बारिश में क्यों लगता है करंट? इलेक्ट्रिक शॉक से बचने के लिए तुरंत करें यह उपाय, एक्सपर्ट्स ने बताया सबकुछ

Electric Shock Symptoms: कई बार कूलर, बिजली के खंभे या खुले तार की चपेट में आकर हादसे हो जाते हैं। ऐसे में सही फर्स्ट एड देकर इंसान की जान बचाई जा सकती है।

Ragini Sinha
Published on: 25 July 2025 1:54 PM IST
Electric Shock Symptoms
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Electric Shock Symptoms (SOCIAL MEDIA)

Electric Shock Symptoms: बरसात के मौसम में बिजली का करंट लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। गीली सतह पर खुले तार या कटे हुए वायर के संपर्क में आने से करंट पानी में फैल जाता है, जो जानवरों और इंसानों दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार कूलर, बिजली के खंभे या खुले तार की चपेट में आकर हादसे हो जाते हैं। ऐसे में सही फर्स्ट एड देकर इंसान की जान बचाई जा सकती है।

क्या करें अगर करंट लगे?

BLK-Max सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एक्सपर्ट बताते हैं कि सबसे पहले यह जांचें कि पीड़ित व्यक्ति होश में है या नहीं। उसकी सांस और नब्ज की जांच करें। कलाई पर 5 सेकंड तक नब्ज चेक करें और देखें कि सांस लेने में कोई दिक्कत तो नहीं है। यदि वह करंट से अभी भी जुड़ा है, तो उसे बिना सुरक्षा छुएं नहीं।


तुरंत उठाए जाने वाले कदम

अगर किसी व्यक्ति को करंट लग जाए, तो सबसे पहले करंट का स्रोत बंद करें या सूखी लकड़ी, प्लास्टिक या रबर की चीज़ से व्यक्ति को करंट से अलग करें। ध्यान रखें कि खुद गीले हाथ या पैर से उसे न छुएं। यदि स्किन पर जलन या जलने के निशान हैं, तो प्रभावित हिस्से को कम से कम 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। इसके बाद घाव को साफ और स्टेराइल गौज-बैंडेज से ढक दें ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। अगर नब्ज या सांस रुक गई है, तो तुरंत CPR दें।

बाद में क्या करें?

दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. राकेश गुप्ता बताते हैं कि करंट लगने के बाद व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए। कई बार असर कुछ घंटों बाद दिखता है, जैसे सीने में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, तेज धड़कन या बेहोशी। ऐसी स्थिति में ECG और ब्लड टेस्ट जरूरी हो जाता है।


इन टिप्स को करें फॉलो

  • करंट लगने के बाद व्यक्ति की सांस और दिल की धड़कन पर नजर रखें।
  • ठंडे पानी की सिकाई से जलन और सूजन को कम करें।
  • सही समय पर डॉक्टर को दिखाने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
  • समय पर फर्स्ट एड और मेडिकल सहायता से करंट का खतरा कम किया जा सकता है।
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