वैज्ञानिकों को कैंसर को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे वायरस की खोज की है जो कि दुनियाभर में पाए जाने वाले लगभग 100 से ज्यादा तरह के कैंसर का इलाज करने में सक्षम है। अगर कोई इंसान कैंसर के तीसरे या चौथे स्टेज पर भी है तो ये वायरस उसको जड़ से खत्म कर सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि, अगर सब कुछ प्रयोग के अनुसार रहा तो अगले साल ही इसे स्तन कैंसर के मरीजों पर परीक्षण किया जा सकेगा। इस वायरस को वैक्सीनिया सीएफ-33 नाम दिया गया है।

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काउपॉक्स जैसा है वायरस

इस पर वैज्ञानिकों का कहना है कि, दिखने में ये वायरस बिल्कुल काउपॉक्स वायरस जैसा ही है। ये वायरस आमतौर पर इंसान में सर्दी-जुकाम के वक्त बनता है। जब इस वायरस को कैंसर की कोशिकाओं के साथ मिलाया गया तो इसके जो परिणाम सामने आए, वो बेहद चौंकाने वाले थे। प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि, इस वायरस ने पेट्री डिश में मौजूद सभी तरह के कैंसर को पूरी तरह से खत्म कर दिया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसका परीक्षण कैंसर प्रभावित चूहों पर भी किया और जब ये परीक्षण चूहों पर किया गया तो इसका कमाल का असर देखने को मिला। वायरस ने चूहे में मौजूद कैंसर के ट्यूमर को सिकोड़कर छोटा कर दिया।

ऐसे परिणाम आए सामने

जानकारी के अनुसार, वैज्ञानिक इस वायरस का इस्तेमाल शुरुआत में ब्रेन कैंसर के इलाज के लिए कर रहे थे। इस दिशा में उनको थोड़ी सी कामयाबी भी हाथ लगी। वैज्ञानिकों ने पाया कि, जहां कुछ मरीजों में ये ट्यूमर छोटा हो गया तो वहीं कुछ मरीजों में बिल्कुल ही गायब हो गया। इसके बाद में एक ऑस्ट्रेलियाई बायोटेक कंपनी इम्यूजीन ने इसे एक दवा के रुप में बनाना तैयार करना शुरु कर दिया। इस कंपनी में वायरस की इस दवा को बनाने का श्रेय अमेरिकी वैज्ञानिक और कैंसर विशेषज्ञ प्रोफेसर यूमान फॉन्ग को जाता है।

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हर तरह के कैंसर के खात्मे के लिए सक्षम है वायरस

प्रोफेसर यूमान फॉन्ग के मुताबिक, 19वीं सदी से ही ऐसे प्रमाण थे कि वायरस कैंसर के खात्मे में उपयोगी है। जब कुत्ते के काट लेने पर लोगों को रेबीज के खिलाफ वायरस का टीका लगाया जाता था तो ये नष्ट हो जाता था। हालांकि, ये डर बना रहता था कि ऐसा वायरस कहीं इंसानों के लिए और खतरनाक न साबित हो जाए या फिर उनकी इससे मौत न हो जाए। उन्होंने अपने परीक्षण में ये पाया कि, 200 सालों से इस काउपॉक्स ने लोगों की सुरक्षा ही की है। शुरु से ही इसे इंसानों के लिए हानिकारक नहीं माना जाता है। उन्होंने जब काउपॉक्स को अन्य वायरस के साथ मिलाकर ये दवा तैयार की तो पाया कि, ये हर तरह के कैंसर को नष्ट करने के लिए सक्षम है।

अभी फिलहाल इस दवा का परीक्षण ऑस्ट्रेलिया में ही किया जाएगा। इसके बाद ही इसे दूसरे देशों में आजमाया जाएगा। इस दवा का सबसे पहले स्तन कैंसर, त्वचा कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, पेट के कैंसर और पित्ताशय के कैंसर पर इसका परीक्षण किया जाएगा। इस वायरस का चूहों पर परीक्षण किया जा चुका है और अब इंसानों पर इसका परीक्षण होना बाकी है। जिसके दौरान इसके दुष्प्रभावों की भी जांच करनी होगी।

पिछले साल 8 लाख लोगों की गई थी जान

एक अध्ययन में ये पाया गया है कि, भारत में कैंसर के 11 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। वहीं, पिछले साल 2018 में कैंसर से करीब 8 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

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