कोर्ट ने कहा- फर्जी एनकाउंटर मामले में IPS जे रविंद्र गौड़ के खिलाफ केस चलाने का पर्याप्त आधार

सीबीआई की एक स्पेशल कोर्ट ने बरेली के दवा व्यवसायी मुकुल गुप्ता के एनकाउंटर मामले में तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक जे रविंद्र गौड़ के खिलाफ केस चलाने का पर्याप्त आधार पाया है।

लखनऊ: एक फर्जी एनकांउटर मामले में आईपीएस जे रविंद्र गौड़ की मुसीबतें बढ़ सकती है। सीबीआई की एक स्पेशल कोर्ट ने बरेली के दवा व्यवसायी मुकुल गुप्ता के एनकाउंटर मामले में तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जे रविंद्र गौड़ के खिलाफ केस चलाने का पर्याप्त आधार पाया है।

कोर्ट ने पत्रावली पर मौजूद तथ्यों पर गौर करने के बाद पाया कि गौड़ के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, आपराधिक षडयंत्र रचने, मिथ्या साक्ष्य और एनकाउंटर की झूठी कहानी बनाने का प्रथम दृष्टया केस बनता है। कोर्ट ने इन्हीं आरोपों में गौड़ के खिलाफ संज्ञान लिया है।

स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नीलू मैनवाल ने सीबीआई को आदेश दिया है कि वह आरेापित आईपीएस जे रविंद्र गौड़ के संबध में शेष समस्त अभियोजन प्रपत्र 07 जनवरी, 2017 तक कोर्ट में पेश करे। बता दें कि जे रवींद्र गौड़ वर्तमान में मेरठ में डीआईजी के पद पर तैनात हैं। जे रवींद्र गौड़ जरिए वकील अदालत में हाजिर हो चुके हैं।

सीबीआई ने इस मामले में नौ पुलिस वालों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। जिसमें एसआई देवेंद्र कुमार, विकास सक्सेना, मूला सिंह, राकेश कुमार के अलावा कांस्टेबल गौरीशंकर, जगबीर सिंह, बृजेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा और कालीचरण का नाम शामिल है। शासन से अभियोजन अनुमति के अभाव में सीबीआई आरेापित जे रवींद्र गौड़ के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी थी।

जिसके बाद शासन ने गौड़ के खिलाफ मांगी गई अभियोजन अनुमति को खारिज कर दिया था। जिस पर मृतक मुकुल गुप्ता के पिता बृजेंद्र कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने शासन को अपने निर्णय पर पुर्नविचार करने को कहा। लेकिन शासन ने एक बार फिर से अभियोजन की अनुमति खारिज कर दी। बृजेंद्र कुमार गुप्ता एक बार फिर हाईकोर्ट गए।

जिसके बाद हाईकोर्ट ने शासन के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जे रवींद गौड़ के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी आवश्यक है अथवा नहीं इसका फैसला उचित स्तर पर खुद संबधित कोर्ट करेगी।

हाईकोर्ट के इस आदेश को गौड़ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के उक्त आदेश की पुष्टि कर दी साथ ही गौड़ की गिरफ्तारी पर रोक भी लगा दी।

मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार
स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नीलू मैनवाल ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के मद्देनजर और पत्रावली पर मौजूद तथ्यों के अवलोकन से मुल्जिम जे रविंद्र गौड़ के खिलाफ इस मामले में उक्त आरोपों के तहत मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार पाया।

क्या है मामला?
बदायूं के रहने वाले दवा व्यवसायी मुकुल गुप्ता की 30 जून, 2007 को बरेली पुलिस ने रुकुमपुर, माधवपुर रेलवे स्टेशन थाना फतेहगंज के पश्चिमी क्षेत्र में फर्जी मुठभेड़ दिखाकर हत्या कर दी थी। जिसकी एफआईआर मृतक के पिता बृजेंद्र कुमार गुप्ता की अर्जी पर कोर्ट के आदेश से दर्ज हुई थी। अपनी अर्जी में उन्होंने बरेली के तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक जे रविंद्र गौड़ समेत अन्य पुलिस वालों को मुल्जिम बनाया था।

मृतक के पिता ने क्या आरोप लगाया ?
मृतक के पिता बृजेंद्र का आरोप था कि आउट ऑफ टर्न प्रमोशन प्राप्त करने के लिए जे रविंद्र गौड़ ने इस कार्य की योजना बनाई थी लेकिन इस मामले की जांच गलत दिशा में होने का आरोप लगाकर उन्होंने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए 26 फरवरी, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।